देशभर के शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' और डिजिटल लोकतंत्र पर रखे विचार ..

बदलते भारत में निर्वाचन आयोग की भूमिका, चुनावी सुधार, डिजिटल तकनीक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई. 




                             



  • कार्यक्रम के दौरान श्रेष्ठ शोध-पत्रों को मिला सम्मान. 
  • विशेषज्ञ बोले - पारदर्शी और तकनीक आधारित चुनाव व्यवस्था ही विकसित भारत की पहचान.

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : महार्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को समापन हो गया. "विकसित भारत-2047 के लिए भारत की निर्वाचन प्रणाली का पुनर्निर्माण : एक राष्ट्र, एक चुनाव एवं डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की ओर" विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने लोकतंत्र के भविष्य पर गंभीर मंथन किया.

दूसरे दिन का पहला शैक्षणिक सत्र "आधार एवं मतदाता सूची : एक राष्ट्र, एक वोट की चुनौती" विषय पर केंद्रित रहा. सत्र का संचालन डॉ. निशांत कुमार ने किया. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. विजय कुमार वर्मा, आर्य महिला पीजी कॉलेज के प्रो. विश्वनाथ मिश्र और जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय की डॉ. रजनी चौबे ने मतदाता सूची, आधार समन्वय, चुनावी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे.

दूसरे शैक्षणिक सत्र में बदलते भारत में निर्वाचन आयोग की भूमिका, चुनावी सुधार, डिजिटल तकनीक और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीक के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगी.

ऑनलाइन तकनीकी सत्र की अध्यक्षता इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने की. देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने निर्वाचन सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, लोकतांत्रिक सहभागिता और विकसित भारत-2047 से जुड़े विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए. विद्वानों ने इन शोध-पत्रों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए इसे युवा शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी मंच बताया.

समापन सत्र में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के कुलपति प्रो. संजीव कुमार मुख्य वक्ता रहे. उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीक आधारित निर्वाचन प्रणाली समय की आवश्यकता है. अध्यक्षता कर रहे प्रो. विश्वनाथ मिश्र ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को भारतीय लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया. डॉ. रजनी चौबे और प्रो. विजय कुमार वर्मा ने भी चुनाव सुधार और मतदाता जागरूकता पर अपने विचार रखे.

संगोष्ठी के दौरान श्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया. बक्सर. महार्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शनिवार को सफल समापन हो गया. "विकसित भारत-2047 के लिए भारत की निर्वाचन प्रणाली का पुनर्निर्माण : एक राष्ट्र, एक चुनाव एवं डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण की ओर" विषय पर आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर से आए शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने लोकतंत्र के भविष्य, चुनावी सुधार और डिजिटल सशक्तिकरण पर गंभीर विमर्श किया.

संगोष्ठी के दूसरे दिन विभिन्न शैक्षणिक और तकनीकी सत्रों में निर्वाचन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत लोकतांत्रिक संस्थाओं और विश्वसनीय चुनाव प्रणाली की अहम भूमिका होगी.

आधार और मतदाता सूची के समन्वय पर विशेषज्ञों ने रखे ठोस सुझाव

दूसरे दिन के पहले शैक्षणिक सत्र का विषय "आधार एवं मतदाता सूची : एक राष्ट्र, एक वोट की चुनौती" रहा. सत्र का संचालन डॉ. निशांत कुमार ने किया. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. विजय कुमार वर्मा, आर्य महिला पीजी कॉलेज के प्रो. विश्वनाथ मिश्र और जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय की डॉ. रजनी चौबे ने मतदाता सूची, आधार के समन्वय, चुनावी पारदर्शिता, मतदाता पहचान की विश्वसनीयता और लोकतांत्रिक जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए.


निर्वाचन आयोग की भूमिका और डिजिटल चुनावी सुधारों पर हुई गहन चर्चा

दूसरे शैक्षणिक सत्र में बदलते भारत में निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका, चुनावी सुधार, डिजिटल तकनीकों के उपयोग और लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि तकनीक के बेहतर उपयोग से चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है.

देशभर के शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध-पत्र, विद्वानों ने की सराहना

ऑनलाइन तकनीकी सत्र की अध्यक्षता इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने की. देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने निर्वाचन सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, लोकतांत्रिक सहभागिता, सुशासन और विकसित भारत-2047 से जुड़े विषयों पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए. विशेषज्ञों ने शोध-पत्रों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए इसे युवा शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक मंच बताया.

समापन सत्र में विशेषज्ञों ने तकनीक आधारित पारदर्शी चुनाव व्यवस्था पर दिया जोर

समापन सत्र में महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के कुलपति प्रो. संजीव कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीक आधारित निर्वाचन प्रणाली समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. अध्यक्षता कर रहे प्रो. विश्वनाथ मिश्र ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' और डिजिटल लोकतांत्रिक सशक्तिकरण को भारतीय लोकतंत्र के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया. डॉ. रजनी चौबे और प्रो. विजय कुमार वर्मा ने भी चुनाव सुधार, मतदाता जागरूकता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने पर अपने विचार रखे.

श्रेष्ठ शोध-पत्रों को मिला सम्मान, युवा शोधकर्ताओं का बढ़ा उत्साह

समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया. प्रथम पुरस्कार आर्यन शंकर पाठक को मिला. द्वितीय पुरस्कार संयुक्त रूप से गर्व दुबे और अविनाश कुमार वर्मा को प्रदान किया गया, जबकि तृतीय पुरस्कार कंचन कुमार को मिला. सभी विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया.


डॉ. अरविंद वर्मा के नेतृत्व और प्राचार्य के मार्गदर्शन में आयोजन बना राष्ट्रीय स्तर पर सफल


राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद वर्मा ने आयोजन की सफलता का श्रेय सभी प्रतिभागियों और आयोजन समिति को दिया. महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय आयोजन विद्यार्थियों और शोधार्थियों में शोध संस्कृति, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को नई दिशा देते हैं. कार्यक्रम का संचालन आयोजन सचिव डॉ. आलोक चतुर्वेदी ने किया, जबकि अंत में डॉ. अवनीश कुमार पाण्डेय ने सभी अतिथियों, विद्वानों, प्रतिभागियों, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, आयोजन समिति और महाविद्यालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया. संगोष्ठी के सफल आयोजन में महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही. आयोजन को विकसित भारत-2047 के संदर्भ में चुनावी सुधार और डिजिटल लोकतंत्र पर राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण अकादमिक विमर्श के रूप में सराहा गया.













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