वीडियो : बादल हों या कोहरा, फिर भी बनेगी बिजली! सोलर मेले में दूर हुई लोगों की बड़ी भ्रांतियां ..

मौके पर लगाए गए 3 किलोवाट के टाटा पावर सोलर सिस्टम से लोगों को बताया गया कि घने बादलों के बावजूद पैनल बिजली का उत्पादन कर रहे थे. इससे लोगों की कई भ्रांतियां दूर हुईं.





                             



- 3 किलोवाट सोलर प्लांट से हर महीने लगभग 3000 रुपये तक बिजली बिल में बचत का दावा
- विशेषज्ञ बोले, धूप नहीं बल्कि उजाला जरूरी, 30 साल तक की मिलती है पैनल की गारंटी

बक्सर टॉप न्यूज़, बक्सर : सौर ऊर्जा मेले में लोगों की सबसे बड़ी जिज्ञासा यही रही कि क्या बादलों और बरसात के मौसम में भी सोलर पैनल बिजली बनाते हैं. इस सवाल का जवाब विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के जरिए दिया. मौके पर लगाए गए 3 किलोवाट के टाटा पावर सोलर सिस्टम से लोगों को बताया गया कि घने बादलों के बावजूद पैनल बिजली का उत्पादन कर रहे थे. इससे लोगों की कई भ्रांतियां दूर हुईं.

मौके पर मौजूद रेयांश एनर्जी के प्रतिनिधि राकेश राय ने बताया कि मेले में 3 किलोवाट का सोलर सिस्टम प्रदर्शन के लिए लगाया गया था, ताकि आने वाले लोग इसकी कार्यप्रणाली को नजदीक से समझ सकें. इसमें इनवर्टर, एसीडीबी और डीसीडीबी की भूमिका भी बताई गई. उन्होंने कहा कि यही सिस्टम सोलर ऊर्जा को घर में उपयोग होने वाली बिजली में बदलता है और पूरे घर का लोड चलाता है.

हर महीने हजारों रुपये की बचत

प्रतिनिधि के अनुसार 1 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाने पर औसतन करीब 1000 रुपये, 2 किलोवाट पर लगभग 2000 रुपये और 3 किलोवाट के सिस्टम पर करीब 3000 रुपये प्रतिमाह तक बिजली बिल में बचत हो सकती है. इससे लंबे समय में उपभोक्ताओं को बड़ा आर्थिक लाभ मिलता है.

धूप नहीं, उजाला है जरूरी

लोगों की इस शंका का भी समाधान किया गया कि बादलों या कोहरे में सोलर काम नहीं करता. रेयांश एनर्जी के प्रतिनिधि ने बताया कि उनके यहां उपलब्ध आधुनिक सिलिकॉन आधारित सोलर पैनल सीधे तेज धूप पर नहीं, बल्कि उपलब्ध प्रकाश पर भी बिजली बनाते हैं. बादलों के कारण उत्पादन कुछ कम हो सकता है, लेकिन बिजली बनना बंद नहीं होती.

बंदरों से भी नहीं होगा नुकसान

बक्सर शहर में बंदरों के आतंक को देखते हुए लोगों ने सोलर पैनल की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे. इस पर बताया गया कि पैनलों के लिए विशेष रूप से मजबूत स्ट्रक्चर तैयार कराया गया है. साथ ही स्पष्ट किया गया कि सोलर पैनल सामान्य परिस्थितियों में आसानी से नहीं टूटते और उन्हें अधिक सुरक्षित बनाने के लिए अतिरिक्त इंजीनियरिंग उपाय भी किए गए हैं.

30 साल तक की गारंटी

विशेषज्ञों ने बताया कि सोलर पैनलों पर लगभग 30 वर्षों की गारंटी मिलती है. यदि निर्धारित मानकों के अनुसार बिजली उत्पादन कम होने लगे तो कंपनी पैनल को बदल देती है. यह गारंटी उत्पादन क्षमता से जुड़ी होती है, न कि बाहरी क्षति से.

बिहार और यूपी में हो रही सप्लाई

रेयांश एनर्जी के प्रतिनिधि राकेश कुमार राय ने बताया कि उनकी कंपनी चौसा स्थित प्लांट में सोलर स्ट्रक्चर का निर्माण करती है. यहां सी-चैनल, एस-चैनल और बेस प्लेट सहित पूरे स्ट्रक्चर का उत्पादन होता है. कंपनी की लगभग 90 प्रतिशत सप्लाई बिहार और 10 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में होती है. प्लांट की उत्पादन क्षमता करीब 300 टन प्रतिमाह है.

आज ही पाएं बिजली बिल से मुक्ति, संपर्क करें  : 9554038146, 8881999842

वीडियो : 














Post a Comment

0 Comments