कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उनसे सीआईएस को लगातार अपडेट रखने और न्यायिक अभिलेखों को सुरक्षित रखने की पूरी जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा की जाती है.
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फरवरी से पैसा नहीं मिला तो सफाईकर्मियों ने छोड़ा झाड़ू, नगर पंचायत में हंगामा: इटाढ़ी में 6 महीने से मानदेय अटका; नई एजेंसी की आहट से नौकरी जाने का डर
सफाईकर्मी बोले- घर चलाना मुश्किल, पहले बकाया मानदेय दिलाइए, फिर कराइए काम
अध्यक्ष ने कहा- नगर पंचायत के पास फंड नहीं, इसलिए एजेंसी का भुगतान रुका; ईओ बोले- नई एजेंसी में पुराने कर्मियों को ही मिलेगा काम
बक्सर/इटाढ़ी। शहर की गलियों को साफ रखने वाले सफाईकर्मियों के घरों में ही अब आर्थिक तंगी का कचरा जमा हो गया है। फरवरी से मानदेय नहीं मिलने से परेशान इटाढ़ी नगर पंचायत के सफाईकर्मियों ने शनिवार को काम बंद कर दिया। बड़ी संख्या में कर्मी नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे और हंगामा करते हुए लंबित मानदेय के भुगतान की मांग की। कर्मियों का कहना है कि महीनों तक बिना भुगतान काम करना अब उनके लिए संभव नहीं है। वहीं, सफाई एजेंसी बदले जाने की बात ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।
सुबह से सफाई का काम ठप, कार्यालय में जुटे कर्मी
मानदेय भुगतान नहीं होने से नाराज सफाईकर्मियों ने शनिवार से हड़ताल शुरू कर दी। इसके बाद वे नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे और अपनी समस्या को लेकर विरोध जताया। कर्मियों का कहना था कि फरवरी से उन्हें मानदेय नहीं मिला है। लगातार कई महीने तक पैसा नहीं मिलने के कारण परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है।
कर्मियों का कहना था कि वे नियमित रूप से शहर की सफाई में जुटे हैं, लेकिन जब मेहनत का पैसा ही समय पर नहीं मिलेगा तो उनके सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा होना स्वाभाविक है।
अध्यक्ष बोले- फंड नहीं, इसलिए एजेंसी का भुगतान अटका
हंगामे की सूचना पर नगर पंचायत अध्यक्ष संजय कुमार पाठक मौके पर पहुंचे। उन्होंने सफाईकर्मियों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। समझाने-बुझाने के बाद कर्मी शांत हुए।
अध्यक्ष संजय कुमार पाठक ने कहा कि नगर पंचायत के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण सफाई एजेंसी को भुगतान नहीं किया जा सका है। एजेंसी का भुगतान लंबित होने की वजह से ही सफाईकर्मियों के मानदेय का भुगतान भी अटका हुआ है।
अब एजेंसी बदलने की तैयारी, कर्मियों की बढ़ी धड़कन
इधर, मामला सिर्फ बकाया मानदेय तक सीमित नहीं है। नगर पंचायत में सफाई व्यवस्था के लिए नई एजेंसी लाने की तैयारी भी चल रही है। नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी जय कुमार पांडेय ने बताया कि पुरानी सफाई एजेंसी को हटाकर नई एजेंसी को सफाई का जिम्मा दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पुरानी एजेंसी के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है और यह बिहार सरकार की नई गाइडलाइन के अनुरूप नहीं है। इसी वजह से एजेंसी बदलने की प्रक्रिया की जा रही है।
नौकरी जाएगी या बचेगी? ईओ ने साफ किया- पुराने कर्मियों को ही मिलेगा काम
एजेंसी बदलने की खबर से सफाईकर्मियों के बीच सबसे बड़ा सवाल नौकरी को लेकर खड़ा हो गया है। कर्मियों को डर है कि नई एजेंसी आने के बाद उन्हें काम से हटा दिया जाएगा। हालांकि, कार्यपालक पदाधिकारी जय कुमार पांडेय ने इस आशंका को खारिज किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एजेंसी बदलने का मतलब यह नहीं है कि पुराने सफाईकर्मियों की नौकरी चली जाएगी। नई एजेंसी भी पुराने सफाईकर्मियों को ही काम पर रखेगी।
अब असली सवाल- बकाया मानदेय कब मिलेगा?
हड़ताल के बाद नगर पंचायत प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ सफाई व्यवस्था को सुचारु रखना है तो दूसरी तरफ महीनों से मानदेय का इंतजार कर रहे कर्मियों को भुगतान करना है। सफाईकर्मी फिलहाल आश्वासन के बाद शांत जरूर हुए हैं, लेकिन उनकी नजर अब बकाया मानदेय के भुगतान पर टिकी है। कर्मियों का साफ कहना है कि सिर्फ आश्वासन से घर का चूल्हा नहीं जलता, उन्हें उनकी मेहनत का पैसा चाहिए।
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