यदि विद्यालयों में लॉकर या स्कूल बॉक्स की व्यवस्था लागू होती है, तो छोटे बच्चों के भारी बस्ते का बोझ कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

- 6-7 किलो तक के भारी स्कूल बैग से बच्चों को राहत दिलाने की मांग, शिक्षा विभाग ने आवेदन राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद को भेजा
- विदेशों की तर्ज पर स्कूलों में किताबें रखने की सुविधा देने का प्रस्ताव, अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी निगाहें
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : नौनिहालों के कंधों पर लदे 6-7 किलो तक के भारी स्कूल बैग का बोझ कम करने की दिशा में बिहार शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया शुरू कर दी है. भाजपा क्रीड़ा मंच, बक्सर के जिला अध्यक्ष/संयोजक दुर्गेश उपाध्याय 'विद्रोही' के आग्रह पर प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने उनके आवेदन को अग्रेतर आवश्यक कार्रवाई के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, बिहार को भेजा है. विभाग ने की गई कार्रवाई की सूचना निदेशालय को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है.
6-7 किलो का बैग, छोटे कंधे और बड़ी चिंता
दुर्गेश उपाध्याय 'विद्रोही' ने शिक्षा विभाग को दिए आवेदन में विद्यार्थियों के स्कूली बैग के बढ़ते वजन को गंभीर समस्या बताते हुए बच्चों को अनावश्यक बोझ से राहत देने की मांग की थी. उनका कहना था कि छोटे बच्चों के कोमल कंधों पर रोजाना भारी किताब-कॉपियों का बोझ डालना उनके शारीरिक विकास के लिए चिंता का विषय है.
उन्होंने विद्यालयों में स्टूडेंट लॉकर या स्कूल बॉक्स जैसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है, ताकि रोजाना जरूरत नहीं पड़ने वाली किताबें और शैक्षणिक सामग्री विद्यालय में ही सुरक्षित रखी जा सकें. इससे बच्चों को हर दिन पूरा बस्ता घर से विद्यालय और विद्यालय से घर ले जाने की मजबूरी से राहत मिल सकती है.
शिक्षा विभाग ने दिखाई पहल, अब आगे क्या?
प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की उप निदेशक उर्मिला कुमारी की ओर से 25 अगस्त 2026 को जारी पत्र में दुर्गेश उपाध्याय के आवेदन का उल्लेख करते हुए इसे अग्रेतर आवश्यक कार्रवाई के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, बिहार को भेजा गया है. पत्र में की गई कार्रवाई की सूचना निदेशालय को उपलब्ध कराने को भी कहा गया है.
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद और शिक्षा विभाग इस सुझाव पर क्या ठोस पहल करते हैं. यदि विद्यालयों में लॉकर या स्कूल बॉक्स की व्यवस्था लागू होती है, तो छोटे बच्चों के भारी बस्ते का बोझ कम करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.
दुर्गेश उपाध्याय 'विद्रोही' ने कहा कि बच्चों का स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और उज्ज्वल भविष्य सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने उम्मीद जताई कि शिक्षा विभाग इस पहल को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाएगा.





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