अब कक्षा नहीं, बच्चे की समझ के हिसाब से होगी पढ़ाई, शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरु ..

बच्चों को केवल उनकी कक्षा के हिसाब से पढ़ाने के बजाय पहले यह देखा जाएगा कि वे वास्तव में कितना पढ़, लिख और गणित समझ सकते हैं. इसके बाद बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार अलग-अलग समूहों में बांटकर पढ़ाया जाएगा.





                             


  • डुमरांव डायट में चार दिवसीय TaRL प्रशिक्षण शुरू, दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
  • बक्सर के सभी प्रखंडों से पहुंचे चार-चार शिक्षक, पढ़ने-लिखने और गणित में कमजोर बच्चों पर रहेगा फोकस

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : कक्षा 4 से 8 तक के बच्चों को उनकी वास्तविक समझ के हिसाब से पढ़ाने के लिए Teaching at the Right Level (TaRL) आधारित चार दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ डुमरांव स्थित डायट में हुआ. इसमें बक्सर जिले के सभी प्रखंडों से चार-चार शिक्षकों ने भाग लिया. प्रशिक्षण 9 से 12 सितंबर तक सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा. इसका उद्देश्य बच्चों की पढ़ने-लिखने और गणित की बुनियादी क्षमता को मजबूत करना है.

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ डायट प्राचार्य मनोज कुमार पाण्डेय, संभाग प्रभारी सुरेंद्र सिंह, बिहार शिक्षा परियोजना बक्सर के अजय कुमार, प्रथम संस्था के प्रतिनिधि शिवाकांत पाण्डेय तथा प्रशिक्षक दुर्ग मांगे, संदीप आर्या, कंचन कुमारी और रागिनी कुमारी ने संयुक्त रूप से किया.

पहले पता चलेगा बच्चा कितना जानता है

TaRL पद्धति में बच्चों को केवल उनकी कक्षा के हिसाब से पढ़ाने के बजाय पहले यह देखा जाएगा कि वे वास्तव में कितना पढ़, लिख और गणित समझ सकते हैं. इसके बाद बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार अलग-अलग समूहों में बांटकर पढ़ाया जाएगा.

प्रशिक्षण में शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई का स्तर जांचने, उनके अनुसार समूह बनाने और अलग-अलग गतिविधियों के जरिए पढ़ाने के तरीके बताए जा रहे हैं. इससे कक्षा में पीछे रह जाने वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देने में मदद मिलेगी.

हर प्रखंड से चार शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण

प्रत्येक प्रखंड से चार शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए चुना गया है. इनमें कक्षा 4-5 के लिए दो और कक्षा 6-8 के लिए दो शिक्षक शामिल हैं. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ये शिक्षक अपने-अपने प्रखंड में TaRL पद्धति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

शिक्षकों को यह भी बताया जा रहा है कि बच्चों को उनकी मौजूदा समझ के स्तर से कैसे आगे बढ़ाया जाए और पढ़ाई को ज्यादा आसान और प्रभावी कैसे बनाया जाए. शिक्षा विभाग की इस पहल का लक्ष्य सरकारी स्कूलों में बच्चों की बुनियादी पढ़ाई को मजबूत करना है.













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