यह मुद्दा उठने के बाद भोजपुरी भाषी समाज की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं. लंबे समय से भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है.
- आठवीं अनुसूची में शामिल करने की उठाई मांग, सरकार से पूछा- आखिर कब मिलेगा संवैधानिक दर्जा?
- बिहार सरकार ने बताया- केंद्र को भेजी जा चुकी है अनुशंसा, अब फैसले का इंतजार
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : 10 करोड़ से अधिक लोगों की मातृभाषा भोजपुरी को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग गुरुवार को बिहार विधानसभा में जोरदार ढंग से उठी. बक्सर सदर के विधायक आनंद मिश्र ने सदन में सरकार से इस संबंध में सवाल पूछते हुए कहा कि समृद्ध साहित्य, सांस्कृतिक विरासत और अपनी रखने वाली भोजपुरी तथा कैथी लिपि को अब तक संवैधानिक मान्यता क्यों नहीं मिली.
मंत्री ने विधायक आनंद मिश्र के सवाल का जवाब देते हुए बताया कि कैथी लिपि को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल राज्य सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है.
सरकार ने सदन में रखी स्थिति
मंत्री ने स्पष्ट किया कि कैथी लिपि को लेकर फिलहाल राज्य सरकार के स्तर पर कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है. इस विषय में अभी कोई नई कार्रवाई नहीं की जा रही है.
भोजपुरी के पक्ष में पहले ही उठाया जा चुका है कदम
हालांकि सरकार ने यह भी बताया कि भोजपुरी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए बिहार सरकार 12 जनवरी 2026 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय को अपनी अनुशंसा भेज चुकी है. अब इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है.
भोजपुरी को संवैधानिक पहचान मिलने की बढ़ी उम्मीद
विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद भोजपुरी भाषी समाज की उम्मीदें फिर बढ़ गई हैं. लंबे समय से भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की जा रही है. विधायक आनंद मिश्र द्वारा सदन में उठाई गई यह मांग अब एक बार फिर इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ले आई है.
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