शुरुआती दिनों में संस्था जरूरतमंद महिलाओं को छोटे ऋण उपलब्ध कराती थी. समय पर ऋण मिलने के कारण इलाके में संस्था की अच्छी साख बन गई और बड़ी संख्या में महिलाएं तथा अन्य लोग इससे जुड़ते चले गए.

- 2019 में बक्सर में शुरू हुई थी संस्था, आसान लोन देकर बनाया भरोसा
- 14 लाख रुपये से अधिक के गबन का आरोप, 15 हजार के लोन पर 18 हजार से ज्यादा वसूली का दावा
बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आसान ऋण उपलब्ध कराने का दावा करने वाली एक दे धन निधि लिमिटेड नामक निजी वित्तीय संस्था पर 14 लाख रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया है. पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि संस्था ने पहले छोटे-छोटे ऋण देकर लोगों का विश्वास जीता और बाद में आकर्षक बचत योजनाओं का लालच देकर उनकी मेहनत की कमाई जमा करा ली. अब संस्था का कार्यालय बंद हो चुका है और निवेशकों की राशि वापस नहीं मिल रही है. मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुटी है, जबकि पीड़ितों का कहना है कि ठगी की वास्तविक राशि दर्ज आंकड़े से कहीं अधिक हो सकती है.
जानकारी के अनुसार अशोक कुमार ने वर्ष 2019 में बक्सर के चरित्रवन स्थित कॉलेज गेट के समीप इस संस्था की शुरुआत की थी. कार्यालय में आठ से नौ कर्मचारी कार्यरत थे. शुरुआती दिनों में संस्था जरूरतमंद महिलाओं को छोटे ऋण उपलब्ध कराती थी. समय पर ऋण मिलने के कारण इलाके में संस्था की अच्छी साख बन गई और बड़ी संख्या में महिलाएं तथा अन्य लोग इससे जुड़ते चले गए.
बचत योजनाओं में निवेश के लिए किया प्रेरित
पीड़िता अर्चना गुप्ता ने बताया कि उन्होंने स्वयं कई महिलाओं को इस संस्था से ऋण दिलवाया था. उनका कहना है कि शुरुआत में संस्था की कार्यप्रणाली सामान्य और भरोसेमंद लगी. इसी विश्वास का लाभ उठाते हुए संचालकों ने बाद में महिलाओं को विभिन्न बचत योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रेरित किया. अर्चना गुप्ता के अनुसार 100 से अधिक महिलाओं ने संस्था की योजनाओं में 14 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा की, लेकिन अब अधिकांश निवेशकों की पूंजी फंस गई है.
15 हजार का लोन, लौटाने पड़े 18 हजार से अधिक
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि संस्था 15 हजार रुपये का ऋण देती थी, लेकिन सात महीने तक प्रत्येक सप्ताह 650 रुपये की किस्त जमा करानी पड़ती थी. इस तरह एक लाभार्थी से कुल 18 हजार रुपये से अधिक की वसूली की जाती थी. महिलाओं ने बताया कि संस्था की ओर से 30 रुपये प्रतिदिन, 500 रुपये प्रतिमाह और 1000 रुपये प्रतिमाह जैसी कई बचत योजनाएं चलाई जा रही थीं. निवेशकों को भरोसा दिलाया गया था कि कम से कम एक वर्ष तक नियमित राशि जमा करने के बाद पूरी रकम 6 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस कर दी जाएगी. इसी आश्वासन के आधार पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने अपनी बचत संस्था में जमा कर दी.
निदेशक की मौत के बाद बंद हो गया कार्यालय
थाने में दिए गए आवेदन के अनुसार संस्था के निदेशक अशोक कुमार का 2 अप्रैल 2024 को निधन हो गया. इसके बाद उनके परिजनों ने निवेशकों को आश्वस्त किया कि पहले की तरह पैसा जमा करते रहें और किसी प्रकार की चिंता न करें. महिलाओं का आरोप है कि उन्होंने 18 अप्रैल 2024 तक नियमित रूप से राशि जमा की, लेकिन अगले ही दिन संस्था का कार्यालय बंद मिला. इसके बाद से न तो जमा राशि वापस मिली और न ही संस्था के जिम्मेदार लोगों से संपर्क हो सका.
पुरुष निवेशक भी आए सामने
अर्चना गुप्ता का कहना है कि इस संस्था के जाल में केवल महिलाएं ही नहीं, बल्कि कई पुरुष भी फंस गए हैं. उनका दावा है कि प्राथमिकी में दर्ज 14 लाख रुपये केवल शुरुआती आंकड़ा है. यदि पुलिस संस्था के सभी वित्तीय लेनदेन और निवेशकों की गहराई से जांच करे तो गबन की वास्तविक राशि इससे कई गुना अधिक सामने आ सकती है.
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा ही मामला
बक्सर में वित्तीय संस्थाओं के जरिए लोगों से ठगी का यह पहला मामला नहीं है. इसी वर्ष 9 जुलाई को नगर थाना क्षेत्र के पीपी रोड स्थित एक निजी फाइनेंस संस्था पर लोन दिलाने के नाम पर लोगों से पैसे वसूलने का मामला सामने आया था. पुलिस ने जांच के बाद संचालक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की थी. उस मामले की जांच अभी जारी है. इसी बीच यह नया मामला सामने आने से लोगों में चिंता बढ़ गई है.





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