चार महीने से सड़क बनी ‘खतरे की राह’, नल का पानी भी नहीं आया! गड्ढों में गिर रहे ग्रामीण, विभाग बोला- जांच पूरी नहीं ..

ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पाइपलाइन का काम पूरा होते ही सड़क को दुरुस्त कर दिया जाएगा. लेकिन काम खत्म होने के बाद सड़क को उसी हालत में छोड़ दिया गया. 





                             


- सात निश्चय पार्ट-2 के नाम पर सड़क खोदी, काम अधूरा छोड़ भूला विभाग; महिलाओं और स्कूली बच्चों की बढ़ी मुसीबत

- नियम कहता है 24 घंटे में सड़क मोटरेबल और 7 दिन में पूर्ववत करें, दुबौली में चार महीने बाद भी इंतजार; ग्रामीण अब मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत

बक्सर टॉप न्यूज, बक्सर : विकास के नाम पर सड़क खोदी गई, उम्मीद थी कि घर-घर नल का पानी पहुंचेगा और गांव की तस्वीर बदलेगी. लेकिन चार महीने गुजर गए, न पानी पहुंचा और न सड़क वापस बनी. अब यही टूटी सड़क दुबौली गांव के लोगों के लिए रोजाना हादसे का खतरा बन गई है. जगह-जगह बने गड्ढों में गिरकर ग्रामीण दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और जिम्मेदार विभाग पाइपलाइन की जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है.

मामला सदर प्रखंड की छोटका नुआंव पंचायत के दुबौली गांव का है. सात निश्चय पार्ट-2 के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने के लिए गांव की सड़क खोदकर पाइपलाइन बिछाई गई. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पाइपलाइन का काम पूरा होते ही सड़क को दुरुस्त कर दिया जाएगा. लेकिन काम खत्म होने के बाद सड़क को उसी हालत में छोड़ दिया गया. चार महीने से सड़क पर बने गड्ढे ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहे हैं.

बच्चों के स्कूल जाने से लेकर रोजमर्रा की आवाजाही तक मुश्किल

टूटी सड़क ने गांव की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित कर दी है. सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है. बच्चों को स्कूल जाने के दौरान गड्ढों से बचकर निकलना पड़ता है. वहीं महिलाओं और बुजुर्गों के लिए पैदल चलना भी चुनौती बन गया है. दोपहिया वाहन से गुजरने वाले लोगों को भी हर कदम पर दुर्घटना का डर सताता है.

बारिश के बाद सड़क के गड्ढों में पानी जमा होने से खतरा और बढ़ गया है. पानी भरने के कारण गड्ढों की गहराई का अंदाजा नहीं लग पाता और वाहन चालक दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना से सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वही योजना अब उनके लिए परेशानी का कारण बन गई है.

नियम 7 दिन का, इंतजार 4 महीने का!

ग्रामीणों ने विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियम के अनुसार सड़क खोदने के बाद उसे 24 घंटे के भीतर मोटरेबल स्थिति में कर देना चाहिए. वहीं अधिकतम सात दिनों में सड़क को पूर्ववत किया जाना चाहिए. लेकिन दुबौली में चार महीने बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं हुई है.

पूर्व बीडीसी अरुण कुमार ने कहा कि इस समस्या को लेकर कई बार विभागीय अभियंताओं से बात की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला. उन्होंने कहा कि ग्रामीण लगातार परेशानी झेल रहे हैं. यदि जल्द सड़क नहीं बनाई गई तो मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा.

‘पहले पाइपलाइन की जांच, फिर बनेगी सड़क’

इस मामले में कनीय अभियंता भीन कुमार ने कहा कि तोड़ी गई सड़क को तब तक नहीं बनाया जा सकता, जब तक बिछाई गई पाइपलाइन की बेहतर ढंग से जांच नहीं कर ली जाती. जैसे ही वॉटर पाइपलाइन की जांच का काम पूरा होगा, सड़क को बना दिया जाएगा.

अब ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि चार महीने में जब सड़क नहीं बनी तो सात दिन का नियम आखिर किसके लिए है? फिलहाल दुबौली के लोग टूटी सड़क, गड्ढों और हादसे के खतरे के बीच विभाग की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.













Post a Comment

0 Comments