चौसा श्मशान घाट के विकास का रास्ता साफ, भूमि का पेंच सुलझा ..

बताया गया कि श्मशान घाट से संबंधित भूमि में जिला परिषद की जमीन के साथ गंग बरार की भूमि भी शामिल है. जमीन की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब विकास कार्य में आ रही सबसे बड़ी अड़चन दूर होती दिखाई दे रही है.

निरीक्षण करते डॉ मनोज यादव व अन्य 





                           



अधिकारियों ने किया स्थल निरीक्षण, अब मापी की तैयारी

कैमूर-रोहतास समेत सैकड़ों गांवों के लोगों को मिलेगा फायदा, छह शवदाह शेड समेत कई सुविधाएं होंगी विकसित

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : वर्षों से भूमि संबंधी पेंच में अटका चौसा श्मशान घाट अब विकास की राह पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है. जिला पदाधिकारी साहिला और उप विकास आयुक्त निहारिका छवि।के निर्देश के बाद सोमवार को अधिकारियों की टीम ने श्मशान घाट स्थल का निरीक्षण किया. चौसा बीडीओ मनोज पासवान, अंचल पदाधिकारी विजय प्रकाश और पूर्व जिला परिषद सदस्य डॉ. मनोज कुमार यादव समेत अन्य अधिकारियों ने मौके पर भूमि की स्थिति की जांच की. निरीक्षण के बाद श्मशान घाट की जमीन को लेकर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई. अब इसकी रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को भेजी जाएगी.

जमीन के पेंच में अटका था विकास

चौसा श्मशान घाट के विकास की योजना तैयार होने के बावजूद जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था. श्मशान घाट की भूमि की मापी और स्वामित्व से जुड़े सवालों के कारण विकास कार्य की प्रक्रिया अटकी हुई थी. हाल में हुई दिशा की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था. पूर्व जिला परिषद सदस्य डॉ. मनोज यादव और चेयरमैन किरण देवी ने बैठक में अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया था.

उन्होंने बताया था कि चौसा का श्मशान घाट केवल स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि कैमूर, रोहतास समेत आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है. बड़ी संख्या में लोग यहां अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में श्मशान घाट पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनता है.

निरीक्षण में सामने आई जमीन की स्थिति

सोमवार को स्थल निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जमीन से संबंधित स्थिति की जांच की. बताया गया कि श्मशान घाट से संबंधित भूमि में जिला परिषद की जमीन के साथ गंग बरार की भूमि भी शामिल है. जमीन की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब विकास कार्य में आ रही सबसे बड़ी अड़चन दूर होती दिखाई दे रही है.

अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही भूमि की मापी कराई जाएगी. इसके बाद निरीक्षण और मापी से संबंधित रिपोर्ट जिला पदाधिकारी को भेजी जाएगी. रिपोर्ट के बाद विकास योजना को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है.

छह शवदाह शेड से सामुदायिक भवन तक की योजना

चौसा श्मशान घाट का विकास आरएंडआर यानी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन योजना के माध्यम से कराया जाना है. प्रस्तावित योजना के तहत यहां एक साथ छह शवों के अंतिम संस्कार के लिए शेड बनाए जाने हैं. इसके अलावा दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों की सुविधा के लिए सामुदायिक भवन, हैंडपंप, प्याऊ और प्रकाश की व्यवस्था भी की जानी है.

भूमि का पेंच सुलझने के बाद अब इन योजनाओं को जमीन पर उतारने की उम्मीद बढ़ गई है. यदि प्रक्रिया निर्धारित गति से आगे बढ़ती है तो लंबे समय से उपेक्षित चौसा श्मशान घाट को न सिर्फ बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज से आने वाले लोगों को भी काफी राहत मिलेगी.
















Post a Comment

0 Comments