घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई के साथ न्याय और कानून के प्रति सकारात्मक माहौल रहा. इसी माहौल में पली-बढ़ी कमलाक्षी ने भी कानून को अपने करियर का हिस्सा बनाया और अब सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर नई पहचान बनाई है.
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| अपने सीनियर एडवोकेट अरुण कुमार सिंह के साथ कमलाक्षी |
- निमेज गांव की बेटी की कामयाबी से परिवार में जश्न, गांव से लेकर पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर
- पिता न्यायिक पदाधिकारी, बेटी ने भी चुना कानून का रास्ता; अब सीबीआई में चयन के बाद भी न्यायिक सेवा का सपना बरकरार
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बेटियों की कामयाबी जब आसमान छूती है तो माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. ब्रह्मपुर प्रखंड के निमेज गांव की कमलाक्षी कुमारी ने सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. उनका चयन सीबीआई अधिकारी के रूप में हुआ है. परिणाम घोषित होते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई और गांव से लेकर पूरे क्षेत्र में कमलाक्षी की सफलता की चर्चा होने लगी.
कमलाक्षी के पिता राम सुजान पांडेय न्यायिक पदाधिकारी हैं और वर्तमान में कटिहार जिले के बारसोई न्यायालय में पदस्थापित हैं. घर में शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई के साथ न्याय और कानून के प्रति सकारात्मक माहौल रहा. इसी माहौल में पली-बढ़ी कमलाक्षी ने भी कानून को अपने करियर का हिस्सा बनाया और अब सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर नई पहचान बनाई है.
सरस्वती शिशु मंदिर से शुरू हुआ सफर, बीएचयू तक पहुंची मेधा
कमलाक्षी ने दसवीं तक की पढ़ाई सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बक्सर से की. इसके बाद महिला महाविद्यालय, भभुआ, कैमूर से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. आगे उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से कानून की शिक्षा हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि न्याय और कानून के क्षेत्र में लगातार बनी रही.
व्यवहार न्यायालय में भी आजमाया कानून का हुनर
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद कमलाक्षी ने बक्सर व्यवहार न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू की. उन्होंने टेबल नंबर 32 पर वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार सिंह के साथ काम किया. अदालत में काम करने के दौरान उन्होंने कानून की बारीकियों को समझने के साथ लोगों को न्याय दिलाने के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाई.
वरिष्ठ अधिवक्ता बोले- मेधावी थीं कमलाक्षी
वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण कुमार सिंह ने कमलाक्षी को मेधावी अधिवक्ता बताते हुए कहा कि वह लोगों को न्याय दिलाने के मामलों में बढ़-चढ़कर भाग लेती थीं. उनकी मेहनत और सीखने की ललक शुरू से ही दिखाई देती थी. अदालत में प्रैक्टिस के दौरान उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी.
न्यायिक सेवा का सपना अभी भी जिंदा
कमलाक्षी का मूल सपना न्यायिक सेवा में जाने का था. हालांकि सिविल सेवा परीक्षा में 11वीं रैंक हासिल करने के बाद उनका चयन सीबीआई अधिकारी के रूप में हो गया है. इसके बावजूद उन्होंने न्यायिक सेवा की तैयारी छोड़ने का फैसला नहीं किया है. सीबीआई में जिम्मेदारी संभालने के साथ वह न्यायिक सेवा की तैयारी भी जारी रखने की इच्छुक हैं.
बेटी की खुशखबरी सुनकर छलका पिता का गर्व
कमलाक्षी की सफलता की खबर सुनाते समय पिता राम सुजान पांडेय की आवाज में खुशी साफ झलकती है. चेहरे पर बेटी की उपलब्धि का गर्व भी दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि कमलाक्षी ने खुद उन्हें अपनी सफलता की खुशखबरी दी. उनके लिए यह पल सिर्फ बेटी के सीबीआई अधिकारी बनने की खुशी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और उम्मीदों से जुड़े एक पिता के सपने के पूरा होने जैसा है.
युवाओं को दिया मेहनत का मंत्र
राम सुजान पांडेय ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, यदि इरादा मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है. कमलाक्षी की सफलता उन युवाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं.
अधिवक्ता संघ ने दी उज्ज्वल भविष्य की शुभकामना
कमलाक्षी की इस उपलब्धि पर अधिवक्ता संघ के सदस्यों और पदाधिकारियों ने खुशी जताई. सभी ने उनकी सफलता को बक्सर के लिए गौरव का विषय बताते हुए सीबीआई अधिकारी के रूप में उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.






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