दाखिल-खारिज के लिए एक लाख रुपये मांगने का आरोप, डीएम से स्वतंत्र जांच की मांग ..

आरोप लगाया है कि उनके दाखिल-खारिज के संबंध में संबंधित आरओ द्वारा एक लाख रुपये की मांग की गई. उनका दावा है कि राशि नहीं देने पर दाखिल-खारिज नहीं होने की बात कही गई. 






                             


बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सिमरी अंचल में दाखिल-खारिज के एक मामले को लेकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं. अरक निवासी रितेश कुमार सिंह ने डीएम को आवेदन देकर आरोप लगाया है कि मौजा कठार की भूमि से संबंधित उनके दाखिल-खारिज वाद को रोक दिया गया और प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए एक लाख रुपये की कथित मांग की गई.

आवेदन में कहा गया है कि 19 अगस्त 2026 को उन्हें सिमरी अंचल कार्यालय बुलाकर मामले को "सेटल" कराने के नाम पर कम राशि देने का कथित दबाव बनाया गया. शिकायत की प्रतिलिपि अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता, सतर्कता विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तथा मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है.

तीन मामलों की तुलना से खुलेगा राज

शिकायतकर्ता के अनुसार, मौजा कठार, खाता संख्या 235, खेसरा संख्या 1547 और रकबा 3.5 डी. की भूमि उन्होंने खरीदी है. इसी भूमि से संबंधित दाखिल-खारिज वाद संख्या 963/26-27 उनके नाम से लंबित है. आरोप है कि संबंधित आरओ द्वारा अपने स्तर से आपत्ति दर्ज कर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया रोक दी गई, लेकिन आपत्ति का आधार और संबंधित अभिलेख स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया.

दूसरे खरीदारों का दाखिल-खारिज पूरा, उनका मामला लंबित

आवेदन में दावा किया गया है कि उसी विक्रेता द्वारा संबंधित भूमि के संबंध में अन्य लोगों के पक्ष में भी बिक्री की गई थी और उनके दाखिल-खारिज की कार्रवाई पूरी कर दी गई. इसमें दाखिल-खारिज वाद संख्या 844/26-27 में क्रेता उर्मिला देवी तथा वाद संख्या 2596/25-26 में क्रेता विजेंदर सिंह का उल्लेख किया गया है. शिकायतकर्ता ने इन तीनों मामलों की पूरी पत्रावलियों, विक्रय विलेख, आपत्तियों, नोटशीट और आदेशों की तुलनात्मक जांच कराने की मांग की है.

एक लाख की कथित मांग से मचा हड़कंप

रितेश कुमार सिंह ने आरोप लगाया है कि उनके दाखिल-खारिज के संबंध में संबंधित आरओ द्वारा एक लाख रुपये की मांग की गई. उनका दावा है कि राशि नहीं देने पर दाखिल-खारिज नहीं होने की बात कही गई. शिकायतकर्ता ने इस कथित मांग को लेकर उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही तो 19 अगस्त को उन्हें अंचल कार्यालय बुलाया गया.

"सेटल" कराने के नाम पर कम रकम देने का आरोप

आवेदन के अनुसार, अंचल कार्यालय में मामले को "सेटल" कराने की बात कहते हुए कथित रूप से कहा गया कि "हम सेटल करवा देते हैं, थोड़ा कम दे देना." शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें यह भी बताया गया कि यदि मामला इस तरीके से नहीं सुलझा तो भूमि सुधार उप समाहर्ता के न्यायालय में वाद दायर करना पड़ेगा और करीब 50 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं.

जमीन पर स्थल निरीक्षण कराने की मांग

शिकायतकर्ता ने जिला स्तर पर स्वतंत्र जांच टीम गठित करने की मांग की है. उनका कहना है कि जांच टीम में सिमरी अंचल में मामले की पूर्व कार्रवाई से जुड़े किसी अधिकारी को शामिल नहीं किया जाए. टीम द्वारा संबंधित भूमि का स्थल निरीक्षण कर वास्तविक दखल-कब्जा, चौहद्दी और सीमांकन का सत्यापन कराने की मांग की गई है.

तीनों दाखिल-खारिज वादों की हो जांच

आवेदन में दाखिल-खारिज वाद संख्या 963/26-27, 844/26-27 और 2596/25-26 की संपूर्ण पत्रावलियों की तुलनात्मक जांच कराने को कहा गया है. इसके अलावा आरओ द्वारा दर्ज की गई आपत्ति की मूल प्रति, नोटशीट, कार्यालयीय टिप्पणियां, आदेश और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की गई है.

सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग

19 अगस्त को अंचल कार्यालय में हुई कथित बातचीत और कार्रवाई की जांच के लिए शिकायतकर्ता ने उस दिन की सीसीटीवी फुटेज, आगंतुक पंजी, कार्यालयीय अभिलेख और अन्य संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की है. साथ ही एक लाख रुपये की कथित मांग, धमकी और "सेटल" कराने के दबाव की स्वतंत्र जांच कराने का अनुरोध किया गया है.

बिना जांच किसी को दोषी ठहराने की बात नहीं

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी पदाधिकारी या कर्मचारी को बिना जांच दोषी ठहराना नहीं है. उनका कहना है कि यदि दाखिल-खारिज में कोई वास्तविक वैधानिक बाधा है तो उसका स्पष्ट लिखित कारण बताते हुए विधि-सम्मत सुनवाई की जाए. वहीं, यदि जांच में धनराशि की मांग या पद के दुरुपयोग के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित पदाधिकारी या कर्मी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए.

राजस्व अधिकारी ने आरोपों को बताया बेबुनियाद

इस मामले में राजस्व अधिकारी ने बताया कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं. आवेदन पर किसी के द्वारा आपत्ति लगाई गई थी. उसकी जांच की जा रही थी, आवेदनकर्ता के द्वारा दुर्व्यवहार किया जाने लगा.













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