खुश रहना भी एक विज्ञान है! बक्सर में लॉन्च हुई ऐसी किताब, जो जिंदगी देखने का नजरिया बदलने का करती है दावा ..

कार्यक्रम में पुस्तक के विषय को लेकर गंभीर चर्चा हुई और वक्ताओं ने अपने अनुभवों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि जीवन की तमाम चुनौतियों के बीच भी इंसान किस तरह सकारात्मक सोच के साथ आनंदपूर्ण जीवन जी सकता है.





                             


  • - ‘सतत खुश रहने का विज्ञान’ के विमोचन में जुटे शहर के प्रबुद्ध लोग, बोले- भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे जरूरी है सकारात्मक सोच
  • - अवधेश कुमार ने बताए आनंदपूर्ण जीवन के सूत्र, डॉ. महेंद्र प्रसाद ने कहा- किताब के मूल मंत्र को अधिकतम लोगों तक पहुंचाने की जरूरत

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : जिंदगी में हर कोई खुश रहना चाहता है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर लगातार खुश कैसे रहा जाए? क्या खुशी केवल अच्छे हालात मिलने से आती है या फिर इसे अपने नजरिए और सोच से भी हासिल किया जा सकता है? इसी सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश करती है भरत प्रसाद की तीसरी पुस्तक ‘सतत खुश रहने का विज्ञान’, जिसका शनिवार को बक्सर के रेड क्रॉस सोसाइटी भवन में भव्य विमोचन किया गया.

पुस्तक विमोचन समारोह में शहर के प्रबुद्ध, बुद्धिजीवी और साहित्य से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही. कार्यक्रम में पुस्तक के विषय को लेकर गंभीर चर्चा हुई और वक्ताओं ने अपने अनुभवों के जरिए यह बताने की कोशिश की कि जीवन की तमाम चुनौतियों के बीच भी इंसान किस तरह सकारात्मक सोच के साथ आनंदपूर्ण जीवन जी सकता है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा के 1998 बैच के वरिष्ठ अधिकारी अवधेश कुमार ने की. उन्होंने कहा कि जिंदगी में खुश रहने के लिए परिस्थितियों के हमेशा अपने पक्ष में होने का इंतजार नहीं किया जा सकता. इंसान को अपने दृष्टिकोण और सोच में बदलाव लाकर विपरीत परिस्थितियों में भी आनंद तलाशना सीखना चाहिए. उन्होंने उपस्थित लोगों के साथ आनंदपूर्ण जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए.

हर पड़ाव पर खुश रहने का रास्ता दिखाती है किताब

लेखक भरत प्रसाद के अनुसार ‘सतत खुश रहने का विज्ञान’ महज एक पुस्तक नहीं, बल्कि आनंदपूर्ण जीवन जीने की दिशा में एक मार्गदर्शिका के रूप में लिखी गई है. इसमें जीवन के अलग-अलग पड़ावों में आने वाली परिस्थितियों के बीच सकारात्मक बने रहने और जीवन में खुशी तलाशने के तरीकों पर चर्चा की गई है.

लेखक का दावा है कि पुस्तक के अध्ययन से पाठक के भीतर सकारात्मक सोच का संचार हो सकता है और वह अपने जीवन को अधिक आनंदमय बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. पुस्तक में जीवन को देखने के नजरिए और सोच में बदलाव को खुशहाल जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है.

करीब 30 वक्ताओं ने साझा किए विचार, माहौल हुआ आनंदमय

समारोह का संचालन धीरज पांडेय ने किया. इस दौरान वर्षा पांडेय डॉ महेंद्र प्रसाद, डॉ वेद प्रकाश राय, रविंद्र सिंह, सरोज सिंह, डॉ शशांक शेखर, जितेंद्र मिश्र, संजीव ओझा, प्रदीप कुमार ओझा, टीएन चौबे, गणेश उपाध्याय, धनु लाल "प्रेमातुर" और सुरेंद्र सिंह सहित करीब 30 वक्ताओं ने अपने विचार रखे.

वक्ताओं ने कहा कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, प्रतिस्पर्धा और भागदौड़ के बीच लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि जीवन का असली उद्देश्य केवल उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि उन उपलब्धियों के बीच संतुष्टि और खुशी महसूस करना भी है. ऐसे समय में सकारात्मक सोच और आनंदपूर्ण जीवन के सूत्रों पर आधारित यह पुस्तक लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.

‘किताब पढ़िए और फिर दोबारा बैठिए’

कार्यक्रम में डॉ. महेंद्र प्रसाद ने पुस्तक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने सुझाव दिया कि पुस्तक के अध्ययन के बाद कुछ समय बीतने पर एक बार फिर विचार गोष्ठी आयोजित की जाए, जिसमें पाठक पुस्तक में बताए गए सूत्रों को अपने जीवन में उतारने के अनुभव साझा करें.

उन्होंने कहा कि यदि पुस्तक में बताए गए मूल मंत्र लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल होते हैं, तो इसे समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए.

पुस्तक विमोचन समारोह में एक बात लगातार उभरकर सामने आई कि खुशी किसी मंजिल का नाम नहीं, बल्कि जिंदगी जीने का तरीका है. यही संदेश लेकर आई ‘सतत खुश रहने का विज्ञान’ ने बक्सर के बुद्धिजीवी समाज के बीच अपनी पहली दस्तक दी. समारोह में हुए विचार-विमर्श ने इसे महज पुस्तक विमोचन से आगे बढ़ाकर सकारात्मक सोच और आनंदपूर्ण जीवन की दिशा में संवाद का मंच बना दिया.













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