साफ कर दिया है कि यदि सरकार और तेल कंपनियों ने समय रहते उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में देश भर में एलपीजी सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है.
- कमीशन वृद्धि और ई-केवाईसी भुगतान समेत 7 मांगों को लेकर चरणबद्ध प्रदर्शन; 6 अक्टूबर को 'नो मनी-नो इंडेंट', 26 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुंकार के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी!
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : देश के करोड़ों चूल्हों तक रसोई गैस पहुंचाने वाले एलपीजी वितरक अब खुद अपनी अनदेखी से परेशान होकर आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं. बढ़ते खर्च, काम के बोझ और तेल कंपनियों के कथित मनमाने रवैये के खिलाफ वितरकों ने केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आई) के आह्वान पर बक्सर जिला प्रशासन के माध्यम से देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर सात सूत्रीय मांगों के समाधान की गुहार लगाई गई है.
एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार और तेल कंपनियों ने समय रहते उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में देश भर में एलपीजी सप्लाई पूरी तरह ठप हो सकती है.
चरणबद्ध आंदोलन: काली पट्टी से लेकर जंतर-मंतर के घेराव तक का खाका
वितरकों ने अपनी आवाज बुलंद करने के लिए 1 सितंबर से ही चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी है:
- काली पट्टी बांधकर विरोध: आंदोलन के शुरुआती चरण में वितरक अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं और विरोध दर्ज करा रहे हैं.
- 5 अक्टूबर (प्रेस कॉन्फ्रेंस): देश भर के सभी प्रमुख शहरों में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर जनता और सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखी जाएंगी.
- 6 अक्टूबर ('नो मनी-नो इंडेंट' अभियान): इस दिन वितरक तेल कंपनियों के खातों में पैसा जमा नहीं करेंगे और न ही सिलेंडर का कोई इंडेंट (ऑर्डर) लेंगे.
- 26 अक्टूबर (जंतर-मंतर पर महाजुटान): देश भर के एलपीजी वितरक नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर जुटेंगे और विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे.
- अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद भी यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो एसोसिएशन ने देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अंतिम फैसला लिया है.
₹75 कमीशन वृद्धि और ई-केवाईसी शुल्क समेत ये हैं 7 प्रमुख मांगें
- कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी: होम डिलीवरी प्रभार और प्रशासनिक शुल्क में तत्काल प्रभाव से ₹75 प्रति सिलेंडर की अंतरिम वृद्धि की जाए.
- ई-केवाईसी का पारिश्रमिक: ई-केवाईसी प्रक्रिया में लगने वाले अतिरिक्त श्रम और संसाधनों के एवज में सार्वजनिक तेल कंपनियां वितरकों को ₹236 प्रति मामला भुगतान करें.
- अनुचित बिक्री दबाव पर रोक: एनएफआर (NFR) और एआरबी (ARB) जैसे गैर-ईंधन उत्पादों की जबरन बिक्री के लिए वितरकों पर दबाव बनाना बंद किया जाए.
- टारगेट और इंडेंट में मनमानी बंद हो: नॉन-डोमेस्टिक सिलेंडर की बिक्री का टारगेट देने और वितरकों के इंडेंट में जबरन बदलाव करने की व्यवस्था समाप्त हो.
- पीएनजी की अनिवार्यता खत्म हो: घरेलू ग्राहकों पर पीएनजी की अनिवार्यता समाप्त की जाए तथा नए घरेलू एलपीजी कनेक्शन देने की प्रक्रिया फिर से सुचारू की जाए.
- एमडीजी (MDG) के डर से मुक्ति: बिक्री अधिकारियों द्वारा मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस के नाम पर वितरकों पर बनाए जाने वाले अनैतिक दबाव को तत्काल समाप्त किया जाए.
- एफटीएल नियमों का कड़ाई से पालन: फ्री ट्रेड एलपीजी (FTL) की बिक्री में नियमों के तहत ही पारदर्शी कार्रवाई की जाए.
बक्सर में एकजुट दिखे वितरक
जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपते वक्त स्थानीय वितरकों का भारी हुजूम देखने को मिला. वितरकों का कहना है कि महंगे परिचालन खर्च और कंपनियों के कड़े रुख के कारण अब डिस्ट्रीब्यूटरशिप चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो रहा है.
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मृत्युंजय तिवारी, सत्येंद्र उपाध्याय, संजय कुमार सिंह, ब्रजेश कुमार पाठक, योगेंद्र नाथ, कनक सिंह, कमलाकर ओझा, कुमार रूपेश, ब्रजेश कुमार तिवारी, प्रेम सागर कुंवर, छट्ठू लाल रजक, अजीत कुमार और आनंद कुमार राव समेत जिले के कई प्रमुख एलपीजी वितरक शामिल रहे.





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