इतिहास की धरती चौसा को अब पर्यटन की नई उड़ान, मंत्री के सामने रखा विकास का पूरा प्लान ..

कहा कि अगर इन योजनाओं को मंजूरी मिलती है तो चौसा के ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. इससे चौसा को ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की राह आसान होगी.


 





                             



- 1539 की ऐतिहासिक जंग के मैदान को संवारने की पहल, शेरशाह-हुमायूं की लड़ाई वाली जमीन बनेगी पर्यटन केंद्र
- स्वागत द्वार, सड़क, नाला और स्ट्रीट लाइट की मांग, विकास हुआ तो स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के रास्ते

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इतिहास के पन्नों में दर्ज चौसा अब पर्यटन के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी में है. जिस धरती पर 26 जून 1539 को शेरशाह सूरी और मुगल सम्राट हुमायूं के बीच निर्णायक युद्ध हुआ था, उसी ऐतिहासिक युद्धभूमि को विकसित करने की मांग अब सरकार के सामने जोरदार तरीके से रखी गई है. नगर पंचायत चौसा की चेयरमैन किरण देवी के प्रतिनिधि डॉ. मनोज कुमार यादव ने बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री से मुलाकात कर चौसा के ऐतिहासिक युद्धस्थल के समग्र विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर मांगपत्र सौंपा.

इतिहास को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी

मांगपत्र में कहा गया है कि चौसा का ऐतिहासिक युद्धस्थल भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है, लेकिन आज भी यह स्थल अपेक्षित सुविधाओं और पर्यटन विकास से दूर है. ऐसे में यहां बुनियादी सुविधाओं के साथ पर्यटन केंद्र के रूप में विकास किया जाना जरूरी है. मांगपत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा चौसा के युद्धस्थल के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर की गई घोषणा का भी उल्लेख किया गया है. इसे जल्द धरातल पर उतारने की मांग की गई है.

स्वागत द्वार से जगमगाएगा ऐतिहासिक रास्ता

डॉ. मनोज कुमार यादव ने चौसा बारे मोड़ पर भव्य शेरशाह स्वागत द्वार बनाने की मांग रखी. इसके अलावा शेरशाह गढ़ से कर्मनाशा नदी तक सड़क निर्माण, बारे मोड़ से शेरशाह गढ़ तक नाला निर्माण और पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइट लगाने का प्रस्ताव दिया गया.

उन्होंने कहा कि अगर इन योजनाओं को मंजूरी मिलती है तो चौसा के ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. इससे चौसा को ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की राह आसान होगी.

पर्यटन बढ़ा तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा सहारा

डॉ. यादव ने कहा कि चौसा की ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने पर सिर्फ इलाके की पहचान ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कारोबार के नए अवसर भी पैदा होंगे. होटल, दुकान, परिवहन और अन्य छोटे कारोबारों को भी इसका फायदा मिल सकता है. उन्होंने पर्यटन मंत्री से मांग की कि चौसा की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए विकास योजनाओं को जल्द स्वीकृति देकर जमीन पर उतारा जाए.












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