महिला के महज एक लिखित आवेदन पर टीम सक्रिय होकर उसकी समस्या को समझती है और जरूरत के अनुसार काउंसलिंग, पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा तथा कानूनी मदद से जोड़ने की प्रक्रिया शुरु करती है.

- घरेलू प्रताड़ना से लेकर पारिवारिक विवाद तक काउंसलिंग से समाधान की कोशिश, बिछड़ों को मिलाने में भी निभा रहा अहम भूमिका
- पुलिस, चिकित्सा, कानूनी सहायता और अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : हिंसा, घरेलू प्रताड़ना, पारिवारिक विवाद या किसी संकट में फंसी महिलाओं के लिए बक्सर का सखी वन स्टॉप सेंटर मदद और सुरक्षा का भरोसेमंद माध्यम बनकर सामने आया है. यहां महिला के महज एक लिखित आवेदन पर टीम सक्रिय होकर उसकी समस्या को समझती है और जरूरत के अनुसार काउंसलिंग, पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा तथा कानूनी मदद से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करती है. हाल के मामलों में सेंटर की पहल से महिलाओं को प्रताड़ना से राहत दिलाने के साथ उनके पारिवारिक जीवन को फिर से संभालने की कोशिश भी की गई है.
एक आवेदन पर सक्रिय होती है पूरी टीम
सखी वन स्टॉप सेंटर की खासियत इसकी त्वरित कार्यप्रणाली है. किसी महिला के संकट में होने पर उसे अलग-अलग विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. सेंटर में आवेदन मिलने के बाद संबंधित महिला की केस हिस्ट्री समझी जाती है और उसकी स्थिति के अनुसार काउंसलिंग तथा आवश्यक सहायता की प्रक्रिया शुरू की जाती है.
जरूरत पड़ने पर पुलिस और अन्य संबंधित विभागों से समन्वय किया जाता है. गंभीर परिस्थितियों में महिला को सुरक्षा और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाती है.
काउंसलिंग से रिश्तों को संभालने की कोशिश
26 सितंबर को जिला प्रशासन की ओर से जारी सफलता की कहानी में शिवपुर गांव की सुनीता कुमारी का मामला सामने आया. वर्ष 2018 में विवाह के बाद पति-पत्नी के बीच धीरे-धीरे विवाद बढ़ने लगा था. पति की उपेक्षा और कम होते संवाद से परेशान सुनीता ने सहायता के लिए सखी वन स्टॉप सेंटर से संपर्क किया.
सेंटर की टीम ने उसकी केस हिस्ट्री लेकर काउंसलिंग की. इसके बाद पति से संपर्क कर उन्हें सेंटर बुलाया गया. दोनों पक्षों की संयुक्त काउंसलिंग में एक-दूसरे की बात सुनने, सम्मानजनक व्यवहार और वैवाहिक जिम्मेदारियों को लेकर समझ बनाने की कोशिश की गई. परामर्श के बाद दोनों के बीच फिर से संवाद स्थापित हुआ और वैवाहिक संबंध को बेहतर बनाने पर सहमति बनी.
छह दिन की पहल में महिला फिर परिवार के साथ
21 सितंबर को जिला जन संपर्क कार्यालय की ओर से जारी एक अन्य सफलता की कहानी में घरेलू हिंसा से परेशान महिला का मामला सामने आया. महिला ने बताया था कि उसका पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता था और उसे काम करने से भी रोकता था. विवाद के बाद पति बच्चों को लेकर अलग रहने लगा था, जबकि महिला मायके में रह रही थी.
12 सितंबर को सेंटर में आवेदन मिलने के बाद टीम ने पति से लगातार संपर्क किया और उसे समझाकर कार्यालय बुलाया. 18 सितंबर को दोनों पक्षों की संयुक्त काउंसलिंग हुई. बातचीत के बाद दोनों में समझौता हुआ और समझौता पत्र तैयार किया गया. सेंटर की छह दिन की पहल के बाद महिला अपने पति और बच्चों के साथ वापस चली गई.
महिला ने सेंटर की टीम के प्रति आभार जताते हुए कहा कि काउंसलिंग के बाद उसके पति ने उसे सम्मान के साथ रखने और मारपीट नहीं करने का भरोसा दिया.
एक छत के नीचे कई तरह की मदद
सखी वन स्टॉप सेंटर का उद्देश्य संकटग्रस्त महिलाओं को एकीकृत सहायता उपलब्ध कराना है. यहां जरूरत के अनुसार पुलिस सहायता, निःशुल्क विधिक सहायता, काउंसलिंग, चिकित्सा सुविधा और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाओं से महिलाओं को जोड़ा जाता है.
सेंटर की भूमिका केवल शिकायत दर्ज कराने तक सीमित नहीं है. पारिवारिक विवादों में काउंसलिंग के जरिए समाधान की कोशिश, महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देना और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित सरकारी तंत्र से समन्वय करना भी इसकी कार्यप्रणाली का हिस्सा है.
सखी वन स्टॉप सेंटर की ये पहलें बताती हैं कि संकट की स्थिति में महिलाओं को अकेले संघर्ष करने के बजाय उपलब्ध सहायता व्यवस्था तक पहुंचना महत्वपूर्ण है. सुरक्षा, परामर्श और आवश्यक सेवाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने वाली यह व्यवस्था महिलाओं के लिए मदद का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है.




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