कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल मंदिरों का संरक्षण नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों को मजबूत करना भी है.

- रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में संगठन विस्तार, मंदिर संरक्षण और वैदिक शिक्षा को लेकर हुआ मंथन
- सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाने का लिया गया संकल्प
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर. सिद्धाश्रम की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में रविवार को एक अहम पहल हुई. रामेश्वरनाथ मंदिर परिसर में सिद्धाश्रम विकास परिषद की पहली सार्वजनिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन के विस्तार, पौराणिक मंदिरों के संरक्षण, वैदिक शिक्षा के प्रचार-प्रसार और सनातन संस्कृति के संवर्धन को लेकर व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई. बैठक की अध्यक्षता नागेंद्र प्रसाद ने की.
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सिद्धाश्रम की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा और ऐतिहासिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है. इसलिए यहां स्थित प्राचीन मंदिरों का संरक्षण और उनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के लिए वैदिक शिक्षा और भारतीय जीवन मूल्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा.
गांव-गांव तक पहुंचेगा परिषद का अभियान
बैठक में परिषद की संगठनात्मक मजबूती पर भी विस्तार से चर्चा हुई. निर्णय लिया गया कि संगठन का विस्तार गांव-गांव तक किया जाएगा ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सके. परिषद सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से जनजागरण अभियान चलाएगी तथा लोगों को अपनी धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगी.
सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता पर जोर
उपस्थित सदस्यों ने कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल मंदिरों का संरक्षण नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों को मजबूत करना भी है. सभी सदस्यों ने परिषद के उद्देश्यों को जन-जन तक पहुंचाने और धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया.
अनेक गणमान्य लोग रहे मौजूद
बैठक में संजय कुमार ओझा, अवधेश कुमार पाण्डेय, राकेश रंजन दुबे, विनोद उपाध्याय, राघव कुमार पाण्डेय, पंकज उपाध्याय, दिनेश कुमार उपाध्याय, अग्नि कुमार पाण्डेय, राहुल कुमार चौबे, धर्मेंद्र तिवारी, नित्यानंद चौबे, मिथलेश कुमार, अजय कुमार वर्मा, अभय कुमार पाण्डेय, इंद्रजीत चौबे, आशुतोष चतुर्वेदी, गणेश कुमार पाण्डेय सहित परिषद के अनेक सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
बैठक के अंत में परिषद ने एक स्वर में संकल्प दोहराया कि सिद्धाश्रम की पौराणिक पहचान, सनातन संस्कृति और वैदिक परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जनसहभागिता के साथ लगातार अभियान चलाया जाएगा.





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