विभाग की यह पहल चौसा नगर पंचायत की मुख्य पार्षद किरण देवी की ओर से ऐतिहासिक स्थल के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बाद हुई है. जिला प्रशासन से भूमि की जांच कर स्पष्ट मंतव्य के साथ निर्धारित प्रपत्र में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है.

- शेरशाह-हुमायूं युद्धस्थल को पर्यटन केंद्र बनाने की तैयारी तेज, जमीन के मालिकाना हक से लेकर रखरखाव तक मांगी गई जानकारी
- ऐतिहासिक स्थल के सौंदर्यीकरण की कवायद शुरू, तोरण द्वार और निजाम भिस्ती के तैल चित्र की भी है योजना
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : ऐतिहासिक चौसा की रणभूमि को पर्यटन के नक्शे पर नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है. नगर पंचायत चौसा के वार्ड संख्या एक स्थित शेरशाह-हुमायूं युद्धस्थल के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर पर्यटन विभाग ने बक्सर जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. विभाग ने स्थल की जमीन के स्वामित्व, नक्शा, अनापत्ति प्रमाण पत्र और विकास कार्य पूरा होने के बाद रखरखाव की व्यवस्था समेत कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी है.
पर्यटन विभाग के विशेष सचिव उदयन मिश्रा ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है. विभाग की यह पहल चौसा नगर पंचायत की मुख्य पार्षद किरण देवी की ओर से ऐतिहासिक स्थल के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए भेजे गए प्रस्ताव के बाद हुई है. जिला प्रशासन से भूमि की जांच कर स्पष्ट मंतव्य के साथ निर्धारित प्रपत्र में रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है.
इतिहास के पन्नों से पर्यटन के नक्शे तक
चौसा का यह स्थल 26 जून 1539 को हुए प्रसिद्ध चौसा युद्ध की यादों से जुड़ा है. इसी युद्ध में शेरशाह सूरी ने मुगल बादशाह हुमायूं को पराजित किया था. ऐतिहासिक महत्व के बावजूद लंबे समय से स्थल को अपेक्षित पहचान और पर्यटन सुविधाओं का इंतजार है. अब विभागीय पहल से इसके संरक्षण और विकास की उम्मीद बढ़ी है.
तोरण द्वार से तैल चित्र तक की योजना
इससे पहले 8 अप्रैल 2026 को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति की बैठक में भी चौसा के ऐतिहासिक युद्धस्थल के विकास का मुद्दा उठा था. बैठक में स्थल की बेहतर देखरेख, शेरशाह सूरी के नाम पर आकर्षक तोरण द्वार बनाने, निजाम भिस्ती का तैल चित्र लगाने और पूरे परिसर को आकर्षक बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया था.
अब पर्यटन विभाग की रिपोर्ट मांगने की पहल को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. जिला प्रशासन की रिपोर्ट के बाद स्थल के सौंदर्यीकरण, संरक्षण और पर्यटकों के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की आगे की कार्रवाई शुरू हो सकती है. इससे चौसा की ऐतिहासिक रणभूमि को स्थानीय पहचान से आगे पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने का रास्ता खुल सकता है.





.png)










0 Comments