नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के रिकॉर्ड के मुताबिक, बक्सर के 'पांडेय ट्रेडर्स' के बैंक खाते के खिलाफ 12 राज्यों में 26 से अधिक साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज मिली हैं.

- 12 राज्यों में 26 से अधिक साइबर अपराधों से जुड़े तार, फर्जी ऐप पर दिखाते थे लाखों का मुनाफा
- आरा के रिसॉर्ट में पांच दिन तक खाताधारकों को रखने का आरोप, मोबाइल में एसएमएस चुराने वाले मैलवेयर मिले; गुजरात पुलिस ने मांगी 96 घंटे की ट्रांजिट रिमांड
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शेयर बाजार में ब्लॉक डील और भारी मुनाफे का लालच देकर देशभर में लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले कथित अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का गुजरात की दाहोद साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने तकनीकी निगरानी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के आधार पर बिहार के बक्सर में छापेमारी कर कथित सूत्रधार शैलेश कुमार ललन मिश्रा (27 वर्ष) को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी शेयर ट्रेडिंग ऐप, संदिग्ध एपीके फाइलों और दूसरे लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर ठगी की रकम का लेन-देन करता था. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के रिकॉर्ड के मुताबिक, बक्सर के 'पांडेय ट्रेडर्स' के बैंक खाते के खिलाफ 12 राज्यों में 26 से अधिक साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज मिली हैं. पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है.
व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर जीता भरोसा, फर्जी ऐप से दिखाया मुनाफा
मामले की शुरुआत गुजरात के दाहोद जिले के झालोद निवासी प्रीतमकुमार कांतुभाई सांगड़ा की शिकायत से हुई. 34 वर्षीय प्रीतमकुमार सुखसर स्थित सीएचसी अस्पताल में कार्यरत हैं. शिकायत के अनुसार, 18 जून 2026 को उन्हें 'INDIA REPUBLIC VENTURE' नामक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था. इस ग्रुप में करीब 144 सदस्य थे. यहां 'हार्दिक दोषी' नाम का व्यक्ति रोजाना सुबह नौ बजे शेयर खरीदने और अगले दिन सुबह दस बजे बेचने की सलाह देता था. ग्रुप के दूसरे सदस्य मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा करते थे, जिससे निवेशकों को भरोसा होने लगता था.
इसके बाद प्रीतमकुमार को गूगल प्ले स्टोर जैसी दिखने वाली लिंक के जरिए 'BR NOVA' नाम का ऐप डाउनलोड कराया गया. शुरुआत में 20 हजार रुपये निवेश करवाए गए और ऐप के डैशबोर्ड पर 1,291 रुपये का मुनाफा दिखाया गया. शुरुआती लाभ देखकर पीड़ित को लगा कि निवेश से वास्तव में कमाई हो रही है. इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठगों ने उन्हें बड़ी रकम निवेश करने के लिए तैयार किया.
10 लाख निवेश के बाद खाते में दिखने लगे 12 लाख रुपये
पुलिस के अनुसार, ठगों ने पीड़ित को 'VINCOFE' और 'ATHERENERG' कंपनियों के ब्लॉक डील शेयरों में 10 लाख रुपये से अधिक निवेश करने पर 15 से 20 प्रतिशत मुनाफा मिलने का लालच दिया. इसके बाद पीड़ित ने बंधन बैंक के खाते में आरटीजीएस के जरिए 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए.
फर्जी ऐप पर उनके नाम से 964 शेयर खरीदे हुए दिखाए गए. मुनाफा जोड़कर कुल रकम 12,02,443 रुपये प्रदर्शित होने लगी. लेकिन 13 जुलाई 2026 को जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो स्क्रीन पर 'Withdrawal Did Not Pass' का संदेश दिखाई दिया. संपर्क करने पर ठगों ने कथित तौर पर बताया कि रकम स्लॉट बुकिंग में फंसी है और निकासी के लिए 20 प्रतिशत यानी करीब 2.40 लाख रुपये अतिरिक्त जमा करने होंगे.
इस मांग के बाद पीड़ित को ठगी का संदेह हुआ. उन्होंने 14 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के बाद जांच शुरू हुई और कथित फर्जी ऐप भी प्ले स्टोर से गायब हो गया.
ठगी की रकम का बक्सर कनेक्शन, पांडेय ट्रेडर्स खाते में पहुंचे चार लाख
दाहोद साइबर थाने में निरीक्षक केएस गोहिल की ओर से दर्ज प्राथमिकी संख्या 11821021260005/2026 के आधार पर पुलिस ने रकम के लेन-देन की कड़ियां खंगालीं. जांच में पता चला कि पीड़ित से ठगे गए 10.20 लाख रुपये में से 9,99,952 रुपये पहले बंधन बैंक के खाते में पहुंचे. इसके बाद चार लाख रुपये सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के उस खाते में ट्रांसफर किए गए, जो बक्सर में 'पांडेय ट्रेडर्स' के नाम पर संचालित था.
इस खाते का नंबर 5981376639 बताया गया है. पुलिस के अनुसार, इसी खाते के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज मिली हैं. वित्तीय लेन-देन की जांच ने पुलिस को बक्सर तक पहुंचाया और खाते से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई.
तीन खाताधारक पहले गिरफ्तार, जमीन कारोबार के नाम पर खुलवाया खाता
पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर 29 सितंबर 2026 को बक्सर में कार्रवाई कर 'पांडेय ट्रेडर्स' खाते के तीन संयुक्त खाताधारकों को गिरफ्तार किया था. इनमें मोहम्मद शमी अली, पिता मोहम्मद गुलवास, निवासी अताव, डुमरांव; दीपू कुमार, पिता द्वारिका पांडेय, निवासी राजडीहा, डुमरांव; और धर्मेंद्र कुमार, पिता जगदयाल यादव, निवासी कोडेसरी, सिकरौल/इटाढ़ी शामिल हैं.
पुलिस पूछताछ में तीनों ने कथित तौर पर बताया कि शैलेश कुमार ललन मिश्रा ने उन्हें पटना के बिहटा में जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी कंपनी शुरू करने का झांसा दिया था. उसने कथित तौर पर कहा था कि उसके अपने खाते में अधिक लेन-देन होने के कारण टैक्स संबंधी परेशानी है. ऐसे में यदि वे अपना करंट अकाउंट उपलब्ध कराते हैं, तो खाते में जमा होने वाली कुल रकम पर दो प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा.
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि खाताधारकों को लेन-देन की वास्तविक प्रकृति की कितनी जानकारी थी और इस नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी.
आरा के रॉयल रिसॉर्ट में पांच दिन तक रखा, खाते से 1.10 करोड़ का लेन-देन
खाताधारकों के बयानों के मुताबिक, छह जुलाई 2026 को शैलेश मिश्रा अपने सहयोगियों शिवेश सिंह, निवासी वार्ड संख्या 15, बक्सर, और विश्वास कुमार सिंह के साथ कार से डुमरांव पहुंचा था. इसके बाद तीनों खाताधारकों को बैंक किट के साथ भोजपुर जिले के आरा स्थित 'रॉयल रिसॉर्ट' ले जाया गया.
आरोप है कि वहां खाताधारकों को एक कमरे में रखा गया, जबकि शैलेश और उसके सहयोगी दूसरे कमरे में ठहरे थे. इस दौरान खाताधारकों के मोबाइल सिम कार्ड, नेट बैंकिंग यूजरनेम, पासवर्ड और ईमेल आईडी अपने कब्जे में ले लिए गए. पुलिस के अनुसार, पांच दिनों के भीतर संबंधित खाते से करीब 1 करोड़ 10 लाख रुपये का लेन-देन हुआ.
खाताधारकों को दो प्रतिशत कमीशन देने की बात कही गई थी, लेकिन उनके बयानों के अनुसार उन्हें शुरुआत में ऑनलाइन माध्यम से कुल 97,600 रुपये मिले. इसमें शिवेश सिंह की ओर से 63,600 रुपये, विश्वास कुमार सिंह की ओर से 30 हजार रुपये और शैलेश मिश्रा की ओर से चार हजार रुपये दिए जाने की बात कही गई है. बाद में शैलेश ने कथित तौर पर 35 हजार रुपये और दिए. शेष कमीशन नहीं मिलने की बात भी खाताधारकों ने कही है.
मोबाइल में मिले मैलवेयर एपीके, ओटीपी दूसरे सर्वर पर भेजने का आरोप
इस मामले का सबसे अहम पहलू मोबाइल फोन के जरिए बैंकिंग संबंधी जानकारी हासिल करने का कथित तरीका है. पुलिस की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच में संदिग्ध व्हाट्सएप चैट तथा कई एपीके फाइलों का पता चला है. इनमें 'znpay.apk', 'sms_hero_1.0.1.apk', 'crownsms.apk' और 'masterpay_sms' नाम की फाइलें शामिल बताई गई हैं.
जांच के अनुसार, शैलेश खाताधारकों को ये फाइलें भेजता था और उनसे मोबाइल में एसएमएस, लोकेशन तथा फोन से जुड़ी परमिशन चालू करवाता था. इसके बाद उनसे परमिशन चालू करने का वीडियो प्रमाण भी मांगा जाता था. पुलिस को आशंका है कि इन ऐप्स के माध्यम से बैंक के लॉगिन और रकम ट्रांसफर करने के लिए आने वाले ओटीपी ठगों तक पहुंचाए जाते थे.
चैट रिकॉर्ड में कथित तौर पर आरोपियों की ओर से फोन चार्ज में रखने, उसे बंद नहीं करने, एपीके में ही ओटीपी आने और वीपीएन चालू रखने जैसी हिदायतें दी गई थीं. जांच एजेंसियां इन डिजिटल साक्ष्यों की मदद से गिरोह के काम करने के तरीके और उसके अन्य सदस्यों की पहचान करने में जुटी हैं.
12 राज्यों में फैला नेटवर्क, 26 से अधिक शिकायतों की जांच
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार, 'पांडेय ट्रेडर्स' के सेंट्रल बैंक खाते के खिलाफ देश के 12 राज्यों में 26 से अधिक साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज मिली हैं. इनमें उत्तर भारत के हरियाणा के सिरसा सिटी, दिल्ली के नॉर्थ और वेस्ट साइबर पुलिस स्टेशन तथा उत्तर प्रदेश से जुड़े मामले शामिल बताए गए हैं.
दक्षिण भारत में कर्नाटक के बेंगलुरु सिटी और कोप्पल, तेलंगाना के मलकाजगिरी और साइबराबाद, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तथा तमिलनाडु के चेन्नई साउथ, सीसीबी-I और विरुधुनगर से संबंधित शिकायतों का उल्लेख है.
इसके अलावा महाराष्ट्र के मुंबई सिटी और गामदेवी साइबर सेल, मध्य प्रदेश के ग्वालियर क्राइम ब्रांच, ओडिशा के भुवनेश्वर बड़ागड़ा तथा बिहार के नवगछिया-बिहपुर से जुड़े मामले भी रिकॉर्ड में बताए गए हैं. पुलिस इन शिकायतों और बैंक खाते के बीच संबंधों की जांच कर रही है. हालांकि, किसी खाते के खिलाफ शिकायत दर्ज होना अपने आप में हर मामले में आरोपी की संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं है.
पंच मंदिर इलाके में लोकेशन मिलने पर बक्सर पहुंची गुजरात पुलिस
मोबाइल नंबर की तकनीकी निगरानी के आधार पर दाहोद साइबर पुलिस को शैलेश मिश्रा की लोकेशन बक्सर के चरित्रवन स्थित पंच मंदिर इलाके में मिली. इसके बाद दाहोद साइबर थाने के पुलिस सब-इंस्पेक्टर एसडी सरवैया अपनी टीम के साथ बक्सर पहुंचे. स्थानीय आदर्श नगर थाना पुलिस के सहयोग से 15 अक्टूबर 2026 की रात 11 बजकर पांच मिनट पर शैलेश कुमार ललन मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया गया.
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से वीवो वी30 स्मार्टफोन जब्त किया. फोन में दो आईएमईआई नंबर बताए गए हैं. इसके साथ सक्रिय सिम कार्ड भी जब्त किए गए. पुलिस के मुताबिक, फोन का इस्तेमाल कथित ठगी और व्हाट्सएप चैट के लिए किया गया था. गिरफ्तारी की सूचना आरोपी के चचेरे भाई धीरेंद्र मिश्रा को दी गई और आदर्श नगर थाने में जब्ती सूची तैयार की गई.
96 घंटे की ट्रांजिट रिमांड की मांग, तीन सहयोगियों की तलाश
नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने बताया कि 16 अक्टूबर 2026 को दाहोद पुलिस ने शैलेश मिश्रा को बक्सर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया और उसे गुजरात ले जाकर पूछताछ करने के लिए 96 घंटे की ट्रांजिट रिमांड की अर्जी दाखिल की. पुलिस के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 317(4), 318(4), 319(2) और 61(2) के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत कार्रवाई की जा रही है.
पुलिस अब शिवेश सिंह, विश्वास कुमार सिंह और व्हाट्सएप ग्रुप के कथित एडमिन 'हार्दिक दोषी' की तलाश में छापेमारी कर रही है. जांच का उद्देश्य ठगी की रकम के पूरे प्रवाह का पता लगाना, दूसरे बैंक खातों की पहचान करना और देशभर में दर्ज शिकायतों के बीच संबंध स्थापित करना है. पुलिस की जांच में सामने आए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है.




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