जल-जीवन-हरियाली पर चला बुलडोजर? मुरार में सार्वजनिक कुएं पर निर्माण से भड़का विवाद ..

निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों ने पहले रोक लगाई थी और निर्माण एजेंसी को फटकार भी लगाई थी. इसके बावजूद अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर रात के अंधेरे में निर्माण कराया जा रहा है. 




                             


- शिव मंदिर के समीप स्थित कुएं को बचाने की मांग, मुखिया ने अपर समाहर्ता से लगाई गुहार

- रात के अंधेरे में निर्माण कराने का आरोप, गुणवत्ता और अनियमितता पर भी उठे सवाल

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना के तहत कुएं, तालाब और पोखरों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन पर जोर दिया जा रहा है. लेकिन चौगाईं प्रखंड की मुरार पंचायत में पंचायत सचिव आवास निर्माण को लेकर उठे विवाद ने इस योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि सार्वजनिक कुएं को ध्वस्त कर उसके ऊपर निर्माण कराने की कोशिश की जा रही है, जबकि वैकल्पिक सरकारी भूमि उपलब्ध है.

पंचायत सरकार भवन का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन अब पंचायत सचिव आवास के निर्माण को लेकर गांव में विरोध शुरू हो गया है. मुखिया, सरपंच, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि शिव मंदिर के समीप स्थित सार्वजनिक कुआं वर्षों पुराना है और इससे लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है. पूजा-पाठ के साथ-साथ यह जल संरक्षण का भी महत्वपूर्ण स्रोत है. ऐसे में इसे सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

सरकारी अभिलेख में दूसरी भूमि का उल्लेख होने का दावा

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार ने पंचायत सचिव आवास निर्माण के लिए खाता संख्या-565, खेसरा संख्या-1217 की 17 डी. परती भूमि का उल्लेख किया है, जो विवादित भी नहीं है. इसके बावजूद सार्वजनिक कुएं वाले स्थल पर निर्माण कराने का प्रयास किया जा रहा है. लोगों का आरोप है कि इससे गांव का माहौल तनावपूर्ण बनाने की कोशिश हो रही है.

अधिकारियों की रोक के बावजूद निर्माण का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार मंदिर के समीप निर्माण कार्य को लेकर अधिकारियों ने पहले रोक लगाई थी और निर्माण एजेंसी को फटकार भी लगाई थी. इसके बावजूद अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर रात के अंधेरे में निर्माण कराया जा रहा है. लोगों का आरोप है कि जेसीबी से सार्वजनिक कुएं को ध्वस्त कर उसके ऊपर निर्माण करने का प्रयास किया गया, जो जल-जीवन-हरियाली योजना की भावना के विपरीत है.

ढाई करोड़ की परियोजना की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

करीब ढाई करोड़ रुपये की लागत से बन रहे पंचायत सचिव आवास निर्माण की गुणवत्ता और अनियमितता को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि बिना किसी अधिकारी की मौजूदगी के रात में निर्माण कार्य कराया जाना कई सवाल खड़े करता है. पंचायत के मुखिया, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.

अपर समाहर्ता से लगाई रोक की गुहार

मुखिया ने अपर समाहर्ता को आवेदन देकर सार्वजनिक कुएं को बचाने तथा निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले में वरीय अधिकारियों को भी आवेदन देकर आपत्ति दर्ज कराई गई है. अधिकारियों ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका आरोप है कि न्यायालय में मामला लंबित होने और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बावजूद निर्माण कार्य जारी है.

डीडीसी बोलीं- मामला संज्ञान में है

इस मामले में उप विकास आयुक्त निहारिका छवि से बात करने पर उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है. उन्होंने डुमरांव एसडीएम को स्थल निरीक्षण करने और रिपोर्ट देने के लिए कहा है. एसडीएम ने स्थल निरीक्षण भी कर लिया है. ज्यादा जानकारी के लिए एसडीएम से बात की जा सकती है.

वहीं एसडीएम के सरकारी नंबर पर फोन किया गया, लेकिन फोन नहीं उठाने के कारण उनका पक्ष ज्ञात नहीं हो सका.

बीडीओ ने कहा- वरीय अधिकारी देख रहे हैं मामला

दूसरी तरफ प्रखंड विकास पदाधिकारी ने इस मामले से सीधे-सीधे पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मामला पदाधिकारी के संज्ञान में है. ऐसे में वह मामले में कुछ नहीं बता सकतीं.

ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

बहरहाल, ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी जल-जीवन-हरियाली योजना की ऐसी दुर्दशा और अधिकारियों की ऐसी सुस्ती देखने के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि सरकार चाहे लाख योजनाएं बनाए, लेकिन अधिकारियों की मनमानी के आगे कुछ भी नहीं होने वाला. ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सार्वजनिक कुएं को बचाने तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है.













Post a Comment

0 Comments