कृष्णावती देवी के अनुसार, उनके पति और साथ मौजूद अन्य लोगों ने जब हस्तक्षेप किया तो उनके साथ भी हाथापाई की स्थिति बनी. बाद में वहां लोगों की संख्या बढ़ने पर उन्हें छोड़ दिया गया.
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| प्रेस वार्ता में जानकारी देती महिला नेत्री |
- जातिसूचक शब्दों के प्रयोग का भी लगाया आरोप, एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
- रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के खिलाफ आंदोलन के दौरान 7 अगस्त को कलेक्ट्रेट रोड स्थित सम्राट होटल के पास घटना होने का दावा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर में रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बीच कथित दुर्व्यवहार का मामला न्यायालय पहुंच गया है. पवनी निवासी महिला नेत्री कृष्णावती देवी ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी), बक्सर की अदालत में परिवाद दाखिल कर जीआरपी, आरपीएफ और पुलिस के अधिकारियों समेत 11 से अधिक लोगों पर अभद्र व्यवहार और जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है. परिवाद में 7 अगस्त को कलेक्ट्रेट रोड स्थित सम्राट होटल के पास हुई घटना का उल्लेख किया गया है.
बैठक खत्म होने के बाद रास्ते में रोकने का आरोप
कृष्णावती देवी के अनुसार, रेलवे क्रॉसिंग खोलने की मांग को लेकर आंदोलन से जुड़ी बैठक खत्म होने के बाद वह अन्य लोगों के साथ कलेक्ट्रेट रोड से लौट रही थीं. इसी दौरान सम्राट होटल के पास कथित तौर पर उन्हें रोक लिया गया. महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें ‘नेता बनने’ की बात कहकर अपमानित किया गया और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया.
आरपीएफ सब इंस्पेक्टर पर हाथ पकड़कर खींचने का आरोप
महिला ने अपने बयान में आरोप लगाया कि विष्णु ओझा, आरपीएफ सब इंस्पेक्टर ने उनका हाथ पकड़कर स्टेशन की ओर खींचने का प्रयास किया. उन्होंने शोर मचाकर इसका विरोध किया. कृष्णावती देवी के अनुसार, उनके पति और साथ मौजूद अन्य लोगों ने जब हस्तक्षेप किया तो उनके साथ भी हाथापाई की स्थिति बनी. बाद में वहां लोगों की संख्या बढ़ने पर उन्हें छोड़ दिया गया.
बड़े अधिकारियों समेत सात नामजद
परिवाद में हरिकांत प्रसाद, आरपीएफ दानापुर डिविजनल कमांडेंट, भास्कर रंजन, जीआरपी एएसपी, पटना मुख्यालय और गौरव पांडेय, बक्सर सदर एसडीपीओ के नाम शामिल हैं. इसके अलावा कुंदन कुमार, आरपीएफ पोस्ट इंचार्ज बक्सर, विजेंद्र मुवाल, आरपीएफ सब इंस्पेक्टर, विष्णु ओझा, आरपीएफ सब इंस्पेक्टर और धनंजय सिंह, आरपीएफ सिपाही को भी आरोपी बनाया गया है. परिवाद में 10-15 अज्ञात आरक्षियों का भी उल्लेख किया गया है.
रेलवे क्रॉसिंग बंद होने से शुरू हुआ था आंदोलन
रेलवे ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त होने के बाद रेलवे क्रॉसिंग बंद किए जाने से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ने का दावा किया जा रहा है. इसे लेकर आंदोलनकारियों ने प्रशासन और रेल प्रशासन से कई बार रास्ता खोलने की मांग की. सुनवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए धरना और रेलवे ट्रैक पर बैठकर प्रदर्शन भी किया गया.
प्रदर्शनकारियों पर प्राथमिकी से भी नाराजगी
महिला नेत्री का कहना है कि रास्ता खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर दी गई. उनका आरोप है कि आंदोलनकारियों ने पहले से ही प्रशासन को धरना-प्रदर्शन की सूचना दी थी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे. इसी दौरान महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की शिकायत सामने आई.
एससी-एसटी एक्ट में कार्रवाई की मांग
परिवाद में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ एससी-एसटी अधिनियम की धाराओं का भी उल्लेख किया गया है. महिला ने आरोप लगाया है कि उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया. उन्होंने संबंधित आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
आरोपों के बाबत आरपीएफ इंस्पेक्टर कुंदन कुमार से बात करने पर उन्होंने बताया कि महिला नेत्री द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायालय पर भरोसा है. वहां से निश्चय ही न्यायसंगत फैसला होगा.






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