एक अज्ञात कॉल के जरिए खुद को नेशनल कंज्यूमर बोर्ड का प्रतिनिधि बताकर रिफंड का झांसा दिया गया. इसी दौरान मोबाइल हैकिंग के माध्यम से उनके एसबीआई खाते से महज तीन मिनट के भीतर चार ट्रांजेक्शन में कुल 3 लाख 96 हजार 500 रुपये निकाल लिए गए.

- बक्सर जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानी, 5% ब्याज और 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का निर्देश
- आयोग बोला- शिकायत के बाद भी लाभार्थी खाता होल्ड नहीं किया गया, आरबीआई के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हुआ
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : साइबर ठगी के एक चर्चित मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बक्सर ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मुख्य शाखा और उसके क्षेत्रीय कार्यालय को बड़ा झटका दिया है. आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए एलआईसी के पूर्व प्रशासनिक अधिकारी एवं चीनी मिल मोहल्ला निवासी दिनेश्वर ओझा को 3 लाख 96 हजार 500 रुपये 5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया है. इसके अलावा मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक क्षति तथा वाद खर्च के लिए 20 हजार रुपये अलग से देने का निर्देश दिया है.
आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह एवं सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने पारित आदेश में कहा कि बैंक शिकायत मिलने के बाद भी लाभार्थी खाते को तत्काल होल्ड कराने और राशि वापस कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई नहीं कर सका. आयोग ने माना कि बैंक ने आरबीआई के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन नहीं किया.
दिनेश्वर ओझा ने आयोग में दायर परिवाद में बताया था कि 19 अगस्त 2021 को उन्हें आरबीआई के लोगो वाले एक अज्ञात कॉल के जरिए खुद को नेशनल कंज्यूमर बोर्ड का प्रतिनिधि बताकर रिफंड का झांसा दिया गया. इसी दौरान मोबाइल हैकिंग के माध्यम से उनके एसबीआई खाते से महज तीन मिनट के भीतर चार ट्रांजेक्शन में कुल 3 लाख 96 हजार 500 रुपये निकाल लिए गए. उनका कहना था कि उन्होंने किसी को ओटीपी, यूजर आईडी या पासवर्ड साझा नहीं किया था.
परिवादी के अनुसार घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने एसबीआई के डिप्टी मैनेजर को सूचना देकर खाते को सुरक्षित करने और लाभार्थी खाते को होल्ड करने का अनुरोध किया था. हालांकि बैंक ने योनो बैंकिंग सेवा तो बंद कर दी, लेकिन लाभार्थी खाते को होल्ड कराने की कार्रवाई समय पर नहीं की.
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बैंक यह साबित नहीं कर सका कि ग्राहक की ही लापरवाही से यह निकासी हुई. साथ ही बैंक ने न तो लाभार्थी खाते पर प्रभावी कार्रवाई की और न ही जांच एजेंसियों को अपेक्षित सहयोग दिया. आयोग ने यह भी माना कि ग्राहक की शिकायत के बावजूद बैंक ने अनधिकृत लेनदेन रोकने के लिए समय पर आवश्यक कदम नहीं उठाए. आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि बैंक ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करने में विफल रहा, जबकि आरबीआई के 6 जुलाई 2017 के दिशा-निर्देशों के अनुसार इसका दायित्व बैंक पर ही था.
आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मुख्य शाखा, बक्सर और मुख्य महाप्रबंधक, पटना को संयुक्त रूप से आदेश दिया है कि वे 60 दिनों के भीतर 3 लाख 96 हजार 500 रुपये 29 जनवरी 2024 से 5 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करें. साथ ही 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और वाद खर्च के रूप में भी भुगतान करें. निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर राशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से वास्तविक भुगतान तक ब्याज देना होगा. वहीं, बैंक के अध्यक्ष और बैंकिंग लोकपाल को आयोग ने इस मामले में दायित्व से मुक्त कर दिया.




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