जीवित्पुत्रिका व्रत पर 3 या 4 अक्टूबर का भ्रम, आचार्य ने बताया फैसला करने का आसान तरीका ..

कहा कि जीवित्पुत्रिका व्रत कथा की छोटी पुस्तक बाजार में आसानी से उपलब्ध है और इसकी कीमत भी करीब 10 रुपये बताई गई है. उन्होंने लोगों से अपील की कि तारीख को लेकर भ्रम दूर करने के लिए कथा में दिए गए विधान को पढ़ें और उसके आधार पर स्वयं निर्णय लें.




                           


  • जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख को लेकर असमंजस, कथा के श्लोक 30 से 36 पढ़कर खुद निर्णय लेने की अपील
  • सप्तमी में सूर्योदय पर व्रत न करने और अष्टमी में सूर्योदय होने पर व्रत करने का उल्लेख होने का दावा

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : वर्ष 2026 में जीवित्पुत्रिका व्रत की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है. कहीं 3 अक्टूबर शनिवार को व्रत की बात कही जा रही है, तो कहीं 4 अक्टूबर रविवार को जीवित्पुत्रिका व्रत मनाने की जानकारी दी जा रही है. इसी भ्रम को लेकर पौराणिक सिद्धाश्रम धाम बक्सर के आचार्य पंडित कृष्णानंद शास्त्री ने लोगों से अलग-अलग मतों के बजाय जीवित्पुत्रिका व्रत कथा के आधार पर स्वयं निर्णय लेने की अपील की है.

आचार्य कृष्णानंद शास्त्री के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत कथा में कुल 64 श्लोक हैं और इसके 30वें से 36वें श्लोक तक व्रत के संबंध में महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट रूप से बताई गई हैं. उनका कहना है कि इन श्लोकों के हिन्दी अर्थ को पढ़ने से यह समझा जा सकता है कि व्रत किस तिथि में करना चाहिए और किस तिथि में नहीं करना चाहिए.

सप्तमी और अष्टमी के सूर्योदय को बताया महत्वपूर्ण

आचार्य के मुताबिक, व्रत कथा में सप्तमी तिथि में सूर्योदय होने पर व्रत नहीं करने तथा अष्टमी तिथि में सूर्योदय होने पर व्रत करने का उल्लेख है. साथ ही, कथा में दोनों परिस्थितियों में व्रत करने के परिणाम का भी वर्णन होने की बात कही गई है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस विषय में अलग-अलग मत सुनकर भ्रमित होने के बजाय संबंधित श्लोकों को स्वयं पढ़ें.

पुरोहित से सिर्फ सूर्योदय की तिथि पूछने की सलाह

उन्होंने कहा कि लोग अपने पुरोहित से केवल इतना पूछें कि 3 अक्टूबर को सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि है और 4 अक्टूबर को सूर्योदय के समय कौन-सी तिथि रहेगी. इसके बाद जीवित्पुत्रिका व्रत कथा में दिए गए विधान को पढ़कर लोग स्वयं तय कर सकते हैं कि व्रत किस दिन किया जाना चाहिए.

आचार्य ने कहा कि जीवित्पुत्रिका व्रत कथा की छोटी पुस्तक बाजार में आसानी से उपलब्ध है और इसकी कीमत भी करीब 10 रुपये बताई गई है. उन्होंने लोगों से अपील की कि तारीख को लेकर भ्रम दूर करने के लिए कथा में दिए गए विधान को पढ़ें और उसके आधार पर स्वयं निर्णय लें.


















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