महिलाएं, किसान, शिक्षक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक ओवरब्रिज पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक रेलवे क्रॉसिंग को आम जनता के लिए खोला जाना चाहिए.
- क्षतिग्रस्त ओवरब्रिज और बंद रेलवे क्रॉसिंग से बढ़ी मुश्किलें, हजारों लोग जान जोखिम में डालकर पार कर रहे रेलवे ट्रैक
- आंदोलनकारियों की चेतावनी- जल्द नहीं खुला रास्ता तो रेल चक्का जाम, आमरण अनशन और जेल भरो आंदोलन होगा
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग को खोलने की मांग को लेकर शुरू हुआ जन आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में लोग अनिश्चितकालीन धरने पर डटे रहे और रेलवे तथा जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई. आंदोलनकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त रेल ओवरब्रिज के बंद होने के बाद रेलवे क्रॉसिंग भी बंद कर दी गई है, जिससे हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है. मजबूरी में लोग रेलवे ट्रैक पार कर रहे हैं और हर पल हादसे का खतरा बना हुआ है. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो रेल चक्का जाम, आमरण अनशन और जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा.
धरना स्थल पर सरोज राजभर के नेतृत्व में महिलाएं, किसान, शिक्षक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक ओवरब्रिज पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक रेलवे क्रॉसिंग को आम जनता के लिए खोला जाना चाहिए.
रेलवे ट्रैक पार करना बनी मजबूरी
धरनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि वैकल्पिक मार्ग लंबा और बेहद कठिन है. दोपहिया वाहन किसी तरह निकल जाते हैं, लेकिन पैदल चलने वाले, बुजुर्ग, स्कूली बच्चे और महिलाएं जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि यदि कोई दुर्घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे और जिला प्रशासन की होगी.
सरोज राजभर बोले- जनता की अनदेखी हुई तो होगा रेल चक्का जाम
धरने का नेतृत्व कर रहे सरोज राजभर ने कहा कि जनता की मांग पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल आश्वासन दे रहा है, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो रही है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र करते हुए रेल चक्का जाम किया जाएगा.
किसानों, विद्यार्थियों और मरीजों की बढ़ी परेशानी
धरना में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि इस मार्ग से आसपास के सैकड़ों गांव जुड़े हैं. खाद-बीज ले जाने वाले किसानों, विद्यालय और महाविद्यालय जाने वाले विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों को सबसे अधिक कठिनाई हो रही है. उनका कहना है कि लंबा वैकल्पिक रास्ता व्यवहारिक नहीं है और लोगों का समय तथा पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है.
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने सांसद और विधायक सहित जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि चुनाव के समय जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि अब इस गंभीर समस्या पर मौन हैं. लोगों ने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि आगे नहीं आए तो जनता चुनाव में इसका जवाब देगी.
महिलाओं ने जताई सुरक्षा की चिंता
धरने में शामिल महिलाओं ने कहा कि गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए रेलवे ट्रैक पार करना बेहद खतरनाक हो गया है. उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल रेलवे क्रॉसिंग खोलने की मांग की, ताकि लोगों को राहत मिल सके.
ओवरब्रिज चालू होने तक खोलने की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांग स्थायी रूप से रेलवे क्रॉसिंग खुलवाने की नहीं है. वे केवल इतना चाहते हैं कि जब तक क्षतिग्रस्त ओवरब्रिज पूरी तरह चालू नहीं हो जाता, तब तक आम जनता की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए रेलवे क्रॉसिंग खोल दी जाए.
अनिश्चितकालीन धरना रहेगा जारी
धरना में सरोज राजभर, रामचीज प्रजापति, जेपी यादव, हरदेव राम, रमेश कुमार राजभर, रमाकांत चंद्रवंशी, राम एकबाल ठाकुर, कृष्णावती देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, महिलाएं, शिक्षक, पत्रकार और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे. आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक रेलवे क्रॉसिंग नहीं खोली जाएगी, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा.
वीडियो :





.png)









0 Comments