बक्सर के सभी सरकारी-निजी स्कूलों में चलेगा ई-कचरा अभियान, 28 अक्टूबर को जमा होंगे पुराने मोबाइल-चार्जर और बैटरियां ..

इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) अनन्या ने पत्र जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और निजी विद्यालयों के प्रबंधकों व प्राचार्यों को आवश्यक निर्देश दिए हैं.




               




  • चार रंगों के डस्टबिन लगाना अनिवार्य, रिसाइक्लिंग सेंटर तक कचरा पहुंचाने के लिए होगी वाहन व्यवस्था
  • विशेष चेतना सत्र, क्विज प्रतियोगिता और अभिभावक बैठक से बढ़ेगी जागरूकता, जियो-टैग तस्वीरों से पोर्टल पर होगी रिपोर्टिंग

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पुराने मोबाइल, खराब चार्जर, केबल और बैटरियां अब स्कूलों में सामान्य कचरे से अलग एकत्र की जाएंगी. पर्यावरण संरक्षण और ई-कचरे के सुरक्षित निस्तारण को बढ़ावा देने के लिए बक्सर जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में अक्टूबर महीने के दौरान विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. स्वच्छता स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत 28 अक्टूबर 2026 को सभी विद्यालयों में ई-कचरा प्रबंधन पर विशेष चेतना सत्र, छात्र क्विज प्रतियोगिता और एकत्रित इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण से संबंधित कार्यक्रम आयोजित होंगे. इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) अनन्या ने पत्र जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापकों, प्रभारी प्रधानाध्यापकों और निजी विद्यालयों के प्रबंधकों व प्राचार्यों को आवश्यक निर्देश दिए हैं.

स्कूलों से कार्यालयों तक होगी चार रंगों के डस्टबिन की व्यवस्था

निर्देश के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में हरे, नीले, लाल और काले रंग के चार अलग-अलग डस्टबिन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी. सरकारी कार्यालयों, प्रखंड संसाधन केंद्रों (बीआरसी) और निजी कार्यालयों में भी चार रंगों के डस्टबिन की व्यवस्था लागू करने को कहा गया है. अक्टूबर महीने में पुराने मोबाइल, अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, चार्जर, केबल और बैटरियों जैसे ई-कचरे को एकत्र किया जाएगा. इसके लिए काले रंग के बिन का इस्तेमाल किया जाएगा.

विद्यालयों में ईको क्लब के पोर्टल पर उपलब्ध जागरूकता सामग्री, पोस्टर और बैनर प्रदर्शित किए जाएंगे. इन्हें चेतना सत्र के बैकड्रॉप, नोटिस बोर्ड या डिजिटल स्क्रीन पर लगाया जा सकेगा. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को इलेक्ट्रॉनिक कचरे के दुष्प्रभावों, उसके पृथक्करण और सुरक्षित निस्तारण के प्रति जागरूक करना है.

28 अक्टूबर को सुबह की प्रार्थना सभा में ई-कचरा प्रबंधन मुख्य विषय रहेगा. इस दौरान विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखना क्यों जरूरी है और उसका निस्तारण अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से कैसे किया जाना चाहिए. इसके साथ ही ई-कचरा पृथक्करण और सुरक्षित निस्तारण पर आधारित क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित होगी.

रिसाइक्लिंग सेंटर की मैपिंग, कचरा पहुंचाने के लिए वाहन

विद्यालयों में एकत्रित ई-कचरे को निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने के लिए वाहनों की व्यवस्था की जाएगी. इसके लिए सभी प्रखंडों और चिह्नित स्थलों पर ई-कचरा रिसाइक्लर्स तथा कलेक्शन सेंटर की मैपिंग कराने का निर्देश दिया गया है. प्रखंड और पंचायत स्तरीय कार्यालयों को भी इस संबंध में जागरूक किया जाएगा, ताकि एकत्रित ई-कचरे को निर्धारित केंद्रों या अधिकृत रिसाइक्लर्स तक पहुंचाकर उसका उचित निस्तारण कराया जा सके.

अभियान को विद्यालयों तक सीमित नहीं रखा जाएगा. अक्टूबर महीने में आयोजित शिक्षक-अभिभावक बैठकों में भी अभिभावकों को ई-कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूक करने को कहा गया है. जिला प्रशासन के सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अभियान का प्रचार-प्रसार किया जाएगा. विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी तथा ई-कचरा हस्तांतरण की जियो-टैग तस्वीरें ईको क्लब पोर्टल https://ecoclubs.education.gov.in पर अपलोड करनी होंगी. फोटो के साथ प्रतिभागियों की संख्या और कार्यक्रम से संबंधित विवरण दर्ज करने पर भी जोर दिया गया है. गतिविधियों के फोटो, शॉर्ट वीडियो और विद्यार्थियों व शिक्षकों के संदेश सोशल मीडिया पर भी साझा किए जाएंगे.

समग्र शिक्षा की राशि से होगा खर्च

विद्यालय स्तर पर कार्यक्रम के संचालन में होने वाले खर्च की प्रतिपूर्ति समग्र शिक्षा के तहत ईको क्लब, मिशन लाइफ अथवा विद्यालय अनुदान की बजटीय राशि से किए जाने का प्रावधान बताया गया है. इसके लिए ईको क्लब और समग्र अनुदान से संबंधित वर्चुअल आवंटन तथा ड्रॉइंग लिमिट की प्रक्रिया किए जाने की जानकारी भी पत्र में दी गई है.

शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है. अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की भागीदारी से ई-कचरे के सुरक्षित संग्रहण और निस्तारण की आदत विकसित करना तथा विद्यालयों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना है.










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