कहा कि संघर्ष समिति अपने अभियान को बीच में छोड़ने वाली नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि तय समय में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो पहले से अधिक व्यापक आंदोलन किया जाएगा और जनता अपने अधिकार के लिए फिर सड़क और रेलवे ट्रैक पर उतरेगी.

- रेल चक्का जाम स्थगित, आंदोलन खत्म नहीं. संघर्ष समिति ने प्रशासन को दी चेतावनी
- ओवरब्रिज निर्माण पूरा होने तक Railway Crossing खोलने की मांग. एंबुलेंस, किसान और छात्रों की परेशानी गिनाई
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इटाढ़ी Railway Crossing को खोलने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन फिलहाल 11 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह संघर्ष खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि शनिवार को रेल चक्का जाम की कोशिश के दौरान रेलवे और जिला प्रशासन के अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन को अस्थायी रूप से रोका गया. साथ ही चेतावनी दी गई कि तय समय सीमा के भीतर Railway Crossing नहीं खोली गई तो दोबारा रेल चक्का जाम किया जाएगा.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सरोज राजभर ने कहा कि इटाढ़ी Railway Crossing बंद होने के बाद शहर और आसपास के लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि जिस ओवरब्रिज के सहारे आवागमन होना था, वह तकनीकी खामियों के कारण बंद पड़ा है. ऐसे में जब तक ओवरब्रिज पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक Railway Crossing को खोल देना ही जनता के हित में होगा.
11 दिन का इंतजार, फिर आंदोलन
सरोज राजभर ने बताया कि रेल अधिकारियों ने उनकी मांगों को डीआरएम तक पहुंचाने का भरोसा दिया है. इसी आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने 11 दिनों का समय देने का निर्णय लिया. उन्होंने कहा कि यदि तय अवधि में Railway Crossing नहीं खोली गई तो पहले से बड़े स्तर पर रेल चक्का जाम किया जाएगा.
जनता की परेशानी बनी आंदोलन की वजह
आंदोलनकारियों ने कहा कि Railway Crossing बंद होने से शहर की बड़ी आबादी प्रभावित हो रही है. मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो रही है. किसानों को बीज और कृषि सामग्री लाने-ले जाने में दिक्कत हो रही है. छात्र, महिलाएं और बुजुर्ग रोजाना लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं.
पांडेय पट्टी मार्ग पर बढ़ा दबाव
सरोज राजभर ने कहा कि वैकल्पिक पांडेय पट्टी मार्ग पर इतना दबाव है कि एंबुलेंस भी मुश्किल से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल पा रही है. उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ सकता है.
सावन में और बढ़ेगी मुश्किल
आंदोलनकारियों ने कहा कि सावन माह में रमरेखा घाट, गुप्ता बाबा और सोखा बाबा जाने वाले हजारों श्रद्धालु इसी मार्ग का उपयोग करते हैं. ऐसे में Railway Crossing बंद रहने से धार्मिक यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ जाएगी.
कृष्णावती देवी ने दोहराया संकल्प
संघर्ष समिति की सदस्य कृष्णावती देवी ने कहा कि यदि 11 दिनों के भीतर कोई समाधान नहीं निकला तो पहले से अधिक संख्या में लोग फिर रेलवे ट्रैक पर उतरेंगे. उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा के लिए शुरू हुआ यह आंदोलन किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेगा.
रामाकांत चंद्रवंशी का प्रशासन पर सवाल
रामाकांत चंद्रवंशी ने कहा कि प्रशासन को जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक ओवरब्रिज पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक Railway Crossing खोलना ही सबसे व्यावहारिक समाधान है.
आंदोलनकारी बोले, संघर्ष रहेगा जारी
अन्य आंदोलनकारियों ने कहा कि संघर्ष समिति अपने अभियान को बीच में छोड़ने वाली नहीं है. उन्होंने कहा कि यदि तय समय में कोई ठोस फैसला नहीं हुआ तो पहले से अधिक व्यापक आंदोलन किया जाएगा और जनता अपने अधिकार के लिए फिर सड़क और रेलवे ट्रैक पर उतरेगी.
'रेल रोकना मजबूरी, शौक नहीं'
आंदोलनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य रेल परिचालन बाधित करना नहीं है. उनका मकसद केवल आम जनता की समस्या का समाधान कराना है. अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और रेलवे पर टिकी हैं कि 11 दिनों के भीतर इटाढ़ी Railway Crossing को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है.
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