सबसे खास बात यहां का पंडाल निर्माण है. इसके लिए बाहर से कारीगर बुलाने के बजाय गांव के युवा ही पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं. इस वर्ष भी युवाओं की टोली दिन-रात मेहनत कर भव्य पंडाल तैयार करने में जुटी है.
- पंचमुखी चौक पर 40 फीट लंबे पंडाल में विराजेंगी 12 फीट ऊंची मां दुर्गा, 3 से 4 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान
- बाहर से कारीगर नहीं, गांव के युवा संभाल रहे जिम्मा; महिला-पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश द्वार और सुरक्षा की भी तैयारी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शारदीय नवरात्र को लेकर चौगाई प्रखंड के मुरार गांव स्थित पंचमुखी चौक पर मां दुर्गा के भव्य दरबार की तैयारी जोर पकड़ चुकी है. श्री श्री दुर्गा पूजा समिति, पंचमुखी चौक मुरार की ओर से आयोजित पूजा समारोह के लिए पंडाल निर्माण सहित अन्य तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं. करीब 66 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को इस बार भी गांव के युवा अपने श्रम और हुनर से आगे बढ़ा रहे हैं.
युवाओं के हाथों आकार ले रहा आकर्षक पंडाल
मुरार गांव की दुर्गा पूजा की सबसे खास बात यहां का पंडाल निर्माण है. इसके लिए बाहर से कारीगर बुलाने के बजाय गांव के युवा ही पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं. इस वर्ष भी युवाओं की टोली दिन-रात मेहनत कर भव्य पंडाल तैयार करने में जुटी है.
पंडाल की लंबाई करीब 40 फीट होगी. इसके निर्माण में लगभग 180 बांस, 50 किलो कपड़े की रस्सी, 25 मन बीट, 15 किलो कांटी और प्लाई का इस्तेमाल किया जा रहा है. पंडाल के भीतर मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएं भी स्थापित की जाएंगी. पूजा परिसर और आसपास के इलाके को रंग-बिरंगी आधुनिक लाइटों से सजाने की तैयारी है.
12 फीट ऊंची प्रतिमा बनेगी आकर्षण का केंद्र
इस वर्ष मां दुर्गा की करीब 12 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी. प्रतिमा का निर्माण नोखा, रोहतास से आए मूर्तिकार मनोज कुमार द्वारा किया जा रहा है. पूजा समिति के अनुसार आयोजन पर करीब 3 से 4 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है.
छह दशक से कायम है मां की आराधना
समिति के सदस्यों के अनुसार मुरार गांव में वर्ष 1960 से लगातार मां जगदंबा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही है. छह दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा अब गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है. हर वर्ष नवरात्र और दुर्गापूजा के दौरान आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा पर जोर
पूजा के दौरान भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी समिति की ओर से तैयारी की जा रही है. असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए वॉलिंटियर तैनात किए जाएंगे. समिति सदस्यों के साथ ग्रामीण भी व्यवस्था संभालने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे.
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, ताकि भीड़ को व्यवस्थित रखा जा सके और दर्शन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो.
समिति पदाधिकारियों ने कहा, परंपरा को आगे बढ़ाना हमारा संकल्प
पूजा समिति के अध्यक्ष कमलेश पाण्डेय ने कहा कि मुरार गांव में वर्ष 1960 से मां दुर्गा की पूजा की परंपरा चली आ रही है. इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समिति और ग्रामीणों की जिम्मेदारी है. गांव के युवाओं की मेहनत से इस वर्ष भी भव्य पंडाल तैयार किया जा रहा है.
सचिव चंदन लाल ने कहा कि पूजा को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह है. पंडाल निर्माण से लेकर सजावट और श्रद्धालुओं की सुविधा तक सभी तैयारियां समय पर पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है. महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश व्यवस्था रखने का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और सभी को सुविधाजनक दर्शन कराना है.
कोषाध्यक्ष रामजी ने बताया कि इस वर्ष पूजा आयोजन पर करीब 3 से 4 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. पंडाल और सजावट में स्थानीय युवाओं की भागीदारी से आयोजन को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह है. उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की कृपा से पूजा समारोह शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने की तैयारी है.
नवरात्र के करीब आते ही मुरार गांव में पूजा को लेकर उत्साह बढ़ने लगा है. पंडाल निर्माण में जुटे युवाओं का उत्साह और छह दशक से ज्यादा पुरानी परंपरा इस बार के आयोजन को खास बना रही है.





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