राजा जनक की सभा में शिव धनुष भंग और भगवान श्रीराम-माता सीता के विवाह का मंचन होते ही पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा. धनुष टूटने के दृश्य पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया.

- वाटिका में राम-सीता के प्रथम मिलन ने मोहा मन, स्वयंवर में राजाओं के प्रयास रहे विफल
- धनुष भंग के बाद जनकपुर की महिलाओं ने गाए मंगलगीत, हल्दी-चुमावन जैसे संस्कारों का हुआ मंचन
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : जिले के ब्रह्मपुर तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में चल रही रामलीला के सातवें दिन शुक्रवार की रात भक्ति, परंपरा और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला. राजा जनक की सभा में शिव धनुष भंग और भगवान श्रीराम-माता सीता के विवाह का मंचन होते ही पूरा परिसर जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा. धनुष टूटने के दृश्य पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया.
वाटिका में पहली नजर का प्रसंग रहा आकर्षण का केंद्र
रामलीला की शुरुआत में जनक जी की वाटिका में भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन का मनोहारी मंचन किया गया. कलाकारों ने दोनों के प्रथम दर्शन के भावपूर्ण प्रसंग को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया. इसके बाद सीता स्वयंवर का दृश्य सामने आया, जहां अलग-अलग राज्यों से पहुंचे राजाओं ने भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाने का प्रयास किया, लेकिन कोई भी सफल नहीं हो सका.
गुरु की आज्ञा मिली और श्रीराम ने तोड़ दिया शिव धनुष
राजाओं के एक के बाद एक असफल होने के बाद गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पर भगवान श्रीराम स्वयंवर स्थल पर पहुंचे. श्रीराम ने सहज भाव से शिव धनुष को उठाया और जैसे ही उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया, धनुष भंग हो गया. धनुष टूटते ही परिसर में उत्साह की लहर दौड़ गई और दर्शकों की ओर से लगातार जय श्रीराम के जयकारे लगाए जाने लगे.
मंगलगीतों से गूंजा जनकपुर, दिखी लोक परंपरा की झलक
धनुष भंग के बाद भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का मंचन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया. जनकपुर की महिलाओं की भूमिका निभा रहीं कलाकारों ने विवाह और मंगलगीत प्रस्तुत किए. रघुनाथपुर की महिलाओं ने हल्दी, चुमावन सहित विवाह से जुड़े पारंपरिक संस्कारों का मंचन कर नवविवाहित राम-सीता को आशीर्वाद दिया. विवाह के इन दृश्यों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया.
तालियों और जयकारों से गूंजता रहा परिसर
राम-सीता विवाह की रस्में आगे बढ़ने के साथ रामलीला परिसर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया. दर्शक तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाते रहे और बीच-बीच में जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण गुंजायमान होता रहा. देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला के प्रसंगों का आनंद लेते रहे.
रामलीला में धर्म के साथ संस्कृति का संदेश
तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा ने कहा कि तुलसी आश्रम की रामलीला केवल धार्मिक प्रसंगों का मंचन नहीं, बल्कि क्षेत्र की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का प्रयास है. रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्श, मर्यादा, त्याग और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि प्रसंगों को स्थानीय लोक परंपराओं से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और सनातन मूल्यों से जुड़ी रहे.





.png)














0 Comments