यह भी बताया कि गरीबी के कारण बच्चों को कम उम्र में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी शिक्षा और बचपन प्रभावित होता है. बच्चों को शोषण से बचाने के लिए जागरूकता और कानूनी सहायता जरूरी है.
- पॉक्सो एक्ट की जानकारी देकर विद्यार्थियों को किया जागरूक, भरोसेमंद व्यक्ति से बात करने और मदद मांगने की दी सीख
- सुरक्षित बचपन अभियान के तहत दो स्कूलों में लगा विधिक जागरूकता शिविर, सक्रिय भागीदारी करने वाले विद्यार्थी हुए सम्मानित
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बच्चों की सुरक्षा सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है. उन्हें यह पता होना जरूरी है कि कौन-सा व्यवहार सुरक्षित है और किसी के गलत व्यवहार पर मदद कैसे मांगी जाए. इसी उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बक्सर की ओर से सुरक्षित बचपन अभियान के तहत शहर के दो विद्यालयों में पॉक्सो एक्ट पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए. 28 अक्टूबर को मेथोडिस्ट स्कूल और 29 अक्टूबर को बिहार सेंट्रल स्कूल में आयोजित कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को बाल यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम, 2012 के प्रावधानों, बच्चों के अधिकारों और व्यक्तिगत सुरक्षा के बारे में जानकारी दी गई.
बच्चों को बताया गया कि उनका शरीर उनकी अपनी जिम्मेदारी, गलत स्पर्श पर कहें 'ना'
मेथोडिस्ट स्कूल में आयोजित शिविर में पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश अमित कुमार शर्मा ने बच्चों को सुरक्षित बचपन का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि बाल मजदूरी, शोषण, हिंसा, बाल विवाह और शिक्षा से वंचित रहना बच्चों के विकास में बड़ी बाधाएं हैं. बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना और उनके अधिकारों की रक्षा करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.
उन्होंने परिवार में बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करने, उनकी गतिविधियों पर ध्यान देने और किसी परेशानी को साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया. उन्होंने यह भी बताया कि गरीबी के कारण बच्चों को कम उम्र में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी शिक्षा और बचपन प्रभावित होता है. बच्चों को शोषण से बचाने के लिए जागरूकता और कानूनी सहायता जरूरी है.
अच्छे और बुरे स्पर्श का अंतर समझाया, शिकायत करने से नहीं डरने की दी सीख
29 अक्टूबर को बिहार सेंट्रल स्कूल में आयोजित शिविर में किशोर न्याय परिषद, बक्सर के प्रधान दंडाधिकारी हर्षवर्धन सिंह ने विद्यार्थियों को पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों की जानकारी दी. उन्होंने गुड टच और बैड टच के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि यदि किसी के व्यवहार या स्पर्श से बच्चा असहज, भयभीत या असुरक्षित महसूस करता है, तो उसे अपनी बात कहनी चाहिए.
विद्यार्थियों को बताया गया कि कोई व्यक्ति यदि निजी अंगों को छूने की कोशिश करे, जबरदस्ती गले लगाए या किस करे अथवा किसी अनुचित व्यवहार को छिपाकर रखने का दबाव बनाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि वे जरूरत पड़ने पर 'ना' कहें, वहां से सुरक्षित स्थान पर जाएं और माता-पिता, शिक्षक या किसी अन्य भरोसेमंद व्यक्ति को तुरंत जानकारी दें. ऐसी स्थिति में बच्चे की कोई गलती नहीं होती और उसे मदद मांगने से डरना नहीं चाहिए.
दोनों शिविरों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया. किसी संकट की स्थिति में बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 की जानकारी भी दी गई.
मेथोडिस्ट स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी के लिए शुभम यादव, आकाश कुमार, वेदिका मिश्रा, वंशिका सिन्हा और श्रेया रानी को सम्मानित किया गया. इस दौरान पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव, पीएलवी ब्रजेश कुमार, विद्यालय की प्राचार्या जैकलिन गार्डनर सहित शिक्षक और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कर्मचारी मौजूद रहे.
वहीं, बिहार सेंट्रल स्कूल में आयोजित शिविर में पैनल अधिवक्ता मनोज कुमार श्रीवास्तव, पीएलवी ब्रजेश कुमार, प्राचार्य सरोज सिंह, उप-प्राचार्य विनय कुमार तिवारी सहित शिक्षक उपस्थित रहे. कार्यक्रम में प्राप्ति पांडेय, राजलक्ष्मी, शीतल कुमारी, श्वेतांक पांडेय और अभिषेक सिंह ने सक्रिय भागीदारी की. जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने दोनों कार्यक्रमों के सफल आयोजन में सहयोग के लिए विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार जताया.






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