कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद पर मनन कुमार मिश्र का सात बार निर्विरोध निर्वाचित होना अधिवक्ता समुदाय के लगातार विश्वास को दर्शाता है. लोकतांत्रिक प्रक्रिया से मिले इस विश्वास का सम्मान किया जाना चाहिए.
- आलोचनाओं पर अधिवक्ताओं में नाराजगी, बोले- असहमति हो तो तर्क और तथ्यों के साथ रखें बात
- संस्थागत गरिमा से समझौता नहीं, लोकतांत्रिक परंपराओं और अधिवक्ता समाज की एकता पर दिया जोर
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन सह राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्र को लेकर की जा रही आलोचनाओं और बयानबाजी पर बक्सर के अधिवक्ताओं का गुस्सा सामने आया है. जिला अधिवक्ता संघ के पुस्तकालय भवन में गुरुवार को महासचिव बिंदेश्वरी प्रसाद पांडेय की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें अधिवक्ताओं ने मनन कुमार मिश्र के समर्थन में एकजुटता जताई. बैठक में कहा गया कि व्यक्तिगत स्वार्थ या पूर्वाग्रह से प्रेरित बयान अधिवक्ता समाज की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं.
सात बार निर्विरोध निर्वाचन को बताया विश्वास की मुहर
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पद पर मनन कुमार मिश्र का सात बार निर्विरोध निर्वाचित होना अधिवक्ता समुदाय के लगातार विश्वास को दर्शाता है. लोकतांत्रिक प्रक्रिया से मिले इस विश्वास का सम्मान किया जाना चाहिए. अधिवक्ताओं ने कहा कि विधि का जानकार होने के साथ अधिवक्ता समाज लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का प्रहरी भी है.
व्यक्तिगत आरोप नहीं, तर्क और तथ्य से हो असहमति
अधिवक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति के लिए पूरा स्थान है. किसी के कार्यों पर आपत्ति हो तो तथ्य, तर्क और शालीन संवाद के जरिए अपनी बात रखी जानी चाहिए. व्यक्तिगत आक्षेप और आधारहीन आरोप किसी विधिक संस्था अथवा उसके निर्वाचित नेतृत्व की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का उचित माध्यम नहीं हो सकते.
व्यक्ति नहीं, संस्था की प्रतिष्ठा बचाने पर जोर
बैठक में कहा गया कि अधिवक्ता समाज को क्षणिक विवादों और व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर संस्था और सिद्धांतों के पक्ष में खड़ा होना चाहिए. वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति आते-जाते रहते हैं, लेकिन संस्थाओं की प्रतिष्ठा और लोकतांत्रिक परंपराएं लंबे समय तक समाज का मार्गदर्शन करती हैं.
वैमनस्य नहीं, विधिक तर्क से देंगे जवाब
अधिवक्ताओं ने मनन कुमार मिश्र के प्रति विश्वास जताते हुए कहा कि उनके विरुद्ध होने वाली आलोचनाओं का जवाब वैमनस्य से नहीं, बल्कि विधिक तर्क, लोकतांत्रिक संवाद और गरिमापूर्ण आचरण से दिया जाना चाहिए. बैठक के अंत में संस्थागत गरिमा, लोकतांत्रिक मर्यादा और अधिवक्ता समाज की एकता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.
बैठक में जनार्दन राय, गणपत मंडल, कृपाशंकर राय, राम कृष्णा चौबे, सूबेदार पाण्डेय, रामेश्वर प्रसाद वर्मा, तारकेश्वर मिश्रा, शशिकांत उपाध्याय, श्रीमान नारायण ओझा, शेषनाथ सिंह, राकेश ओझा, उमेश सिंह, विनोद कुमार मिश्रा, दयासागर पाण्डेय, पवन कुमार राय, कर्मवीर भारती, जितेंद्र कुमार कश्यप, ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी, राहुल आनंद, जनार्दन सिंह, केदार प्रसाद, रामाश्रय सिंह, संजय पाण्डेय, अनीश यादव, गुड्डू पाण्डेय, देवानंद सिंह, ब्रजेश त्रिपाठी, राघव कुमार पाण्डेय, रमाकांत तिवारी, सरफराज सैफी, सत्येंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे.
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