कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है. कर्मचारियों ने संकेत दिया कि यदि मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे.
- 14 सूत्री मांगों पर पटना में गरजी आवाज, प्रोन्नति-वेतन से लेकर पुरानी पेंशन तक उठे सवाल
- बोले कर्मचारी- मांगों पर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो न्यायालयों में बढ़ेगा आंदोलन का असर
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सूबे के व्यवहार न्यायालयों में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी 14 सूत्री मांगों को लेकर रविवार को पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर हुंकार भरी. सरकार को साफ संदेश दिया गया कि अब मांगों को टालने का दौर ज्यादा लंबा नहीं चलेगा. बिहार व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ ने आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम घोषित करते हुए कहा कि मांगों पर ठोस पहल नहीं हुई तो 7 अक्टूबर को राज्यभर के व्यवहार न्यायालयों में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे. इसके बाद भी समाधान नहीं हुआ तो 2 नवंबर से सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी गई है.
न्याय व्यवस्था की रीढ़, फिर भी मांगें लंबित
संघ अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने कहा कि न्यायिक कर्मचारी न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन वर्षों से उनकी प्रोन्नति, वेतन विसंगति, कैडर पुनर्गठन, भत्ते, स्थानांतरण, अनुकंपा नियुक्ति, स्वास्थ्य सुविधा और पेंशन जैसी महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं. कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है.
4,600 ग्रेड पे से लेकर नियमित प्रोन्नति की मांग
संघ ने न्यायालय सहायकों के कैडर का एक जनवरी 2006 से पुनर्गठन कर 4,600 रुपये ग्रेड पे के आधार पर वेतन पुनरीक्षण की मांग की. लंबित प्रोन्नति मामलों का तत्काल निष्पादन करने और नियमित प्रोन्नति के स्थान पर जबरन एमएसीपी दिए जाने की व्यवस्था समाप्त करने की भी मांग उठाई गई.
समान काम, समान वेतन और अलग कैडर पर जोर
कर्मचारियों ने समान काम के लिए समान वेतन, स्पष्ट कार्यदायित्व और पृथक न्यायिक कर्मचारी कैडर की मांग रखी. शेट्टी आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप वेतन एवं भत्तों का पुनरीक्षण तथा गृह जिला या प्रमंडल के भीतर पारदर्शी ऑनलाइन स्थानांतरण और पदस्थापना व्यवस्था लागू करने की मांग भी प्रमुख रही.
अनुकंपा नियुक्ति से हेल्थ कार्ड तक, मांगों की लंबी फेहरिस्त
संघ ने शत-प्रतिशत अनुकंपा नियुक्ति, निःशुल्क हेल्थ कार्ड और कैशलेस चिकित्सा सुविधा, बच्चों के लिए शिक्षा भत्ता तथा बिहार में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की. कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया.
2 नवंबर से पहले वार्ता की अपील
महासचिव सत्यार्थ सिंह ने कहा कि संघ का उद्देश्य न्यायिक कार्य को बाधित करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान की रक्षा करना है. उन्होंने सरकार से अपील की कि 2 नवंबर से पहले उच्चस्तरीय वार्ता कर मांगों का समयबद्ध समाधान किया जाए.
आदेशों के अनुपालन की भी उठी मांग
संघ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय के आदेशों एवं निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है. कर्मचारियों ने संकेत दिया कि यदि मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे.






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