कहा कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है तथा सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की है.

- आप ने शिक्षा व्यवस्था और केन-बेतवा परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
- जिला प्रवक्ता शुभम् उपाध्याय बोले- संवाद और संवेदनशीलता से ही निकल सकता है जन आंदोलनों का समाधान
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : आम आदमी पार्टी (आप) बक्सर ने देश में चल रहे दो अलग-अलग जन आंदोलनों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी के जिला प्रवक्ता शुभम् उपाध्याय ने कहा कि दोनों आंदोलनों की पृष्ठभूमि अलग है, लेकिन इनसे एक बड़ा सवाल सामने आता है कि क्या जनता की आवाज़ समय रहते सुनी जाएगी या उन्हें अपनी मांगों के लिए भूख हड़ताल और लंबे आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा.
जारी प्रेस विज्ञप्ति में शुभम् उपाध्याय ने कहा कि एक ओर शिक्षाविद एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं. उन्होंने कहा कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है तथा सरकार से बातचीत कर समाधान निकालने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि दूसरी ओर मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी और ग्रामीण परिवार भूमि अधिग्रहण, उचित मुआवज़ा और पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं. प्रदर्शन के दौरान महिलाओं द्वारा किए गए प्रतीकात्मक "चिता आंदोलन" ने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया है. आंदोलनकारियों का आरोप है कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक उचित मुआवज़ा और पुनर्वास नहीं मिला है.
आप प्रवक्ता ने कहा कि दोनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि जब नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबे समय तक धरना और भूख हड़ताल करने को मजबूर हो जाते हैं, तब शासन-प्रशासन को संवाद, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
शुभम् उपाध्याय ने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में समाज का हर वर्ग किसी न किसी समस्या से जूझ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलनों को टकराव के बजाय संवाद के माध्यम से सुलझाने की दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान हो सके.




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