आयोजन का उद्देश्य केवल शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को आचार्य शिवपूजन सहाय के साहित्य, उनके विचारों और हिंदी भाषा के प्रति उनके योगदान से परिचित कराना भी है.

महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में होगा आयोजन
नई पीढ़ी को बताए जाएंगे आचार्य शिवपूजन सहाय के विचार
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर मानी जाने वाली आचार्य शिवपूजन सहाय की कालजयी कृति 'देहाती दुनिया' के प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे होने पर उनके पैतृक जिले बक्सर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में होने वाले इस व्याख्यान के माध्यम से महान साहित्यकार को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी.
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के. के. सिंह के दिशा-निर्देश में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है. आयोजन का उद्देश्य केवल शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को आचार्य शिवपूजन सहाय के साहित्य, उनके विचारों और हिंदी भाषा के प्रति उनके योगदान से परिचित कराना भी है.
1926 में प्रकाशित हुई थी 'देहाती दुनिया'
आचार्य शिवपूजन सहाय द्वारा वर्ष 1926 में लिखी गई 'देहाती दुनिया' हिंदी साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण आंचलिक कृतियों में गिनी जाती है. इस उपन्यास के प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित होने वाला यह व्याख्यान साहित्यिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है.
बिहार के ग्रामीण जीवन का सजीव दस्तावेज
'देहाती दुनिया' में बिहार के गांवों का जीवन, लोकभाषा, रीति-रिवाज, परंपराएं और लोक-संस्कृति का अत्यंत सजीव एवं यथार्थ चित्रण मिलता है. यही कारण है कि इसे हिंदी के शुरुआती और सर्वाधिक चर्चित आंचलिक उपन्यासों में शामिल किया जाता है. साहित्यकारों के अनुसार यह कृति भारतीय ग्रामीण समाज को समझने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी है.
नई पीढ़ी को साहित्यिक विरासत से जोड़ने की पहल
प्राचार्य ने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को आचार्य शिवपूजन सहाय के व्यक्तित्व और कृतित्व से परिचित कराना है. व्याख्यान के माध्यम से यह बताया जाएगा कि किस प्रकार उनकी रचनाओं ने हिंदी साहित्य को नई दिशा दी और भारतीय ग्रामीण जीवन को साहित्य के केंद्र में स्थापित किया.
बक्सर के गौरवशाली साहित्यिक इतिहास पर भी होगी चर्चा
आयोजन के दौरान बक्सर की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और उसके ऐतिहासिक योगदान पर भी विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा. महाविद्यालय का मानना है कि अपने जिले के महान साहित्यकारों से नई पीढ़ी को परिचित कराना समय की आवश्यकता है, ताकि स्थानीय साहित्यिक विरासत के प्रति सम्मान और जुड़ाव बढ़ सके.
साहित्य प्रेमियों के लिए बनेगा प्रेरणा का मंच
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह व्याख्यान विद्यार्थियों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों के लिए प्रेरणादायी साबित होगा. कार्यक्रम के माध्यम से आचार्य शिवपूजन सहाय के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उनकी अमूल्य विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा. साथ ही 'देहाती दुनिया' के शताब्दी वर्ष को बक्सर की साहित्यिक पहचान से जोड़ते हुए इसे नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय बनाने की भी पहल की जाएगी.




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