रक्तदान करने पहुंचने वाले डोनरों को कई बार बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है. पानी, एसी-पंखे, एंटीसीरा, ऑनलाइन और वास्तविक रक्त स्टॉक में अंतर, रक्तदान शिविरों की व्यवस्था तथा वर्षों से बंद ब्लड सेपरेशन यूनिट को लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं.
- एसी-पंखे से लेकर एंटीसीरा और ऑनलाइन स्टॉक तक पर ब्लड बक्सर ने उठाई आपत्ति
- वर्षों से बंद ब्लड सेपरेशन यूनिट को चालू कराने की मांग, रक्तदाताओं ने भी कहा- ऐसी व्यवस्था मनोबल गिराने वाली
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सदर अस्पताल स्थित रक्त अधिकोष की व्यवस्थाओं को लेकर ब्लड बक्सर ने छह बड़े सवाल खड़े किए हैं. संस्था के संस्थापक-संचालक प्रियेश ने आरोप लगाया कि रक्तदान करने पहुंचने वाले डोनरों को कई बार बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है. पानी, एसी-पंखे, एंटीसीरा, ऑनलाइन और वास्तविक रक्त स्टॉक में अंतर, रक्तदान शिविरों की व्यवस्था तथा वर्षों से बंद ब्लड सेपरेशन यूनिट को लेकर उन्होंने गंभीर सवाल उठाए हैं.
प्रियेश के मुताबिक इन समस्याओं को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही है, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ. उनका कहना है कि संस्था नियमित रूप से डोनर उपलब्ध कराती है और जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था करती है. ऐसे में यदि रक्तदान स्थल पर ही डोनरों को परेशानी होगी तो इसका सीधा असर रक्तदान की मुहिम पर पड़ सकता है.
पहला सवाल: डोनर को पानी के लिए भी क्यों होना पड़ रहा परेशान?
प्रियेश ने दावा किया कि हाल में रक्तदान कराने पहुंचे एक डोनर ने पानी मांगा तो कथित तौर पर उसे अपने पैसे से पानी खरीदने के लिए कहा गया. उनके मुताबिक डोनर को ओआरएस तो दिया गया, लेकिन पानी की व्यवस्था स्वयं करने की बात कही गई.
उनका कहना है कि रक्तदान के बाद डोनर के लिए पानी और जलपान जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहनी चाहिए. उन्होंने दावा किया कि डोनर के रिफ्रेशमेंट के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत राशि भी उपलब्ध होती है.
दूसरा सवाल: दुर्लभ रक्त समूह के लिए एंटीसीरा क्यों नहीं?
प्रियेश ने बी नेगेटिव रक्तदान से जुड़ी एक घटना का हवाला देते हुए दावा किया कि रात में रक्तदान कराने के दौरान एंटीसीरा उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई. उनका कहना है कि नेगेटिव रक्त समूहों की मांग बनी रहती है और ऐसे समय में आवश्यक जांच एवं रक्त मिलान से जुड़ी सामग्री उपलब्ध रहना जरूरी है.
उन्होंने कहा कि उनकी संस्था दुर्लभ रक्त समूहों के लिए लगातार डोनरों की व्यवस्था करती है. ऐसे में रक्त उपलब्ध कराने के बाद भी जरूरी प्रक्रिया की सामग्री की व्यवस्था संस्था या डोनर को ही करनी पड़े तो यह चिंता का विषय है.
तीसरा सवाल: ऑनलाइन स्टॉक कुछ और, मौके पर कुछ और?
ब्लड बक्सर ने रक्त अधिकोष के ऑनलाइन स्टॉक को लेकर भी सवाल उठाया है. प्रियेश ने 14 अगस्त के ऑनलाइन स्टॉक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ऑनलाइन व्यवस्था में ओ पॉजिटिव समेत कई रक्त समूहों की अलग-अलग मात्रा दिखाई जा रही थी, जबकि सदर अस्पताल पहुंचने पर वास्तविक स्टॉक अलग बताया गया.
उनका कहना है कि आज के दौर में मरीज और परिजन घर बैठे ऑनलाइन रक्त का स्टॉक देखकर अस्पताल पहुंचते हैं. यदि ऑनलाइन कुछ और दिखाई दे और अस्पताल पहुंचने पर कुछ और जानकारी मिले तो परेशानी बढ़ जाती है.
प्रियेश ने कहा कि ऐसी स्थिति में सबसे अधिक रक्तदान कराने वाली संस्था की छवि पर भी सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने ऑनलाइन और वास्तविक स्टॉक में पारदर्शिता की मांग की.
चौथा सवाल: एसी, पंखा और पानी की व्यवस्था कब होगी?
ब्लड बक्सर ने रक्तदान स्थल की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल उठाया. प्रियेश के मुताबिक पानी की मशीन लंबे समय से खराब है. एसी और पंखों की खराबी का भी उन्होंने दावा किया.
उन्होंने 8 अप्रैल 2025 की तस्वीर और वीडियो का हवाला देते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में डोनरों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. उनका कहना है कि रक्तदान के दौरान किसी डोनर की तबीयत बिगड़ जाए या वह बेहोश होकर गिर जाए तो ऐसी स्थिति में तत्काल राहत के लिए पानी, हवा और उचित रिफ्रेशमेंट की व्यवस्था बेहद जरूरी है.
पांचवां सवाल: रक्तदान शिविरों में देरी से क्यों पहुंचती है व्यवस्था?
प्रियेश ने रक्तदान शिविर आयोजित कराने को लेकर भी समस्या बताई. उनका आरोप है कि कई बार शिविर के लिए आवेदन देने के बाद टीम निर्धारित समय पर नहीं पहुंचती. इसके कारण डोनरों को इंतजार करना पड़ता है और कभी-कभी डोनर वापस लौट जाते हैं.
उन्होंने कहा कि रक्तदान करने वाला व्यक्ति अपनी इच्छा से समाजसेवा के लिए आता है. ऐसे में उसे घंटों इंतजार कराना उचित नहीं है. यदि शिविर का समय तय है तो संबंधित टीम और जरूरी संसाधन भी समय पर उपलब्ध होने चाहिए.
छठा सवाल: ब्लड सेपरेशन यूनिट कब होगी चालू?
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में ब्लड सेपरेशन यूनिट को शामिल करते हुए प्रियेश ने कहा कि सदर अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लंबे समय से प्रयास किए गए थे. उनका दावा है कि मशीन उपलब्ध है, लेकिन अभी तक इसका समुचित संचालन नहीं हो सका है.
उनके मुताबिक ब्लड सेपरेशन के जरिए एक यूनिट रक्त से पीआरबीसी, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स जैसे अलग-अलग अवयव तैयार किए जा सकते हैं. अलग-अलग बीमारियों और मरीजों की जरूरत के अनुसार इनका इस्तेमाल किया जाता है. डेंगू जैसे मामलों में प्लेटलेट्स की जरूरत इसका प्रमुख उदाहरण है.
प्रियेश का कहना है कि यदि बक्सर में यह यूनिट पूरी तरह चालू हो जाती है तो मरीजों को दूसरे शहरों पर निर्भरता कम होगी और पूरे शाहाबाद क्षेत्र को इसका लाभ मिल सकता है.
कई स्तरों पर शिकायत का दावा
ब्लड बक्सर के संस्थापक-संचालक ने कहा कि इन समस्याओं को लेकर कई बार सिविल सर्जन, रेड क्रॉस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई. इसके अलावा ईमेल, वाट्सऐप और वीडियो के माध्यम से भी समस्याओं की जानकारी देने का दावा किया गया.
उन्होंने मुख्यमंत्री के सहयोग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराने की बात कही. प्रियेश के मुताबिक शिकायत को पोर्टल पर 'समाधान' दिखा दिया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं.
519 डोनरों के साथ काम करने का दावा
प्रियेश ने बताया कि ब्लड बक्सर के साथ करीब 519 डोनर जुड़े हैं और संस्था नियमित रूप से रक्तदान अभियान चलाती है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संस्था दुर्लभ रक्त समूहों के लिए भी डोनर तलाशती है.
उनका कहना है कि संस्था का उद्देश्य किसी विभाग या अधिकारी से विवाद करना नहीं, बल्कि रक्तदान की व्यवस्था को बेहतर बनाना है. यदि रक्तदान करने वाले लोगों को ही बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो नियमित रक्तदान को बढ़ावा देना मुश्किल होगा.
'व्यवस्था सुधारिए, हम रक्तदान करते रहेंगे'
प्रियेश ने कहा कि समस्याएं चाहे जितनी हों, उनकी संस्था रक्तदान का काम बंद नहीं करेगी. जरूरतमंद मरीजों के लिए डोनर उपलब्ध कराने का प्रयास जारी रहेगा.
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि रक्त अधिकोष की बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त की जाएं, ऑनलाइन स्टॉक को वास्तविक स्टॉक के अनुरूप रखा जाए, दुर्लभ रक्त समूहों से जुड़ी जांच सामग्री उपलब्ध हो और ब्लड सेपरेशन यूनिट को जल्द चालू किया जाए.
रक्तदाताओं ने भी कहा- व्यवस्था मनोबल गिराने वाली
प्रियेश के आरोपों के समर्थन में सुमित मानसिंहका, पंकज मानसिंहका, शादाब आलम समेत अन्य लोगों ने भी रक्त अधिकोष की व्यवस्था पर चिंता जताई. उनका कहना है कि रक्तदाता बिना किसी स्वार्थ के समाजसेवा की भावना से रक्तदान करने पहुंचते हैं. ऐसे में यदि उन्हें रक्तदान के दौरान बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़े तो यह रक्तदाताओं का मनोबल गिराने वाला है.
इन लोगों ने कहा कि रक्तदान की मुहिम को मजबूत बनाने के लिए डोनरों का सम्मान और उनकी सुविधाओं का ध्यान रखना जरूरी है. यदि बार-बार अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ेगा तो नए लोग रक्तदान के लिए आगे आने से हिचक सकते हैं.
उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में रक्त की जरूरत और रक्तदान की अहमियत किसी से छिपी नहीं है. इसके बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से रक्त अधिकोष की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए कोई ठोस पहल दिखाई नहीं देती. उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवाज उठानी चाहिए.
रेड क्रॉस अध्यक्ष ने भी माना- व्यवस्थाएं वाकई खराब
इस पूरे मामले में रेड क्रॉस के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने कहा कि रक्त अधिकोष की व्यवस्थाएं वाकई खराब हैं. उन्होंने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए सिविल सर्जन के स्तर से कोई पहल नहीं की जा रही है.
रेड क्रॉस अध्यक्ष के इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है. एक तरफ रक्तदान कराने वाली संस्था और रक्तदाता लगातार व्यवस्थाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं, वहीं रेड क्रॉस अध्यक्ष भी व्यवस्था खराब होने की बात कह रहे हैं. अब सवाल यह है कि रक्त अधिकोष की इन कमियों को दूर करने और रक्तदाताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की पहल आखिर कब होगी.
वीडियो :






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