एक साल तक चार्जशीट दबाकर रखने पर अदालत सख्त, जांच अधिकारी पर जुर्माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा ..

साथ ही पटना हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए आदेश दिया कि यह राशि जांच अधिकारी के वेतन से काटकर 15 दिनों के भीतर बक्सर सिविल कोर्ट के नजारत में जमा कराई जाए.





                             



  • पॉक्सो कोर्ट ने जताई नाराजगी, एसपी को वेतन से राशि काटकर जमा कराने का दिया निर्देश
  • कहा- जांच पूरी होने के तीन दिन के भीतर दाखिल होनी चाहिए थी चार्जशीट, देरी से न्यायिक प्रक्रिया हुई प्रभावित

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : पॉक्सो के तीन मामलों में चार्जशीट दाखिल करने में एक वर्ष से अधिक की देरी पर बक्सर की विशेष पॉक्सो अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने जांच अधिकारी पर 3000 रुपये का सांकेतिक स्थगन शुल्क लगाया है और उसकी वसूली वेतन से करने का निर्देश दिया है. साथ ही जांच अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पॉक्सो मामलों में जांच अधिकारी गुड्डी कुमारी ने जांच पूरी होने के बाद भी चार्जशीट एक वर्ष से अधिक समय तक अपने पास रखी. बिना किसी उचित कारण के हुई इस देरी से मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई.

विशेष लोक अभियोजक ने भी जताई थी आपत्ति

अदालत ने उल्लेख किया कि विशेष लोक अभियोजक ने भी चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी पर आपत्ति दर्ज कराई थी. न्यायालय ने माना कि कानून के अनुसार जांच पूरी होने के तीन दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और देरी का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण भी नहीं दिया गया.

वेतन से होगी जुर्माने की वसूली

न्यायालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 346 का हवाला देते हुए तीन मामलों में प्रत्येक में 1000 रुपये (कुल 3000 रुपयों) का सांकेतिक स्थगन शुल्क लगाया. साथ ही पटना हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए आदेश दिया कि यह राशि जांच अधिकारी के वेतन से काटकर 15 दिनों के भीतर बक्सर सिविल कोर्ट के नजारत में जमा कराई जाए.

एसपी को अनुपालन सुनिश्चित कराने का आदेश

अदालत ने बक्सर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें और कार्रवाई प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करें. साथ ही जांच अधिकारी के आचरण को कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के आदेशों की अवहेलना मानते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है. मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है.












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