चलकर स्वास्थ्य वाहन तक नहीं पहुंच पाने वाले बुजुर्गों और महिलाओं के घर तक भी होम विजिट के माध्यम से चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जाती है. इसके अलावा लोगों को बीमारियों से बचाव और संतुलित दिनचर्या के लिए नियमित रूप से जागरूक किया जा रहा है.
- चौसा-राजपुर के ग्रामीण इलाकों में मोबाइल हेल्थ यूनिट की दस्तक, बुजुर्गों और महिलाओं के घर तक पहुंच रही चिकित्सा सुविधा
- जून में 2763 लोगों को परामर्श-दवा, 249 की शुगर जांच और 9 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए किया गया रेफर
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जहां अस्पताल तक पहुंचना कई ग्रामीणों के लिए आज भी मुश्किल है, वहीं एक मोबाइल स्वास्थ्य वाहन पिछले दस वर्षों से गांव-गांव घूमकर लोगों के लिए ‘संजीवनी’ का काम कर रहा है. चौसा और राजपुर प्रखंड के आसपास के गांवों में चल रही ‘सतलुज संजीवनी सेवा’ ने अब तक 3 लाख 73 हजार 528 लोगों तक चिकित्सकीय परामर्श और नि:शुल्क दवाओं की सुविधा पहुंचाई है.
एसजेवीएन फाउंडेशन के एसटीपीएल परियोजना चौसा के अंतर्गत संचालित और हेल्पएज इंडिया द्वारा प्रबंधित यह मोबाइल हेल्थ यूनिट सप्ताह में पांच कार्य दिवस तथा प्रथम, तृतीय और पंचम शनिवार को निर्धारित स्थानों पर पहुंचती है. यहां चिकित्सक, नर्स, सामाजिक सुरक्षा पदाधिकारी और एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता की टीम ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती है.
बुजुर्गों के घर तक पहुंच रही ‘संजीवनी’
इस सेवा की सबसे खास बात यह है कि चलकर स्वास्थ्य वाहन तक नहीं पहुंच पाने वाले बुजुर्गों और महिलाओं के घर तक भी होम विजिट के माध्यम से चिकित्सा सुविधा पहुंचाई जाती है. इसके अलावा लोगों को बीमारियों से बचाव और संतुलित दिनचर्या के लिए नियमित रूप से जागरूक किया जा रहा है.
स्वास्थ्य टीम के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित जांच और जागरूकता के अभाव में उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा, जोड़ों का दर्द और त्वचा रोग जैसी बीमारियां बड़ी संख्या में सामने आ रही हैं. ऐसे मरीजों की पहचान कर उन्हें जरूरत के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पताल में रेफर भी किया जाता है.
आंखों की जांच से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा
मोबाइल हेल्थ यूनिट के माध्यम से समय-समय पर विशेष स्वास्थ्य शिविर भी लगाए जाते हैं. इनमें नाक-कान-गला, आंख, हृदय रोग और प्रसूति विभाग के चिकित्सकों द्वारा ग्रामीणों को विशेषज्ञ परामर्श दिया जाता है. बुजुर्ग पुरुषों और महिलाओं की आंखों की जांच कर उन्हें चश्मा और जरूरत के अनुसार अन्य जरूरी उपकरण भी उपलब्ध कराए जाते हैं.
आंकड़ों के मुताबिक अब तक 3 लाख 73 हजार 528 लोगों को चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाएं दी जा चुकी हैं. इनमें 1 लाख 82 हजार 736 पुरुष और 1 लाख 90 हजार 792 महिलाएं शामिल हैं.
अकेले जून में 2763 लोगों को मिली चिकित्सा सुविधा
जून 2026 में भी ‘संजीवनी सेवा’ की गतिविधियां जारी रहीं. इस दौरान 2763 लोगों को चिकित्सकीय परामर्श एवं नि:शुल्क दवाएं दी गईं. इनमें 1558 पुरुष और 1205 महिलाएं शामिल थीं. साप्ताहिक स्वास्थ्य शिविर में 317 लोगों को चिकित्सा सेवा मिली, जबकि 249 लोगों की शुगर जांच की गई.
इस दौरान होम विजिट के जरिए उन लोगों तक भी स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाई गई, जो मोबाइल हेल्थ वाहन तक नहीं पहुंच सके. जरूरतमंद 9 लोगों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया. वहीं 12 जागरूकता शिविरों के माध्यम से उच्च रक्तचाप, शुगर, कैंसर, अस्थमा, अर्थराइटिस, एनीमिया, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जैसे विषयों पर ग्रामीणों को जागरूक किया गया.
स्वास्थ्य टीम की ओर से आयुष्मान भारत, वय वंदना योजना, आभा कार्ड, मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि गांवों में इलाज के साथ सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी लोगों तक पहुंच सके.






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