कृष्णलीला के दौरान वामनावतार की कथा ने दर्शकों को दान, धर्म और वचन निभाने का संदेश दिया. ऐतिहासिक किला मैदान स्थित रामलीला मंच पर लीलाओं को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी.

- खर-दूषण-त्रिसरा वध और सीताहरण के मंचन ने दर्शकों को किया भावुक
- वामनावतार लीला में दिखा राजा बलि के समर्पण का प्रसंग
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : किला मैदान में चल रहे 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव में गुरुवार को रामलीला और कृष्णलीला के मंचन ने श्रद्धालुओं को भक्ति और भावनाओं से जोड़ दिया. देर रात रामलीला में खर-दूषण-त्रिसरा वध, सीताहरण, माता सीता की रक्षा के लिए जटायु का रावण से युद्ध और भगवान श्रीराम की शबरी से भेंट का भावपूर्ण मंचन हुआ. वहीं, दिन में कृष्णलीला के दौरान वामनावतार की कथा ने दर्शकों को दान, धर्म और वचन निभाने का संदेश दिया. ऐतिहासिक किला मैदान स्थित रामलीला मंच पर लीलाओं को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी.
खर-दूषण का अंत, छल से रावण ने किया सीताहरण
मथुरा-वृंदावन से आए श्री बाल कृष्ण रासलीला रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में रामलीला का मंचन किया. कथा के अनुसार, लक्ष्मण द्वारा सूर्पणखा की नाक काटे जाने के बाद वह अपने भाइयों खर, दूषण और त्रिसरा के पास पहुंचती है. वह भगवान श्रीराम से बदला लेने के लिए उन्हें उकसाती है. इसके बाद तीनों राक्षस सेना लेकर पंचवटी पहुंचते हैं, जहां भगवान श्रीराम उनका वध कर देते हैं.
भाइयों की मृत्यु से क्रोधित सूर्पणखा लंका पहुंचकर रावण को पूरी घटना बताती है और माता सीता के सौंदर्य का वर्णन करती है. इसके बाद रावण मारीच की मदद से सीताहरण की योजना बनाता है. मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचता है. मृग को देखकर माता सीता भगवान श्रीराम से उसे लाने का आग्रह करती हैं. श्रीराम उसके पीछे वन में चले जाते हैं. मारीच घायल होने पर श्रीराम की आवाज में लक्ष्मण को पुकारता है. माता सीता के आग्रह पर लक्ष्मण भी राम की खोज में निकल पड़ते हैं.
इसी बीच रावण साधु का वेश धारण कर पंचवटी पहुंचता है और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लेता है. वह उन्हें लेकर लंका की ओर बढ़ता है, जबकि माता सीता रास्ते में अपने आभूषण गिराती जाती हैं, ताकि श्रीराम को उनके जाने की दिशा का पता चल सके.
सीता की रक्षा में जटायु ने दिखाई वीरता, शबरी की भक्ति ने किया भावुक
सीताहरण के दौरान पक्षीराज जटायु माता सीता की रक्षा के लिए रावण को चुनौती देते हैं. वह पूरी वीरता से उसका रास्ता रोककर युद्ध करते हैं, लेकिन रावण उनके पंख काटकर उन्हें घायल कर देता है और सीता को लेकर आगे बढ़ जाता है. बाद में माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भेंट घायल जटायु से होती है. जटायु उन्हें रावण के दक्षिण दिशा में जाने की जानकारी देते हैं. माता सीता की रक्षा के लिए जटायु का बलिदान दर्शकों को भावुक कर गया.
इसके बाद शबरी प्रसंग का मंचन हुआ. वर्षों से भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा कर रहीं शबरी अपने प्रभु को सामने देखकर भावविभोर हो जाती हैं. वह प्रेमपूर्वक उनका स्वागत करती हैं और बेर अर्पित करती हैं. भगवान श्रीराम उनकी निष्कपट भक्ति और प्रेम को स्वीकार करते हैं तथा उन्हें नवधा भक्ति का उपदेश देते हैं. इस प्रसंग ने संदेश दिया कि सच्ची भक्ति के लिए आडंबर नहीं, बल्कि निर्मल हृदय और निस्वार्थ प्रेम आवश्यक है.
तीन पग भूमि मांगकर वामन भगवान ने बदला तीनों लोकों का स्वरूप
दिन में कृष्णलीला के दौरान वामनावतार का मंचन किया गया. कथा के अनुसार, राजा बलि ने अपने पराक्रम से इंद्रदेव को पराजित कर तीनों लोकों पर अधिकार स्थापित कर लिया था. स्वर्ग का अधिकार वापस पाने के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की. इसके बाद भगवान विष्णु ने माता अदिति के गर्भ से वामन रूप में अवतार लिया.
वामन भगवान ब्राह्मण का रूप धारण कर राजा बलि के यज्ञ स्थल पर पहुंचे और उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी. गुरु शुक्राचार्य ने राजा बलि को सावधान किया, लेकिन वह अपने वचन से पीछे नहीं हटे. इसके बाद भगवान वामन ने विराट स्वरूप धारण कर पहले पग में पृथ्वी और दूसरे पग में देवलोक नाप लिया. तीसरे पग के लिए स्थान नहीं बचने पर राजा बलि ने अपना सिर आगे कर दिया. भगवान ने तीसरा पग उनके सिर पर रखकर उन्हें पाताललोक पहुंचा दिया. राजा बलि की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया.
श्री रामलीला समिति, बक्सर की ओर से आयोजित विजयादशमी महोत्सव नगर की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. रामलीला और कृष्णलीला के माध्यम से लोगों को सत्य, धर्म, त्याग, वचनबद्धता और भक्ति की प्रेरणा मिल रही है. प्रतिदिन उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ महोत्सव के प्रति लोगों की आस्था और उत्साह को दर्शा रही है.




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