कहा कि सीपीआर का ज्ञान अब केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. समाज के हर व्यक्ति को यह तकनीक सीखनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके.

- कुछ मिनट की ट्रेनिंग, किसी की पूरी जिंदगी बचाने का हुनर
- डॉ. दिलशाद आलम बोले. हर घर में एक व्यक्ति को सीपीआर जरूर आना चाहिए
बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : अगर आपके सामने अचानक किसी व्यक्ति की सांसें थम जाएं या हार्ट अटैक आ जाए, तो एंबुलेंस का इंतजार ही एकमात्र विकल्प नहीं है. सही समय पर दिया गया सीपीआर किसी की जिंदगी बचा सकता है. इसी संदेश के साथ साबित खिदमत फाउंडेशन एवं हॉस्पिटल, चीनी मिल, बक्सर में लगातार दूसरे दिन भी सीपीआर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया, जहां करीब 100 लोगों ने जीवनरक्षक तकनीक सीखकर जरूरत पड़ने पर किसी की जान बचाने का संकल्प लिया.
सीखा, कैसे लौट सकती है थमती सांसें
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सीपीआर देने की सही विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया. प्रशिक्षकों ने बताया कि हार्ट अटैक, दुर्घटना या अचानक हृदय गति रुकने जैसी आपात स्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. ऐसे समय में सही तरीके से दिया गया सीपीआर मरीज की जान बचाने की संभावना कई गुना बढ़ा देता है.
डॉ. दिलशाद आलम ने दिया बड़ा संदेश
शिविर को संबोधित करते हुए डॉ. दिलशाद आलम ने कहा कि सीपीआर का ज्ञान अब केवल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए. समाज के हर व्यक्ति को यह तकनीक सीखनी चाहिए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके. उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक ही कई बार किसी परिवार की सबसे बड़ी उम्मीद बन जाते हैं.
लगातार चलाया जाएगा अभियान
फाउंडेशन की ओर से बताया गया कि अधिक से अधिक लोगों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से यह जीवनरक्षक अभियान आगे भी जारी रहेगा. संस्था ने लोगों से अपील की कि वे प्रशिक्षण लेकर अपने परिवार, मोहल्ले और समाज को अधिक सुरक्षित बनाने में सहयोग करें.
बड़ी संख्या में लोगों ने लिया प्रशिक्षण
शिविर में डॉ. दिलशाद आलम, श्याम नारायण, बाबन राम, पूजा, अफसरी, रोजी, सैदुन, खुशबू, नेहा, चंदन, नेमतुल्लाह, सोना, अमृता, फरजाना, हृदयानंद, अरुण, अरुण सिंह, राहुल, नतीम, सहीद सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर सीपीआर का प्रशिक्षण प्राप्त किया.
संदेश साफ. सीखिए सीपीआर, बनिए किसी की जिंदगी की उम्मीद
साबित खिदमत फाउंडेशन ने आम नागरिकों से इस जन-जागरूकता अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि कुछ मिनट का यह प्रशिक्षण किसी के लिए नई जिंदगी की शुरुआत बन सकता है. संस्था का मानना है कि हर घर में कम से कम एक व्यक्ति को सीपीआर का प्रशिक्षण अवश्य होना चाहिए.
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