बिहार सरकार से मांग की कि इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन स्थल का दर्जा देकर इसका संरक्षण और समुचित विकास कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सकें.

- गोंड महासभा ने सरकार से ऐतिहासिक धरोहर के विकास और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील
- गोंड आदिवासी समुदाय की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण की जीवंत विरासत का प्रतीक
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिले के ऐतिहासिक ढकाइच बालेश्वरनाथ मंदिर को राज्य पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग तेज हो गई है. युवा बिहार राज्य गोंड महासभा के प्रदेश अध्यक्ष रामजीत गोंड ने कहा है कि यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि गोंड आदिवासी समुदाय की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, परंपरा और प्रकृति संरक्षण की जीवंत विरासत का प्रतीक है.
उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बिहार सरकार से मांग की कि इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन स्थल का दर्जा देकर इसका संरक्षण और समुचित विकास कराया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रह सकें.
हजार वर्षों से जुड़ी है समाज की आस्था
रामजीत गोंड ने बताया कि ढकाइच बालेश्वरनाथ मंदिर में लगभग एक हजार वर्षों से गोंड आदिवासी समुदाय सामुदायिक बैठक आयोजित करता आ रहा है. यहां समाज के लोग अपने आराध्य देव का स्मरण करते हैं और अपनी प्राचीन परंपराओं, रीति-रिवाजों तथा प्राकृतिक जीवन-दर्शन को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं.
सावन में उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
उन्होंने कहा कि सावन माह के प्रत्येक सोमवार को हजारों की संख्या में गोंड आदिवासी समुदाय के लोग मंदिर पहुंचते हैं. रात्रि में प्राकृतिक शक्तियों का स्मरण करते हुए पूजा-अर्चना की जाती है और पूरी रात पारंपरिक हुड़का नृत्य का आयोजन होता है. वहीं सावन के अंतिम सोमवार को गोंडियन परंपरा के अनुसार वनदेवी एवं बहरवार पूजा का आयोजन किया जाता है.
प्रकृति संरक्षण का दिया जाता है संदेश
गोंड समाज के लोग इस अवसर पर जल, जंगल और जमीन की रक्षा का संकल्प लेते हैं. समाज का मानना है कि प्रकृति का संरक्षण ही उनकी संस्कृति और जीवन का मूल आधार है. पूजा-अर्चना के बाद पूरी रात धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
उपेक्षा पर जताई चिंता
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इतनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत होने के बावजूद अब तक न तो जिला प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस स्थल के संरक्षण एवं विकास के लिए कोई ठोस पहल की है. जबकि सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इसके महत्व को स्पष्ट करती है.
सरकार के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
युवा बिहार राज्य गोंड महासभा ने सरकार से ढकाइच बालेश्वरनाथ मंदिर को राज्य पर्यटन स्थल घोषित करने, मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र का विकास कराने, गोंडवाना भवन का निर्माण कराने, सड़क, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग, विश्राम स्थल, सुरक्षा और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा गोंड आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की मांग की है.
'यह केवल मंदिर नहीं, हमारी पहचान है'
रामजीत गोंड ने कहा कि ढकाइच बालेश्वरनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि गोंड आदिवासी समुदाय की आस्था, पहचान, इतिहास, संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की जीवंत परंपरा का प्रतीक है. उन्होंने बिहार सरकार से आग्रह किया कि इसे पर्यटन स्थल घोषित कर गोंड समाज के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं.




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