बक्सर में 'आवास प्लस' की सूची से पात्र गरीबों के नाम गायब, मचा हड़कंप ..

बताया कि प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की सूक्ष्म जांच कराई जाएगी और आवश्यक मार्गदर्शन के लिए वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के बाद पात्र पाए गए किसी भी व्यक्ति को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा.




                           



• मुखिया संघ अध्यक्ष धनंजय मिश्र ने बीडीओ साधु शरण पाण्डेय से की शिकायत, योग्य लाभुकों के नाम पुनः जोड़ने की मांग

• बीडीओ ने दिया जांच का आश्वासन; बोले - उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर की जाएगी आगे की कार्रवाई

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर प्रधानमंत्री आवास योजना की नई प्रतीक्षा सूची सामने आते ही बक्सर के सदर प्रखंड में हड़कंप मच गया है. उमरपुर पंचायत से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 'आवास प्लस 2024' के तहत दर्ज कई गरीब और पात्र लाभार्थियों के नाम सूची से अचानक गायब मिले हैं.

इस गड़बड़ी को लेकर सदर प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष सह उमरपुर पंचायत के मुखिया धनंजय मिश्र उर्फ चुरकी पांडेय ने प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) साधु शरण पाण्डेय से लिखित शिकायत की है. मुखिया ने बीडीओ से आग्रह किया कि संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर छूटे हुए सभी योग्य गरीबों के नाम प्रतीक्षा सूची में वापस लाए जाएं, ताकि कोई भी जरूरतमंद अपने हक के पक्के मकान से वंचित न रह जाए.

मामले की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ साधु शरण पाण्डेय ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है. उन्होंने बताया कि प्राप्त आवेदन के आधार पर मामले की सूक्ष्म जांच कराई जाएगी और आवश्यक मार्गदर्शन के लिए वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के बाद पात्र पाए गए किसी भी व्यक्ति को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा.

क्या है 'आवास प्लस' योजना और क्यों महत्वपूर्ण है यह सूची?

आवास प्लस (Awas Plus) केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के अंतर्गत शुरू किया गया एक डिजिटल सर्वे और ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म है.

  • शुरुआत का कारण: वर्ष 2011 की सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) की सूची में कई पात्र और अत्यंत निर्धन परिवार शामिल होने से छूट गए थे. ऐसे छूटे हुए गरीब परिवारों को चिह्नित करने के लिए सरकार ने 'आवास प्लस' ऐप के जरिए पारदर्शी सर्वे कराया.
  • योजना का मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण इलाकों में बिना घर वाले या कच्चे व टूटे-फूटे मकानों में रह रहे अत्यंत गरीब परिवारों का पहचान-डेटा तैयार कर उन्हें पक्का मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना.
  • मिलने वाली सहायता: इस योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को मैदानी क्षेत्रों में पक्का मकान बनाने के लिए ₹1.20 लाख और पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्रों में ₹1.30 लाख की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में (डीबीटी के माध्यम से) दी जाती है. इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए अतिरिक्त राशि और मनरेगा के तहत मजदूरी का लाभ भी मिलता है.

ऐसे में आवास प्लस की प्रतीक्षा सूची से नाम हटने का सीधा असर सीधे-साधे गरीब परिवारों के अपने पक्के घर के सपने पर पड़ता है, जिसे लेकर बक्सर में जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों अब मुस्तैद दिख रहे हैं.















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