श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में श्रीधाम वृंदावन से आए श्री बालकृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में दिन और देर रात तक चले मंचन से धार्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया.

- सातवें दिन किला मैदान की रामलीला में भक्ति, वीरता और मिथिला की संस्कृति का दिखा संगम
- मीरा चरित्र से लेकर श्रीराम विवाह तक के प्रसंगों ने दर्शकों को किया भावविभोर, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा रामलीला मंच
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : नगर के ऐतिहासिक किला मैदान में चल रहे 20 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के सातवें दिन शनिवार को मीरा की कृष्ण भक्ति, लक्ष्मण-परशुराम संवाद और श्रीराम विवाह के मंचन ने दर्शकों का मन मोह लिया. श्री रामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित महोत्सव में श्रीधाम वृंदावन से आए श्री बालकृष्ण रासलीला एवं रामलीला मंडल के कलाकारों ने स्वामी श्री मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में दिन और देर रात तक चले मंचन से धार्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया.
मीरा के कृष्ण प्रेम ने छुआ दर्शकों का दिल
दिन में मंचित मीरा चरित्र में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति मीराबाई की अटूट श्रद्धा, समर्पण और भक्ति को जीवंत किया गया. मंचन में पूर्व जन्म की श्यामा गोपी से लेकर राजस्थान के मेड़ता में मीरा के जन्म और संत रैदास से उनकी भेंट तक के प्रसंग दिखाए गए. विवाह के बाद भी गिरधर गोपाल के प्रति मीरा का प्रेम और भक्ति में उनकी अडिग आस्था दर्शकों को भावुक कर गई.
सांसारिक विरोध और कठिन परिस्थितियों के बावजूद मीरा ने कृष्ण भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा. मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने हर संकट में अपनी भक्त की रक्षा की. अंततः राजमहल त्यागकर वृंदावन पहुंचीं मीरा को गिरधर गोपाल के दर्शन प्राप्त हुए. भजनों और कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय ने पूरे परिसर को भक्तिमय कर दिया.
लक्ष्मण-परशुराम संवाद में दिखा वीर रस
देर रात रामलीला में शिव धनुष टूटने के बाद परशुराम के क्रोधित होकर जनक दरबार पहुंचने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया. टूटे धनुष को देखकर परशुराम ने सभा में मौजूद योद्धाओं को ललकारा, तो लक्ष्मण ने अपने निर्भीक और व्यंग्यपूर्ण संवादों से उन्हें जवाब दिया. दोनों के बीच तीखे संवादों ने मंच पर वीर रस के साथ हास्य का भी रंग भर दिया.
इसके बाद भगवान श्रीराम ने विनम्रता से हस्तक्षेप कर स्थिति को संभाला. श्रीराम के दिव्य स्वरूप को पहचानने के बाद परशुराम का क्रोध शांत हो गया. कलाकारों की संवाद अदायगी और अभिनय पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं.
श्रीराम विवाह के मंचन में जीवंत हुई मिथिला की परंपरा
लक्ष्मण-परशुराम संवाद के बाद श्रीराम विवाह का भव्य मंचन हुआ. राजा जनक के निमंत्रण पर महाराज दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचे. यहां भगवान श्रीराम और माता सीता सहित चारों भाइयों के विवाह का उत्सव पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ. मंगल गीतों, विवाह की रस्मों और कलाकारों की आकर्षक वेशभूषा ने मिथिला की सांस्कृतिक छटा को मंच पर साकार कर दिया.
बारात के अयोध्या लौटने पर मंगल उत्सव का दृश्य प्रस्तुत किया गया. विवाह प्रसंग के दौरान दर्शक धार्मिक उल्लास में डूबे रहे और पूरा रामलीला मंच जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा.
श्री रामलीला समिति, बक्सर की ओर से आयोजित यह महोत्सव बक्सर की आजादी-पूर्व से चली आ रही रामलीला परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बना हुआ है.




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