एजेंसी को संबंधित राशि 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 प्रतिशत दंड के साथ वापस करने का आदेश दिए जाने तथा एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है.
- अपर मुख्य सचिव को शिकायत के बाद शिक्षा विभाग की जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही, उपस्थिति विवरण के बिना भुगतान का मामला
- DM की कमेटी भी जांच में जुटी, तीसरी बैठक में रिकॉर्ड तलब; 16 सितंबर को अंतिम बैठक में तय होगी जिम्मेदारी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : हाउसकीपिंग एजेंसी को सफाई कार्य और सफाई कर्मियों की उपस्थिति के रिकॉर्ड के बिना भुगतान किए जाने के मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन और तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना विष्णुकांत राय पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है. अपर मुख्य सचिव को की गई शिकायत के बाद शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सम्पुष्ट होते प्रतीत होने की बात कही गई है. इधर, दिशा की बैठक में मामला उठने के बाद डीएम की ओर से गठित पांच सदस्यीय कमेटी भी जांच कर रही है. बुधवार को कमेटी की तीसरी बैठक हुई, जिसमें वर्तमान DEO इंद्र कुमार कर्ण को संबंधित अभिलेखों के साथ बुलाया गया. परिवादी अरविंद सिंह ने भी कमेटी अध्यक्ष को लिखित रिपोर्ट देकर अपना पक्ष रखा.
मामला M/S R.S. Enterprises को हाउसकीपिंग के नाम पर किए गए भुगतान से जुड़ा है. दिशा की बैठक में प्रस्तुत कार्रवाई प्रतिवेदन में कहा गया था कि एजेंसी को सफाई कर्मियों की उपस्थिति विवरणी के बिना भुगतान किया गया. इसके बाद डीएम ने मामले की जांच के लिए एडीएम पीजीआरओ शशिकांत पासवान की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी.
स्कूलों की उपस्थिति विवरणी से तय होगी जिम्मेदारी
बुधवार को शाम करीब पांच बजे शुरू हुई कमेटी की बैठक करीब साढ़े सात बजे तक चली. बैठक में यह तय किया गया कि जिन स्कूलों में हाउसकीपिंग के सफाई कर्मियों की उपस्थिति विवरणी उपलब्ध है, उसे जांच के लिए प्रस्तुत कराया जाएगा. कमेटी यह पता लगाने में जुटी है कि सफाई कर्मियों की उपस्थिति और सफाई कार्य का सत्यापन किस स्तर पर हुआ तथा भुगतान की प्रक्रिया में किस अधिकारी की क्या भूमिका रही.
वर्तमान DEO इंद्र कुमार कर्ण को भी संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के लिए बुलाया गया. परिवादी अरविंद सिंह ने कमेटी अध्यक्ष को लिखित रिपोर्ट सौंपकर मामले में अपने आरोप और दस्तावेज प्रस्तुत किए. अब 16 सितंबर को कमेटी की अंतिम बैठक प्रस्तावित है. इसमें उपलब्ध अभिलेखों और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर जिम्मेदारी तय करने तथा आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है.
पांच अधिकारी कर रहे मामले की जांच
डीएम की ओर से गठित कमेटी में एडीएम पीजीआरओ शशिकांत पासवान अध्यक्ष हैं. उनके अलावा नजारत के वरीय उप समाहर्ता, विकास शाखा के वरीय उप समाहर्ता, कोषागार पदाधिकारी सुप्रकाश पासवान और सेल्स टैक्स के संयुक्त आयुक्त तेजकांत झा को सदस्य बनाया गया है.
दिशा की बैठक में मामला उठने के दौरान कमेटी अध्यक्ष शशिकांत पासवान ने भी सांसद को भरोसा दिलाया था कि वह कमेटी के अध्यक्ष हैं और मामले की जांच कर नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद से कमेटी की बैठकें कर संबंधित अभिलेखों और पक्षों की जानकारी जुटाई जा रही है.
शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में 1.75 लाख के भुगतान का उल्लेख
इस मामले में शिक्षा विभाग की ओर से हुई जांच में भी महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई है. क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक, पटना प्रमंडल की जांच रिपोर्ट में जनवरी 2025 से सितंबर 2025 के बीच M/S R.S. Enterprises को 1 लाख 75 हजार 750 रुपये के भुगतान का उल्लेख है. रिपोर्ट के अनुसार, यह भुगतान सफाई कार्य और सफाई कर्मियों की उपस्थिति विवरण के अभाव में किया गया था.
जांच के बाद एजेंसी को संबंधित राशि 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और 15 प्रतिशत दंड के साथ वापस करने का आदेश दिए जाने तथा एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किए जाने का भी रिपोर्ट में उल्लेख है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भुगतान से पहले आवश्यक सत्यापन नहीं किया जाना प्रक्रियात्मक अनियमितता की ओर संकेत करता है.
जांच रिपोर्ट में तत्कालीन DEO संदीप रंजन और तत्कालीन DPO स्थापना विष्णुकांत राय के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को “प्रथम दृष्टया सम्पुष्ट होते प्रतीत” बताया गया है. हालांकि, यह अंतिम रूप से दोष सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं है. अब डीएम की कमेटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भुगतान की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.
70 लाख के आरोप, रिपोर्ट में 1.75 लाख का विशिष्ट भुगतान
शिकायत में हाउसकीपिंग एजेंसी को करीब 70 लाख रुपये के सरकारी भुगतान में अनियमितता का आरोप लगाया गया था. वहीं, शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में जिस भुगतान की विशिष्ट राशि का उल्लेख किया गया है, वह 1.75 लाख रुपये है. ऐसे में दोनों आंकड़ों को अलग-अलग संदर्भ में देखा जा रहा है. अब कमेटी की जांच में भुगतान से जुड़े सभी अभिलेख सामने आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है.






.png)










0 Comments