कहा कि मुख्यमंत्री की श्रद्धा, प्रशासनिक गरिमा और आम श्रद्धालुओं की सुविधा—तीनों का सम्मान करने वाली व्यवस्था ही वामन द्वादशी की वास्तविक भावना और पर्व की मर्यादा होगी.
- मुख्यमंत्री के आगमन का स्वागत, लेकिन हजारों श्रद्धालुओं की आस्था पर प्रोटोकॉल भारी न पड़े : राघव पाण्डेय
- बोले- 23 सितंबर के बजाय किसी अन्य दिन करें दर्शन-पूजन, वामन द्वादशी पर श्रद्धालुओं को मिले निर्बाध दर्शन
बक्सर. वामन द्वादशी के दिन भगवान वामन के दर्शन के लिए उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 23 सितंबर को बक्सर आगमन को लेकर आम श्रद्धालुओं की सुविधा का सवाल उठाया गया है. अधिवक्ता सह सामाजिक कार्यकर्ता राघव कुमार पाण्डेय ने मुख्यमंत्री के आगमन और भगवान वामन के प्रति उनकी आस्था का स्वागत करते हुए कहा कि सुरक्षा और प्रोटोकॉल की व्यवस्था के बीच आम श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा नहीं होनी चाहिए.
राघव कुमार पाण्डेय ने कहा कि वामन द्वादशी बक्सर की धार्मिक आस्था, सनातन परंपरा और लोकविश्वास से गहराई से जुड़ा पर्व है. इस दिन दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में माताएं, बहनें, बुजुर्ग और श्रद्धालु उपवास रखकर त्रिमोहानी पहुंचते हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री के आगमन के कारण यदि रास्तों पर रोक, लंबी प्रतीक्षा या दर्शन में व्यवधान की स्थिति बनती है, तो इसका सीधा असर आम श्रद्धालुओं पर पड़ेगा.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा और प्रोटोकॉल जरूरी हैं, लेकिन भगवान वामन के दरबार में आम श्रद्धालु भी उतनी ही आस्था लेकर पहुंचता है. इसलिए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं को न तो अनावश्यक रूप से रोका जाए और न ही दर्शन के लिए लंबा इंतजार करना पड़े.
मुख्यमंत्री किसी और दिन करें दर्शन तो दोनों पक्षों का सम्मान
राघव पाण्डेय ने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 23 सितंबर के बजाय किसी अन्य दिन बक्सर आकर भगवान वामन का दर्शन-पूजन कर सकते हैं. इससे उनकी धार्मिक भावना और बक्सर के प्रति सम्मान भी बना रहेगा तथा वामन द्वादशी के दिन बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के भगवान वामन के दर्शन का अवसर मिल सकेगा.
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम का विरोध नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा और जनआस्था से जुड़ा विषय है. प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को इस पहलू पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, ताकि मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं की सुविधा के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सके.
VIP व्यवस्था से पीछे न छूट जाए श्रद्धालु की आस्था
राघव पाण्डेय ने कहा कि वामन द्वादशी किसी व्यक्ति विशेष का पर्व नहीं, बल्कि बक्सर की सामूहिक जनआस्था और सनातन परंपरा का हिस्सा है. इसलिए व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि दूर-दराज से आने वाला कोई भी श्रद्धालु यह महसूस न करे कि VIP व्यवस्था के कारण उसकी आस्था और भगवान वामन के दर्शन पीछे छूट गए.
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि 23 सितंबर के कार्यक्रम को लेकर जनभावना और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक व्यवस्थाओं पर पुनर्विचार किया जाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की श्रद्धा, प्रशासनिक गरिमा और आम श्रद्धालुओं की सुविधा—तीनों का सम्मान करने वाली व्यवस्था ही वामन द्वादशी की वास्तविक भावना और पर्व की मर्यादा होगी.






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