कहा कि रेलवे प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि रेलवे क्रॉसिंग बंद ही रखी गई तो लोग मजबूरी में रेलवे ट्रैक पार करेंगे, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहेगी.

- -तीसरे दिन भी धरने पर डटे रहे आंदोलनकारी. बोले- गुमटी नहीं खुली तो रेलवे ट्रैक पर बैठेंगे
- अशोक कुमार सिंह से लेकर भूतपूर्व सूबेदार लाल बिहारी प्रसाद तक ने उठाई आवाज. महिलाओं ने कहा- अब आर-पार की लड़ाई होगी
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : "रेलवे क्रॉसिंग को जिस तरह बंद किया गया है, उसे देखकर लगता है जैसे हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बॉर्डर बना दिया गया हो." धरना स्थल पर मौजूद महिला आंदोलनकारी आरती कुमारी की यह टिप्पणी तीसरे दिन के आंदोलन का सबसे चर्चित बयान बन गई. इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग खोलने की मांग को लेकर चल रहे अनिश्चितकालीन धरने में शुक्रवार को भी बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि जुटे. सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि शनिवार तक रेलवे क्रॉसिंग नहीं खोली गई तो रेल रोको आंदोलन किया जाएगा.
धरना स्थल पर मौजूद धनसोई निवासी अशोक कुमार सिंह ने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के बाद लोगों को पांडे पट्टी होकर लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है. सड़क खराब है, अक्सर जाम लगता है और आम लोगों को काफी परेशानी हो रही है. उन्होंने कहा कि वह आंदोलन को पूरा समर्थन देते हैं.
तीसरे दिन भी नहीं पहुंचे अधिकारी
आंदोलनकारी हीरालाल पासवान ने कहा कि तीन दिन बीत गए, लेकिन न रेलवे का कोई अधिकारी और न ही जिला प्रशासन का कोई प्रतिनिधि धरना स्थल पर पहुंचा. उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की बात नहीं सुनी जाएगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. उनका आरोप था कि ओवरब्रिज भी बंद है और रेलवे क्रॉसिंग भी बंद कर दी गई है, जिससे जनता दोहरी मार झेल रही है.
सरोज राजभर ने दी रेल रोको की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सरोज राजभर ने कहा कि लगातार तीन दिनों से लोग चिलचिलाती धूप में धरने पर बैठे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं हुई. उन्होंने कहा कि यदि शनिवार तक समाधान नहीं निकला तो रेलवे ट्रैक पर बैठकर रेल रोको आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने जनप्रतिनिधियों से भी आगे आकर जनता की समस्या का समाधान कराने की अपील की.
रामाकांत चंद्रवंशी ने जनप्रतिनिधियों पर उठाए सवाल
दलित, अति पिछड़ा संगठन के प्रखंड अध्यक्ष रामाकांत चंद्रवंशी ने कहा कि जनता ने सांसद और विधायक को अपनी सेवा के लिए चुना है, लेकिन इतनी बड़ी समस्या के बावजूद कोई धरना स्थल तक नहीं पहुंचा. उन्होंने कहा कि जनता सब देख रही है और समय आने पर जवाब भी देगी.
विनोद मौर्य और बजरंगी राय ने गिनाईं परेशानियां
विनोद कुमार मौर्य ने कहा कि प्रतिदिन 15 से 20 हजार लोग इस रेलवे क्रॉसिंग से गुजरते हैं. ओवरब्रिज बंद होने और गुमटी बंद होने से पूरे इलाके की आवाजाही प्रभावित हो गई है. वहीं बजरंगी राय ने कहा कि क्षेत्र के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है और जनप्रतिनिधियों को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.
गुड्डू शर्मा और अजित कुमार राम का ऐलान
गुड्डू शर्मा ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि आम जनता की सुविधा के लिए है. वहीं संविधान संघर्ष मोर्चा के विधानसभा अध्यक्ष अजित कुमार राम ने कहा कि यदि रेलवे क्रॉसिंग नहीं खोली गई तो शनिवार को किसी भी ट्रेन का परिचालन नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि हजारों लोग आंदोलन में शामिल होंगे.
महिलाओं ने संभाला आंदोलन का मोर्चा
धरना स्थल पर महिलाओं का आक्रोश भी साफ दिखाई दिया. आरती कुमारी ने कहा कि रेलवे क्रॉसिंग को जिस तरह बंद किया गया है, उससे ऐसा लगता है जैसे हिंदुस्तान और पाकिस्तान का बॉर्डर बना दिया गया हो. उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई तो हजारों महिलाएं रेलवे ट्रैक पर बैठेंगी.
सुनीता देवी ने कहा कि संघर्ष करने वाले कभी हार नहीं मानते. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रेलवे गुमटी नहीं खोली गई तो शनिवार को महिलाएं भी रेल रोको आंदोलन में शामिल होंगी.
दलित, अति पिछड़ा समान संघर्ष मोर्चा की महिला अध्यक्ष कृष्णावती देवी ने कहा कि जिला प्रशासन को एसी कमरों से निकलकर धरना स्थल की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हजारों लोग रोज इस रास्ते से आते-जाते हैं, लेकिन उनकी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है.
भूतपूर्व सैनिक भी आंदोलन में शामिल
भूतपूर्व सूबेदार लाल बिहारी प्रसाद ने कहा कि देश की सेवा करने के बाद अब वह जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो आंदोलनकारी रेलवे ट्रैक पर बैठेंगे, जेल जाएंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे.
कृष्णा कुमार ने समाधान की मांग उठाई
कृष्णा कुमार ने कहा कि रेलवे प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि रेलवे क्रॉसिंग बंद ही रखी गई तो लोग मजबूरी में रेलवे ट्रैक पार करेंगे, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहेगी.
आंदोलनकारियों का अंतिम ऐलान
धरना के अंत में सभी आंदोलनकारियों ने एक स्वर में घोषणा की कि जब तक इटाढ़ी रेलवे क्रॉसिंग दोबारा नहीं खोली जाएगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि यदि शनिवार तक प्रशासन और रेलवे ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो हजारों लोगों की मौजूदगी में रेल रोको आंदोलन किया जाएगा.
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