वीडियो : सवालों के घेरे में रक्तदान शिविर! बिना डॉक्टर के कैंप और नाले के पास खुले में रक्त संग्रहण से मचा हड़कंप ..

कहना है कि उन्होंने पहले से रक्तदान शिविर के लिए अनुमति का आवेदन दिया था, लेकिन इसके बावजूद सिविल सर्जन द्वारा दरिया शहीद मजार में भी रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति दे दी गई और वहां से गैर प्रशिक्षित लोगों को रक्त संग्रहण के लिए भेजा गया.

रक्त संग्रहण को पहुंचे युवक से सवाल जवाब करते रेडक्रॉस अध्यक्ष 





                             

एक ही जगह दो ब्लड डोनेशन कैंप की अनुमति से बिगड़ी व्यवस्था! प्रियेश ने सिविल सर्जन पर उठाए सवाल

पहले से आवेदन के बावजूद दूसरे शिविर को भी अनुमति देने का आरोप, डॉक्टर के बजाय गैर प्रशिक्षित लोगों को भेजने की बात
20 से 25 रक्तदाता बिना रक्तदान किए लौटे, नाले के पास सड़क किनारे रक्त संग्रहण पर भी उठे गंभीर सवाल

बक्सर. शहर में आयोजित रक्तदान शिविर अब रक्तदान से ज्यादा अपनी अव्यवस्था को लेकर चर्चा में है. किला मैदान की बाउंड्री के पास सड़क किनारे और नाले के समीप लगाए गए इस शिविर में चिकित्सक और पर्याप्त मेडिकल टीम की मौजूदगी नहीं होने का आरोप सामने आया है. मामले को लेकर रक्तदान से जुड़े लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है.

शिविर के आयोजक तथा ब्लड संस्था के संचालक प्रियेश का आरोप है कि एक ही समय में एक ही स्थान पर दो रक्तदान शिविरों को अनुमति दिए जाने के कारण पूरी व्यवस्था बिगड़ गई. उनका कहना है कि उन्होंने पहले से रक्तदान शिविर के लिए अनुमति का आवेदन दिया था, लेकिन इसके बावजूद सिविल सर्जन द्वारा दरिया शहीद मजार में भी रक्तदान शिविर लगाने की अनुमति दे दी गई और वहां से गैर प्रशिक्षित लोगों को रक्त संग्रहण के लिए भेजा गया.

प्रियेश के अनुसार, शिविर में 50 से अधिक रक्तदाताओं के रक्तदान की तैयारी की गई थी. बड़ी संख्या में लोग रक्तदान के लिए पहुंचे भी, लेकिन चिकित्सक और पर्याप्त मेडिकल टीम उपलब्ध नहीं होने के कारण करीब 20 से 25 रक्तदाता बिना रक्तदान किए ही वापस लौट गए. उनका दावा है कि शिविर के दौरान चार-पांच रक्तदाताओं की तबीयत बिगड़ने या बेहोश होने की स्थिति भी बनी, लेकिन मौके पर पर्याप्त प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी.

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि पहले से आवेदन देने वाले शिविर के लिए निर्धारित स्थान और समय पर ही पूरी चिकित्सकीय टीम भेजी जाती तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती. प्रियेश का कहना है कि एक ही समय में एक ही इलाके में अलग-अलग शिविरों को अनुमति देने और चिकित्सा संसाधनों को बांटने के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई.

डॉक्टर की मौजूदगी पर भी सवाल

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता एवं रेडक्रॉस के कार्यकारी सदस्य स्नेहाशीष वर्धन ने शिविर का निरीक्षण कर चिकित्सक की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए. उनके अनुसार, मौके पर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और प्रशिक्षण ले रहे बच्चों के स्तर पर शिविर का समन्वय किया जा रहा था. उन्होंने कहा कि रक्तदान जैसे संवेदनशील कार्य में चिकित्सकीय निगरानी और रक्तदाता की स्वास्थ्य जांच के बिना प्रक्रिया आगे बढ़ाना गंभीर लापरवाही हो सकती है.

रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन सुरेश अग्रवाल ने भी कहा कि डॉक्टर की अनुपस्थिति में रक्तदान शिविर शुरू नहीं किया जाना चाहिए था. उनका कहना था कि यदि चिकित्सक मौजूद नहीं थे तो टेक्नीशियनों को इसकी सूचना सिविल सर्जन को देकर शिविर बंद कर देना चाहिए था.

सड़क किनारे और नाले के पास रक्त संग्रहण पर भी सवाल

शिविर किला मैदान की बाउंड्री के पास सड़क किनारे लगाया गया था, जहां समीप ही नाला भी बहता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि रक्त जैसे संवेदनशील पदार्थ का संग्रहण खुले सड़क किनारे और नाले के पास करना कितना सुरक्षित और उचित है. यदि इस दौरान धूल, गंदगी या किसी अन्य कारण से रक्त की गुणवत्ता प्रभावित होती है अथवा संक्रमण का कोई मामला सामने आता है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?

सिविल सर्जन का पक्ष नहीं हो सका ज्ञात

मामले में सिविल सर्जन डॉ. शिव कुमार प्रसाद चक्रवर्ती का पक्ष जानने का प्रयास किया गया. कार्यालय में मौजूद नहीं होने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. फोन के माध्यम से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन नहीं उठने के कारण उनका पक्ष ज्ञात नहीं हो सका. ऐसे में प्रियेश द्वारा लगाए गए आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी है.

मामले ने रक्तदान शिविरों की अनुमति, चिकित्सकीय निगरानी, रक्त संग्रहण की व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करता है.

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