वर्ष 2021 तक परिवादी 52,011 रुपये जमा कर चुके थे और करीब 8 हजार रुपये बकाया थे. इसी बीच उनके मोबाइल पर बैंक का संदेश आया कि ऋण खाते का पुनर्निर्धारण कर आगामी दो वर्षों के लिए 1,457 रुपये प्रतिमाह की नई किस्त तय कर दी गई है.
- वाहन ऋण का खाता दोबारा निर्धारित कर बढ़ा दिया था भुगतान, आयोग ने माना सेवा में घोर त्रुटि.
- दो माह में भुगतान नहीं करने पर 8 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा.
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : बिना उपभोक्ता की जानकारी के वाहन ऋण खाते का पुनर्निर्धारण कर किस्तों का बोझ बढ़ाना एचडीएफसी को भारी पड़ गया. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने इसे सेवा में घोर त्रुटि मानते हुए एचडीएफसी के खिलाफ फैसला सुनाया है. आयोग ने उपभोक्ता को 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है.
यह मामला परिवाद पत्र संख्या 3/2022 से संबंधित है. परिवादी के अधिवक्ता डॉ. विष्णुदत्त द्विवेदी ने बताया कि ब्रह्मपुर निवासी दिलीप कुमार, पिता स्वर्गीय शंभू प्रसाद ने होंडा एक्टिवा 5जी खरीदने के लिए एचडीएफसी से 60,839 रुपये का वाहन ऋण लिया था. ऋण समझौते के अनुसार उन्हें हर माह 5,779 रुपये की किस्त जमा करनी थी.
52 हजार रुपये जमा करने के बाद आया चौंकाने वाला संदेश
बताया गया कि वर्ष 2021 तक परिवादी 52,011 रुपये जमा कर चुके थे और करीब 8 हजार रुपये बकाया थे. इसी बीच उनके मोबाइल पर बैंक का संदेश आया कि ऋण खाते का पुनर्निर्धारण कर आगामी दो वर्षों के लिए 1,457 रुपये प्रतिमाह की नई किस्त तय कर दी गई है. इससे कुल भुगतान की राशि 20 हजार रुपये से अधिक बढ़ गई. परिवादी का आरोप था कि यह बदलाव उनकी जानकारी और सहमति के बिना किया गया.
उपभोक्ता आयोग की शरण में पहुंचा मामला
मामले को लेकर परिवादी ने जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया. सुनवाई के दौरान आयोग ने एचडीएफसी की ओर से सेवा में घोर त्रुटि पाई.
आयोग ने सुनाया क्षतिपूर्ति का आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह एवं सदस्य राजीव सिंह की खंडपीठ ने एचडीएफसी को परिवादी को 25 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया.
देरी पर देना होगा ब्याज भी
आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि यदि दो माह के भीतर राशि का भुगतान नहीं किया गया तो विपक्षी को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा.





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