बक्सर रेलवे अस्पताल को मिलेगी नई जिंदगी! 25 लाख से बदलेगी जर्जर इमारत की तस्वीर ..

रेल कर्मचारियों, उनके परिवारों और आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की जीवनरेखा माने जाने वाले इस अस्पताल के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए रेलवे ने 25 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी है.

 



                             



  • लंबे इंतजार के बाद रेलवे ने दी मरम्मत को मंजूरी
  • टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही शुरू होगा अस्पताल के पुनर्निर्माण का काम

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर. वर्षों से बदहाली की मार झेल रहे बक्सर के अनुमंडलीय रेलवे अस्पताल के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. रेल कर्मचारियों, उनके परिवारों और आपातकालीन स्थिति में यात्रियों की जीवनरेखा माने जाने वाले इस अस्पताल के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए रेलवे ने 25 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी है. अब जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है.

बरसात में टपकती छत, जर्जर दीवारें, सीलन, सीमित संसाधन और स्टाफ की कमी जैसी समस्याओं को लेकर यह अस्पताल लंबे समय से चर्चा में रहा है. लगातार शिकायतों और अधिकारियों को भेजी गई रिपोर्ट के बाद आखिरकार रेलवे प्रशासन ने अस्पताल की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए इसकी मरम्मत का निर्णय लिया है. इससे हजारों रेल कर्मचारियों और मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है.

जर्जर भवन की रिपोर्ट के बाद मिली मंजूरी

रेलवे के सहायक अभियंता (एईएन) समय सिंह मीणा ने बताया कि अस्पताल की जर्जर अवस्था से वरीय अधिकारियों को विस्तार से अवगत कराया गया था. निरीक्षण और रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने अस्पताल भवन की मरम्मत के लिए 25 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान कर दी है. उन्होंने कहा कि जल्द ही टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद पुनर्निर्माण और मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया जाएगा.

बरसात में सबसे अधिक होती थी परेशानी

अस्पताल की सबसे बड़ी समस्या उसकी जर्जर छत रही है. बारिश के दौरान कई कमरों में पानी टपकता था, जिससे मरीजों के इलाज के साथ-साथ दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता था. सीलन के कारण विद्युत व्यवस्था प्रभावित होती थी और शॉर्ट सर्किट की आशंका भी बनी रहती थी. अस्पताल कर्मियों को हर मानसून में मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता था.

एक डॉक्टर के भरोसे चल रही स्वास्थ्य सेवा

भवन की मरम्मत की मंजूरी मिलने के बावजूद अस्पताल में मानव संसाधनों की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. वर्तमान में पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी एक डॉक्टर पर है. डॉक्टरों के स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत चिकित्सकों की संख्या कम है. नर्सिंग स्टाफ का अभाव, सीमित फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बना रहता है.

रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं दर्जनों मरीज 

अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 40 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचते हैं. इसके अलावा रात के समय भी आपातकालीन मरीजों का इलाज किया जाता है. गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ सुविधाओं के अभाव में दानापुर मंडल अस्पताल या पटना रेफर करना पड़ता है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है.

हजारों रेलकर्मियों की लाइफलाइन है यह अस्पताल

दानापुर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय रेलखंड के बीच स्थित यह अनुमंडलीय रेलवे अस्पताल बक्सर, डुमरांव, बिहिया और आरा समेत कई रेलवे स्टेशनों पर कार्यरत कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है. स्टेशन मास्टर, ट्रैकमैन, गेटमैन सहित करीब पांच हजार रेलकर्मी और उनके आश्रित इस अस्पताल पर निर्भर हैं. चलती ट्रेन में किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने पर भी रेलवे की इमरजेंसी व्यवस्था के तहत यहां के चिकित्सकों की सेवाएं ली जाती हैं.

मरम्मत के बाद बेहतर सुविधाओं की उम्मीद

रेल कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का मानना है कि भवन की मरम्मत से अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा. हालांकि उनका कहना है कि केवल भवन का नवीनीकरण पर्याप्त नहीं होगा. अस्पताल में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति भी जरूरी है, ताकि यहां आने वाले मरीजों को पूरी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें.

अब टेंडर प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

रेलवे प्रशासन की ओर से मरम्मत को मंजूरी मिलना निश्चित रूप से सकारात्मक कदम है. अब सभी की नजर इस बात पर है कि टेंडर प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है और 25 लाख रुपये की लागत से होने वाला पुनर्निर्माण कार्य कब धरातल पर उतरता है. यदि काम समय पर पूरा हुआ तो वर्षों से बदहाली की पहचान बन चुका बक्सर रेलवे अस्पताल जल्द ही नई पहचान के साथ रेल कर्मचारियों और यात्रियों की बेहतर सेवा कर सकेगा.












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