गोष्ठी में स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली, उसके अधिकार क्षेत्र और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी गई. साथ ही लोगों से इस व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई.

- जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों का होगा आपसी सहमति से निपटारा
- बिजली, पानी, बैंक, बीमा, अस्पताल, परिवहन और शिक्षा से जुड़े मामलों पर मिलेगी राहत
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : आम लोगों को बिना कोर्ट फीस के त्वरित और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुधवार को बक्सर व्यवहार न्यायालय परिसर स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार में विशेष गोष्ठी आयोजित की गई. गोष्ठी में स्थायी लोक अदालत की कार्यप्रणाली, उसके अधिकार क्षेत्र और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी गई. साथ ही लोगों से इस व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई.
कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष प्रवीण कुमार सिंह श्रीनेत, सदस्य माधव राय एवं सुनील कुमार सिन्हा ने बताया कि स्थायी लोक अदालत जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवादों के समाधान का प्रभावी मंच है. यहां मामलों का निपटारा आपसी सहमति और सरल प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है, जिससे लोगों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है.
इन मामलों की सुनवाई स्थायी लोक अदालत में
गोष्ठी में बताया गया कि बिजली और पानी की आपूर्ति, सार्वजनिक परिवहन, डाक सेवा, बीएसएनएल की सेवाएं, अस्पतालों द्वारा अधिक शुल्क वसूली, शिक्षा संस्थानों से जुड़े विवाद, बैंक ऋण, नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां, बीमा दावे, आवास एवं रियल एस्टेट, वाटर और होल्डिंग टैक्स, सार्वजनिक स्वच्छता तथा वन एवं वन्य जीवन विभाग से जुड़े मामलों का समाधान स्थायी लोक अदालत के माध्यम से कराया जा सकता है.
प्री-लिटिगेशन मामलों पर भी रहेगा विशेष फोकस
बैठक में यह भी बताया गया कि अदालत में मुकदमा दर्ज होने से पहले के विवादों, विशेषकर मोटर वाहन दुर्घटना मुआवजा (एमएसीटी) और विभिन्न ऋण संबंधी मामलों को भी प्री-लिटिगेशन स्तर पर आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास किया जाएगा. इससे समय और धन दोनों की बचत होगी तथा अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा.
सचिव ने लोगों से लाभ उठाने की अपील की
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव नेहा दयाल ने कहा कि स्थायी लोक अदालत आम नागरिकों के लिए निःशुल्क, सुलभ और प्रभावी न्याय का मंच है. उन्होंने लोगों से अपील की कि जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े विवाद होने पर इस व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराएं.




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