काली बाबू चौक का नाम बदलने के प्रस्ताव पर भड़का आक्रोश, राजपूत समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी ..

बताया कि काली बाबू ने तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सौंपकर पूरे शहर में भ्रमण कराया था. इसके अलावा, उन्होंने बक्सर में बड़ा बाजार की स्थापना कराई और गंगा में नाविकों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया था.





                           

  • ‘सेवा ज्योति चौक’ करने के प्रस्ताव का विरोध, भाजपा सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
  • स्वतंत्रता सेनानी काली बाबू के ऐतिहासिक योगदान का दिया हवाला, नाम बदलने की कोशिश पर व्यापक आंदोलन की चेतावनी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : शहर के गोलंबर स्थित काली बाबू चौक का नाम बदलकर ‘सेवा ज्योति चौक’ करने के प्रस्ताव को लेकर राजपूत समाज में आक्रोश है. शनिवार की सुबह करीब आठ बजे समाज के दर्जनों लोगों ने चौक पर सांकेतिक प्रदर्शन कर प्रस्ताव का विरोध किया. इस दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई. प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि काली बाबू चौक का नाम बदलने की दिशा में कोई कदम उठाया गया तो समाज व्यापक आंदोलन करेगा.

महापुरुषों के सम्मान से समझौता नहीं

राजपूत समाज के वरिष्ठ नेता योगेंद्र सिंह ने कहा कि बक्सर में पहले से कई चौक हैं, लेकिन सरकार उनका नाम बदलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार में हिम्मत है तो अंबेडकर चौक और ज्योति प्रकाश चौक का नाम बदलकर दिखाए. उन्होंने कहा कि राजपूत समाज अपने महापुरुषों का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा.

समाजसेवी अरविंद सिंह ने कहा कि काली बाबू की प्रतिमा और चौक का ऐतिहासिक महत्व है. उनके अनुसार, काली बाबू अगस्त 1942 के क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने गरीबों के हितों के लिए काम किया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था. अरविंद सिंह ने बताया कि काली बाबू ने तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सौंपकर पूरे शहर में भ्रमण कराया था. इसके अलावा, उन्होंने बक्सर में बड़ा बाजार की स्थापना कराई और गंगा में नाविकों के अधिकारों के लिए भी संघर्ष किया था.

1993 में हुआ था प्रतिमा स्थल का शिलान्यास

एक अन्य व्यक्ति ने नाम बदलने के प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि केवल नाम बदलने से ही विकास हो सकता है तो भाजपा कार्यालय का नाम बदलकर ‘सेवा ज्योति भवन’ कर दिया जाना चाहिए.

गौरतलब है कि स्वर्गीय काली प्रसाद सिंह के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास नौ अक्टूबर 1993 को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद महाराजा कमल सिंह ने की थी. इसमें तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह और मुख्य अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति उदय प्रताप सिंह उपस्थित थे.

शनिवार को आयोजित बैठक में चौक का नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई. राजपूत समाज के लोगों ने कहा कि काली बाबू चौक का नाम बदलने का प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है. यदि ऐसा करने की कोशिश की गई तो वे एकजुट होकर विरोध करेंगे.

प्रदर्शन और बैठक में अरविंद सिंह, रामराज सिंह, कृष्णा सिंह, पप्पू सिंह, गणेश सिंह, रामनाथ सिंह, संजय सिंह, संतोष सिंह, हृदयानंद सिंह, डॉ. ए.के. सिंह, विजय प्रताप सिंह, परमहंस सिंह, पिंटू सिंह, कुंजबिहारी सिंह और मनोज सिंह सहित समाज के कई लोग उपस्थित रहे.


















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