एक दर्जन छात्राओं के कथित यौन शोषण से सुर्खियों में आया स्कूल, अब सामने आया चौंकाने वाला ट्विस्ट; प्रधानाध्यापक राजकीय पुरस्कार के लिए नामित ..

दो शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगने और शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने के बीच इसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी का नाम राजकीय पुरस्कार के लिए भेजी गई सूची में शामिल है.


 





                             


  • डीईओ इंद्र कुमार कर्ण बोले- घटना सामने आने से पहले ही किया जा चुका था नॉमिनेशन
  • शिक्षकों के व्यक्तिगत आचरण से प्रधानाध्यापक को जोड़ना उचित नहीं, लेकिन विद्यालय की जवाबदेही पर उठे सवाल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : एक दर्जन नाबालिग छात्राओं के कथित यौन शोषण के आरोपों से सुर्खियों में आए नथुनी अहीर का डेरा मध्य विद्यालय से अब एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. विद्यालय के दो शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगने और शिक्षा विभाग द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने के बीच इसी विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी का नाम राजकीय पुरस्कार के लिए भेजी गई सूची में शामिल है. इस जानकारी के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं कि गंभीर आरोपों से घिरे विद्यालय के प्रधानाध्यापक के नामांकन का अब क्या होगा.

घटना से पहले हो चुका था नॉमिनेशन

बक्सर के नए जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण ने मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रधानाध्यापक का नॉमिनेशन इस घटना के सामने आने से पूर्व ही किया जा चुका था. उन्होंने यह भी कहा कि जिन शिक्षकों पर आरोप लगे हैं, उनका मामला उनके व्यक्तिगत आचरण से जुड़ा है. ऐसे में शिक्षकों के कथित व्यक्तिगत कृत्य के लिए प्रधानाध्यापक को सीधे जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा.

प्रधानाध्यापक पर आरोप नहीं, फिर भी जिम्मेदारी का सवाल

हालांकि, इस पूरे मामले ने विद्यालय की प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है. प्रधानाध्यापक विद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक संचालन के प्रमुख होते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि राजकीय पुरस्कार के लिए किसी शिक्षक या प्रधानाध्यापक के चयन में केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों को देखा जाता है या विद्यालय के अनुशासन, शिक्षकों की कार्यप्रणाली और विद्यार्थियों की सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी कसौटी बनाया जाता है.

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी पर इस प्रकरण में किसी तरह का आरोप सामने नहीं आया है. शिक्षा विभाग की ओर से जिन दो शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें प्रधानाध्यापक का नाम शामिल नहीं है.

अब पुरस्कार पर क्या होगा फैसला?

एक तरफ विभाग का कहना है कि नामांकन घटना सामने आने से पहले किया गया था, वहीं दूसरी तरफ अब विद्यालय के दो शिक्षकों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो चुकी है. ऐसे में निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नामांकन प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा होगी या प्रधानाध्यापक का नाम पूर्व प्रक्रिया के आधार पर राजकीय पुरस्कार के लिए आगे बढ़ेगा.

फिलहाल यह मामला एक दिलचस्प मोड़ पर है. प्रधानाध्यापक पर कोई आरोप नहीं, लेकिन उनके विद्यालय के दो शिक्षक गंभीर आरोपों में निलंबित. ऐसे में राजकीय पुरस्कार के लिए विद्यालय की व्यवस्था और प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी को किस नजरिए से देखा जाएगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है.













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