जल-जंगल-जमीन पर राष्ट्रीय विमर्श में बक्सर के छह शोधार्थियों ने रखे विचार ..

विमर्श का मुख्य विषय ‘जल-जंगल-जमीन और आदिवासी ज्ञान की अवधारणा: भारतीय ज्ञान परंपरा में समावेश और समकालीन प्रासंगिकता’ रहा. इस विषय के माध्यम से आदिवासी समाज की पारंपरिक समझ, प्रकृति के साथ उसके संबंध और मौजूदा दौर में इस ज्ञान की उपयोगिता पर चर्चा की गई.




                           



  • आदिवासी ज्ञान को भारतीय ज्ञान परंपरा में उचित स्थान दिलाने और पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका पर हुई चर्चा
  • प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और पारंपरिक ज्ञान की समकालीन प्रासंगिकता पर शोधपत्र प्रस्तुत किए

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान को भारतीय ज्ञान परंपरा में समुचित स्थान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित राष्ट्रीय विमर्श में बक्सर जिले के छह शोधार्थियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए. कैमूर जिले के भभुआ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल महाविद्यालय और वनवासी सेवा केंद्र, अधौरा के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को आयोजित इस कार्यक्रम में शोधार्थियों ने प्रकृति संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और सतत विकास में आदिवासी ज्ञान की भूमिका को रेखांकित किया.

छह शोधार्थियों ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम में बक्सर जिले से विशाल चौधरी, कुमार निहाल, अमरनाथ वर्मा, अविनाश कुमार वर्मा, राज कुमार गुप्ता और विश्वकर्मा ठाकुर ने भाग लिया. सभी ने निर्धारित विषय के विभिन्न पहलुओं पर अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए और आदिवासी समुदायों के पारंपरिक ज्ञान की उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए.

राष्ट्रीय विमर्श का मुख्य विषय ‘जल-जंगल-जमीन और आदिवासी ज्ञान की अवधारणा: भारतीय ज्ञान परंपरा में समावेश और समकालीन प्रासंगिकता’ रहा. इस विषय के माध्यम से आदिवासी समाज की पारंपरिक समझ, प्रकृति के साथ उसके संबंध और मौजूदा दौर में इस ज्ञान की उपयोगिता पर चर्चा की गई.

पर्यावरण संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान की अहमियत

शोधपत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि आदिवासी समुदायों का पारंपरिक ज्ञान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की अवधारणा को सामने रखते हुए शोधार्थियों ने बताया कि पारंपरिक ज्ञान को समझना और उसे वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप उपयोग में लाना सतत विकास की दिशा में उपयोगी हो सकता है.

कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में आदिवासी समाज के योगदान को समझना, उसके पारंपरिक ज्ञान को अकादमिक विमर्श में उचित स्थान दिलाना और समकालीन सामाजिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता पर विचार करना था.

अकादमिक गतिविधियों में बक्सर की भागीदारी

राष्ट्रीय स्तर के इस विमर्श में जिले के छह शोधार्थियों की सहभागिता से उन्हें अपने शोध और विचारों को साझा करने का अवसर मिला. ऐसे आयोजन शोधार्थियों को नए दृष्टिकोण विकसित करने, विभिन्न विषयों पर अकादमिक संवाद करने और भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों को समझने का मंच प्रदान करते हैं.


















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